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विलुप्त हो रही प्रजातियों को बचाने की हो पहल
बदायूं।
Updated Fri, 03 Mar 2017 11:26 PM IST
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education
- फोटो : amar ujala
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एनएमएसएन दास कॉलेज में वन्य जीव संरक्षण पर गोष्ठी
एनएमएसएन दास पीजी कॉलेज में जंतु विज्ञान विभाग के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय वन्य जीव संरक्षण दिवस के अवसर पर हुई गोष्ठी में मुख्य अतिथि वनाधिकारी ईश्वरी दयाल ने पर्यावरण संरक्षण तथा राष्ट्रीय वन नीति पर रोशनी डालते हुए कहा कि बदायूं का वन क्षेत्र आवश्यकता से 31 फीसदी कम है।
मुख्य वन आरक्षी सतेंद्र कुमार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के अभाव में मानव जाति का विनाश सुनिश्चित है और यह वन्य जीवों के संरक्षण में भी मददगार है। जंतु विज्ञानी डॉ. आरके शर्मा ने खाद्य शृंखला के शीर्ष वन्य जीवों की पर्यावरण संतुलन, विकास तथा संरक्षण में महत्व को विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि वन्य जीव संरक्षण बौद्धिक चिंतन से निकलकर सामाजिक तथा धार्मिक चिंतन का विषय बनना चाहिए। धार्मिक जुलूस तथा जलसों में वन्य जीव तथा पर्यावरण विषयों के महत्व का प्रस्तुतिकरण आज की आवश्यकता है। डॉ. शैलेंद्र कबीर ने कहा कि मनुष्य और वन्य जीवों का सह अस्तित्व है। भौतिकता वादी सोच से मनुष्य ने अपनी स्वार्थपरता से इनका वजूद खतरे में डाल दिया है। जीवों की अनेक प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर है। इन्हें बचाने की पहल गंभीरतापूर्वक होनी चाहिए। डॉ. अमित वैश्य, डॉ. जीएस रावत के अलावा छात्र-छात्राओं ने भी विचार रखे। इस मौके पर डॉ. दिनेश चंद्रा, प्रवेंद्र तथा हसन शबाब आदि मौजूद रहे।
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एनएमएसएन दास पीजी कॉलेज में जंतु विज्ञान विभाग के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय वन्य जीव संरक्षण दिवस के अवसर पर हुई गोष्ठी में मुख्य अतिथि वनाधिकारी ईश्वरी दयाल ने पर्यावरण संरक्षण तथा राष्ट्रीय वन नीति पर रोशनी डालते हुए कहा कि बदायूं का वन क्षेत्र आवश्यकता से 31 फीसदी कम है।
मुख्य वन आरक्षी सतेंद्र कुमार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के अभाव में मानव जाति का विनाश सुनिश्चित है और यह वन्य जीवों के संरक्षण में भी मददगार है। जंतु विज्ञानी डॉ. आरके शर्मा ने खाद्य शृंखला के शीर्ष वन्य जीवों की पर्यावरण संतुलन, विकास तथा संरक्षण में महत्व को विस्तार से बताया।
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उन्होंने कहा कि वन्य जीव संरक्षण बौद्धिक चिंतन से निकलकर सामाजिक तथा धार्मिक चिंतन का विषय बनना चाहिए। धार्मिक जुलूस तथा जलसों में वन्य जीव तथा पर्यावरण विषयों के महत्व का प्रस्तुतिकरण आज की आवश्यकता है। डॉ. शैलेंद्र कबीर ने कहा कि मनुष्य और वन्य जीवों का सह अस्तित्व है। भौतिकता वादी सोच से मनुष्य ने अपनी स्वार्थपरता से इनका वजूद खतरे में डाल दिया है। जीवों की अनेक प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर है। इन्हें बचाने की पहल गंभीरतापूर्वक होनी चाहिए। डॉ. अमित वैश्य, डॉ. जीएस रावत के अलावा छात्र-छात्राओं ने भी विचार रखे। इस मौके पर डॉ. दिनेश चंद्रा, प्रवेंद्र तथा हसन शबाब आदि मौजूद रहे।
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