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हेलमेट हम देंगे, आप केवल लगा लें

Fri, 23 Feb 2018 12:35 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं Updated Fri, 23 Feb 2018 12:35 AM IST
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initiative for helmet taken by business houses
हेलमेट - फोटो : amar ujala
सड़क हादसों के समय सिर की सुरक्षा करने वाले हेलमेट की प्रासंगिकता को वाहन चालक भले न समझें पर पिछले दिनों पुलिस और सामाजिक संस्थाओं ने बखूबी इसकी चिंता की। कृष्णाराज सोसायटी के अधीन चलने वाले ब्लूमिंगडेल स्कूल के निदेशक ज्योति मेंहदीरत्ता और हीरो बाइक्स की अधिकृत एजेंसी जीएस हीरो के निदेशक अनुपम गुप्ता जिम्मी ने पुलिस को सौ-सौ हेलमेट उपलब्ध कराए थे। बाद में प्रकाश केमिकल के प्रीतिश गुप्ता ने भी सौ हेलमेट दिए। एसएसपी चंद्रप्रकाश के नेतृत्व में सीओ सिटी वीरेंद्र यादव ने पुलिस लाइंस में कैंप लगवाकर यह हेलमेट वाहन चालकों को निशुल्क रूप से बांटे। मेंहदीरत्ता और अनुपम साफ कहते हैं कि लोगों में अच्छी आदत डालने के लिए उन्होंने यह सहयोग किया था। लोग इसे सकारात्मक तरीके से लें और दूसरों को भी हेलमेट के लाभ समझाकर इसे लगाने के लिए प्रेरित करें। प्रशासन को जब जरूरत महसूस होगी, वह इस तरह की मदद के लिए तैयार रहेंगे।
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सड़क हादसों के मुकदमे लिखकर भूल जाती है पुलिस
सड़क हादसों की अनगिनत घटनाओं में केस गिनती के ही दर्ज होते हैं। जो दर्ज होते भी हैं उनमें विवेचना की रफ्तार बेहद सुस्त होती है। हालांकि पुलिस के रिकार्ड में सड़क हादसों की संख्या हर साल कम हो रही है। इसकी वजह वह जागरूकता अभियान को बताती है। 
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जिले में 2017 में कुल 515 सड़क हादसे होने का रिकार्ड पुलिस के पास दर्ज है। इससे पूर्व के वर्षों में यह आंकड़ा 600 या उससे ऊपर पहुंचा है। जनवरी से अब तक इसी श्रेणी के 36 मामले दर्ज हो चुके हैं। पुलिस का रिकार्ड ही बताता है कि इस तरह के प्रचलित मामलों में विवेचना की रफ्तार बेहद सुस्त है। कुछ मामलों में ही चार्जशीट सीओ दफ्तर आ सकी है। बाकी सभी मामलों में विवेचना लंबित दिखाई जा रही है। सूत्र बताते हैं कि एक्सीडेंट के मामलों में पुलिस को खास कमाई नहीं होती, इसलिए इसकी बजाय वह हत्या, लूट आदि के संगीन मामलों के खुलासे में धरपकड़ पर ज्यादा यकीन रखती है। एमवी एक्ट में आरोपी को ज्यादा सजा न होने के प्रावधान ने भी पुलिस की सुस्ती बढ़ाई है। इस श्रेणी के आरोपियों को गिरफ्तारी या बड़ी कार्रवाई का ज्यादा भय नहीं होता, इसलिए वह पुलिस की उतनी चिरौरी नहीं करते। अधिकतर मामलों में घटना से संबंधित ड्राइवर की बजाय ड्राइविंग लाइसेंस धारक किसी भी शख्स को पेश कर दिया जाता है। आसानी से इन्हें जमानत भी मिल जाती है। 
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ब्लैक स्पॉट और सुरक्षा उपायों ने घटाए हादसे 
बदायूं। सच्चाई तो यह है कि वाहन और आबादी बढ़ने तथा सड़कें सिकुड़ने की वजह से सड़क हादसों में बढ़ोतरी हुई है पर पुलिस इससे इंकार करती है। टीएसआई बताते हैं कि अधिक हादसे होने वाले ब्लैक स्पॉट पर चेतावनी वाले बोर्ड लगाने, ब्रेकर लगाने से काफी फर्क पड़ा है। इसके अलावा डिवाइडरों में जरूरत से ज्यादा कट होने से भी हादसे होते थे, अब इन कट को सीमित किया गया है। 
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