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गुलाल का इस्तेमाल बढ़ा फीके पड़े गीले रंग
ब्यूरो/उझानी (बदायूं)।
Updated Fri, 25 Mar 2016 11:58 PM IST
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रंग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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- स्कूलों में बच्चों को पढ़ाया पाठ आया काम
- कई बच्चों ने घरवालों को भी किया प्रेरित
- दुकानदारों ने माना-कम बिके गीले रंग
गीले रंगों से शारीरिक नुकसान को लेकर पिछले दिनों स्कूली कार्यक्रम के जरिए चलाए गए जागरूकता अभियान होली पर इस बार कारगर साबित हुआ। अधिकतर हुरियारों के हाथ में अबीर और गुलाल दिखा। बहुत कम लोग ही ऐसे थे जिन्होंने लिक्विड कलर का इस्तेमाल किया। गुलाल के आगे लिक्विड कलर फीके पड़ गए।
यहां के कई स्कूलों में लिक्वड कलर के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के प्रति बच्चों को सजग करते हुए उन्हें यह संदेश भी दिया गया था कि वह अपने घरवालों को भी प्रेरित करें। देवनागरी कॉलेज, एस्सल पब्लिक स्कूल, आरके पब्लिक स्कूल और न्यू लिटिल एंजिल स्कूल समेत शिक्षा के कई मंदिरों में तो बाकायदा यह भी बताया गया था कि लिक्वड़ कलर के इस्तेमाल की वजह से त्वचा संबंधी रोगों में वृद्धि हो रही है। जागरूकता की वजह से ज्यादातर दुकानों पर लिक्विड कलर की बिक्री प्रभावित हुई।
दुकानदारों में अर्जुन की मानें तो लिक्विड कलर पहले के मुकाबले महज 20 फीसदी ही बिका। सर्वाधिक बिक्री गुलाल की हुई। गुलाल में इस बार मार्केट में इत्र वाले आइटम भी थे। जानकारों की मानें तो लिक्विड कलर के प्रति ऐसे ही लोगों का जागरूक किया जाता रहा तो वह दिन भी दूर नहीं कि शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले कलर का इस्तेमाल सिफर हो जाए। इस बार देहात क्षेत्र में भी जागरूकता का असर नजर आया। होली वाले दिन ज्यादातर हुरियारों ने अबीर और गुलाल से त्योहार का लुत्फ उठाया। ऐसे लोगों का कहना है कि गुलाल का साइड इफेक्ट नहीं है।
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कछला में एक दिन बाद मनाया त्योहार
उझानी। होली चाहे जिस दिन हो लेकिन कछला में होली का रंग एक दिन बाद ही खेला जाता है। सालों पुरानी परंपरा को कछला के लोगों ने इस बार भी निभाया। शुक्रवार सुबह से रंग खेलने का जो दौर शुरू हुआ, वह दोपहर बाद तक चला। कई परिवार के सदस्यों ने त्योहार मनाने से पहले गंगा स्नान भी किया। घरों में लजीज पकवान बने। बच्चों के साथ परिवार के सदस्यों ने लजीज पकवानों का लुत्फ उठाया।
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- कई बच्चों ने घरवालों को भी किया प्रेरित
- दुकानदारों ने माना-कम बिके गीले रंग
गीले रंगों से शारीरिक नुकसान को लेकर पिछले दिनों स्कूली कार्यक्रम के जरिए चलाए गए जागरूकता अभियान होली पर इस बार कारगर साबित हुआ। अधिकतर हुरियारों के हाथ में अबीर और गुलाल दिखा। बहुत कम लोग ही ऐसे थे जिन्होंने लिक्विड कलर का इस्तेमाल किया। गुलाल के आगे लिक्विड कलर फीके पड़ गए।
यहां के कई स्कूलों में लिक्वड कलर के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के प्रति बच्चों को सजग करते हुए उन्हें यह संदेश भी दिया गया था कि वह अपने घरवालों को भी प्रेरित करें। देवनागरी कॉलेज, एस्सल पब्लिक स्कूल, आरके पब्लिक स्कूल और न्यू लिटिल एंजिल स्कूल समेत शिक्षा के कई मंदिरों में तो बाकायदा यह भी बताया गया था कि लिक्वड़ कलर के इस्तेमाल की वजह से त्वचा संबंधी रोगों में वृद्धि हो रही है। जागरूकता की वजह से ज्यादातर दुकानों पर लिक्विड कलर की बिक्री प्रभावित हुई।
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दुकानदारों में अर्जुन की मानें तो लिक्विड कलर पहले के मुकाबले महज 20 फीसदी ही बिका। सर्वाधिक बिक्री गुलाल की हुई। गुलाल में इस बार मार्केट में इत्र वाले आइटम भी थे। जानकारों की मानें तो लिक्विड कलर के प्रति ऐसे ही लोगों का जागरूक किया जाता रहा तो वह दिन भी दूर नहीं कि शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले कलर का इस्तेमाल सिफर हो जाए। इस बार देहात क्षेत्र में भी जागरूकता का असर नजर आया। होली वाले दिन ज्यादातर हुरियारों ने अबीर और गुलाल से त्योहार का लुत्फ उठाया। ऐसे लोगों का कहना है कि गुलाल का साइड इफेक्ट नहीं है।
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कछला में एक दिन बाद मनाया त्योहार
उझानी। होली चाहे जिस दिन हो लेकिन कछला में होली का रंग एक दिन बाद ही खेला जाता है। सालों पुरानी परंपरा को कछला के लोगों ने इस बार भी निभाया। शुक्रवार सुबह से रंग खेलने का जो दौर शुरू हुआ, वह दोपहर बाद तक चला। कई परिवार के सदस्यों ने त्योहार मनाने से पहले गंगा स्नान भी किया। घरों में लजीज पकवान बने। बच्चों के साथ परिवार के सदस्यों ने लजीज पकवानों का लुत्फ उठाया।