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भूसे का भाव बढ़ने से पशुपालक परेशान
Bisuli
Updated Tue, 09 Jun 2015 07:33 PM IST
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भूसा का भाव चार सौ रुपये क्विंटल तक पहुंच गया है। वहीं बाजार में काला भूसा आने के कारण भी पशुपालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
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गेहूं की पैदावार को तो बारिश और ओलों ने चौपट कर दिया, लेकिन अब भूसा काला होने के कारण भी किसान के सामने बड़ी समस्या आ गई है। एक तो यह है कि पैदावार प्रभावित होने पर भूसा कम निकला और दूसरी उसका रंग काला है। पशु भी इसे चाव से नहीं खा रहे हैं। इसका प्रभाव दूध पर दिखाई दे रहा है। इधर, भूसा कम होने के कारण अभी से भाव चार सौ रुपये प्रति क्विंटल को पार कर रहा है। अभी तो गर्मी के मौसम की शुरूआत है, इसी समय भूसा के आसमान चढ़ते भाव पशुपालकों के लिए चिंता का विषय है। गौर करने वाली बात है कि एक ओर तो भूसे का भाव आसमान छू रहा है, दूसरा भूसा क्षेत्र से बाहर भी बेचा जा रहा है। अगर भूसा का बाहर जाना नहीं रुका तो जाड़े के मौसम में कीमत और भी बढ़ जाएगी। पशुपालक रामदास, गिरधारी, रामचंद्र आदि का कहना है कि भूसे के भाव अगर स्थिर नहीं रहे तो आने वाले समय में और दिक्कत आएगी। उन्होंने भूसे को बाहर जाने से रोकने की भी मांग उठाई।
खल-चोकर पर भी छाई महंगाई
भूसा के बाद खल और चोकर के भाव भी आसमान छू रहे हैं। सरसों के दाम चार हजार पार करने के कारण खल की कीमत 25 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। ऐसी हालत में दुधारू पशुओं का पालना मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही चोकर का भाव भी 20 रुपये प्रति किलो से ज्यादा है। पशुपालक बढ़ते भावों से चिंतित हैं। अगर दाम यूं ही बढ़ते रहे तो दूध का महंगा होना तय है।
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