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तीन साल में बढ़ गए 340 काले हिरन
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jun 2016 11:01 PM IST
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वन विभाग ने तीन साल बाद वन्य जीव गणना पूरी कर ली है। इसकी सूची शासन को भेजी जा रही है। गणना में अभिरक्षित और संरक्षित श्रेणी के काले हिरन तीन साल में 340 बढ़ गए हैं। अब इनकी संख्या 1,437 हो गई है। वन अधिकारी काले हिरनों के लिए बदायूं का पर्यावरण मुफीद मान रहा है। जिले में बंदरों की संख्या में भी अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। वहीं, भेड़िया और जंगली सुअर कम हो रहे हैं।
इससे पहले वन विभाग ने वर्ष 2013 में वन्य जीवों की गणना कराई थी। उस समय अभिरक्षित और संरक्षित श्रेणी के ब्लैक बक (काले हिरन) 1097 थे। अब तीन साल बाद हुई गणना में इनकी संख्या बढ़कर 1437 हो गई है। पहली बार वन्य जीवों में पाड़ा हिरन की गणना भी हुई है। इनकी संख्या 17 है। गणना के अनुसार, सबसे अधिक संख्या बंदरों की है। ये वन्य जीव हैं लेकिन अधिकतर बंदर आबादी में रहते हैं। इनकी संख्या गत वर्ष 24624 थी जो बढ़कर 27940 हो गई है। पिछली गणना में भेड़िया पांच थे। मगर इस गणना में इनकी संख्या मात्र चार रह गई है। जबकि लोमड़ी 215 से बढ़कर 281 हो गई हैं। सियारों की संख्या भी बढ़ी है। इनकी संख्या 961 हो गई है। जंगली बिल्ली भी कम हुई हैं। पहले इनकी संख्या 34 थी, अब 18 रह गई है।
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बिज्जू और गोह की भी हुई गिनती
पाड़ा हिरन की तरह इस गणना में बिज्जू और गोह को भी शामिल किया गया है। बिज्जू 26 हैं तो गोह 22। अब तक इन वन्य जीवों को गणना में शामिल नहीं किया जाता था। पहली बार शासन के निर्देश पर इन वन्य जीवों को गणना में शामिल किया गया है।
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वनरोज की संख्या में भी इजाफा
वन्य जीवों की गणना में वनरोज (नीलगाय) की संख्या तेजी से बढ़ी है, गत गणना में वनरोज 8027 थे जो बढ़कर 10394 हो गए हैं। इसी श्रेणी में आने वाली वन गायें पहले 1684 थीं जो बढ़कर 2842 हो गई हैं। ये सामान्य गाय हैं जो लोग जंगल में छोड़ देते हैं। ये भी वनरोज की तरह किसानों की फसलें बर्बाद करती हैं।
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कुछ प्रमुख वन्य जीवों गणना रिकार्ड
वन्य जीव 2011 2013 2016
ब्लैक बक 992 1097 1437
वनरोज 12553 8027 10394
भेड़िया गणना नहीं 05 04
लोमड़ी गणना नहीं 215 281
सियार गणना नहीं 454 961
जंगली बिल्ली गणना नहीं 34 18
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वन्य जीवों की गणना हो चुकी है। इस गणना के लिए मई माह में तीन दिन निर्धारित किए गए थे। गणना का संकलन हो चुका है। शासन को गणना रिपोर्ट भेजी जा रही है। अब तीन साल बाद वर्ष 2019 में ही गणना होगी। खुशी की बात यह है कि काले हिरनों के लिए बदायूं की जलवायु मुफीद है। इसलिए इनकी संख्या में इजाफा हुआ है।
- समीर कुमार, डीएफओ, बदायूं
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इससे पहले वन विभाग ने वर्ष 2013 में वन्य जीवों की गणना कराई थी। उस समय अभिरक्षित और संरक्षित श्रेणी के ब्लैक बक (काले हिरन) 1097 थे। अब तीन साल बाद हुई गणना में इनकी संख्या बढ़कर 1437 हो गई है। पहली बार वन्य जीवों में पाड़ा हिरन की गणना भी हुई है। इनकी संख्या 17 है। गणना के अनुसार, सबसे अधिक संख्या बंदरों की है। ये वन्य जीव हैं लेकिन अधिकतर बंदर आबादी में रहते हैं। इनकी संख्या गत वर्ष 24624 थी जो बढ़कर 27940 हो गई है। पिछली गणना में भेड़िया पांच थे। मगर इस गणना में इनकी संख्या मात्र चार रह गई है। जबकि लोमड़ी 215 से बढ़कर 281 हो गई हैं। सियारों की संख्या भी बढ़ी है। इनकी संख्या 961 हो गई है। जंगली बिल्ली भी कम हुई हैं। पहले इनकी संख्या 34 थी, अब 18 रह गई है।
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बिज्जू और गोह की भी हुई गिनती
पाड़ा हिरन की तरह इस गणना में बिज्जू और गोह को भी शामिल किया गया है। बिज्जू 26 हैं तो गोह 22। अब तक इन वन्य जीवों को गणना में शामिल नहीं किया जाता था। पहली बार शासन के निर्देश पर इन वन्य जीवों को गणना में शामिल किया गया है।
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वनरोज की संख्या में भी इजाफा
वन्य जीवों की गणना में वनरोज (नीलगाय) की संख्या तेजी से बढ़ी है, गत गणना में वनरोज 8027 थे जो बढ़कर 10394 हो गए हैं। इसी श्रेणी में आने वाली वन गायें पहले 1684 थीं जो बढ़कर 2842 हो गई हैं। ये सामान्य गाय हैं जो लोग जंगल में छोड़ देते हैं। ये भी वनरोज की तरह किसानों की फसलें बर्बाद करती हैं।
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कुछ प्रमुख वन्य जीवों गणना रिकार्ड
वन्य जीव 2011 2013 2016
ब्लैक बक 992 1097 1437
वनरोज 12553 8027 10394
भेड़िया गणना नहीं 05 04
लोमड़ी गणना नहीं 215 281
सियार गणना नहीं 454 961
जंगली बिल्ली गणना नहीं 34 18
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वन्य जीवों की गणना हो चुकी है। इस गणना के लिए मई माह में तीन दिन निर्धारित किए गए थे। गणना का संकलन हो चुका है। शासन को गणना रिपोर्ट भेजी जा रही है। अब तीन साल बाद वर्ष 2019 में ही गणना होगी। खुशी की बात यह है कि काले हिरनों के लिए बदायूं की जलवायु मुफीद है। इसलिए इनकी संख्या में इजाफा हुआ है।
- समीर कुमार, डीएफओ, बदायूं