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Budaun News: देहात में पशु चिकित्सा पैरावेट्स के भरोसे...बाहर से लेनी पड़ रहीं दवाइयां
Tue, 31 Dec 2024 01:06 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 31 Dec 2024 01:06 AM IST
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बदायूं। देहात क्षेत्र में पशु चिकित्सा व्यवस्था पैरावेट्स के जरिये चल रही है। सोमवार को सहसवान, अलापुर, उझानी और वजीरगंज में यही हाल देखने को मिला। पशु चिकित्सक कहीं जिला स्तरीय बैठक में होने बताए गए तो कहीं अस्पताल में जानवरों के इलाज के लिए पहुंचे पशुपालकों को पैरावेट्स के अलावा कोई और नहीं मिला। यहां पशुपालकों को पैरावेट्स ने पर्चा लिख और दवा बाजार से जाकर खरीद लेने की बात कहकर टरका दिया।
उझानी ब्लॉक परिसर स्थित पशु चिकित्सालय में सोमवार को दिन में 11 बजे पैरावेट्स हरीओम पाल और जागेश कुमार मिले। इसी दौरान बरामालदेव की मीना पत्नी प्रमोद पहुंचीं। उन्होंने अपनी गाय में खून चूसने वाले कीड़े (किलनी) लग जाने के बारे में बताया। पैरावेट्स ने उन्हें दवा दी और लगाने की विधि भी समझा दी। पशु चिकित्सक डॉ. विवेक माहेश्वरी जिला मुख्यालय पर बैठक में बताए गए। फोन पर बात हुई तो उन्होंने बताया कि वह दोपहर बाद लौटेंगे। इसके बाद गांवों में जाकर पशु गणना भी करानी है।
अलापुर का पशु चिकित्सालय तो अपने वजूद को लेकर संकट में है। कई साल से यहां सफाई तक नहीं कराई गई। पशु के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे मोहित यादव ने बताया कि अस्पताल बंद रहता है। जब भी पशु बीमार पड़ते हैं, उन्हें दिखाने के लिए झोलाछाप का सहारा लेना पड़ता है। सरकारी स्तर से कोई दवा नहीं मिलती। पर्चे लेकर बाजार से दवा खरीदकर लानी पड़ती है।
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उसावां का पशु चिकित्सालय खुला तो मिला, लेकिन पशु चिकित्सा कर्मी सतीश सैनी और मोहम्मद नाजिम के अलावा कोई और नजर नहीं आया। पूछने पर दोनों ने बता दिया कि पशु चिकित्सक योगेश कुमार गोआश्रय का भ्रमण करने के लिए गए हैं।
आसफपुर का राजकीय पशु चिकित्सालय चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के बलबूते अस्तित्व में है। पशु चिकित्सक दीप कुमार वार्ष्णेय रोजाना नहीं आते। कभी कभार ही आते हैं। दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के बलबूते अस्पताल संचालित हो रहा है। मानपुर, मन्नू नगर और लक्ष्मीपुर में मिनी अस्पताल है। वहां तैनात पशुधन प्रसार अधिकारी भी अपनी मर्जी से ड्यूटी करते हैं। सोमवार दोपहर एक कुत्ता और दो बकरी इलाज को लाए गए। एंबुलेंस थी, लेकिन स्टाफ नजर नहीं आया।
अंबियापुर पशु अस्पताल में तो स्टाफ ही नहीं
बिल्सी। अंबियापुर ब्लाॅक परिसर में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय है। इसकी स्थिति लंबे समय दयनीय बनी हुई है। यहां पर डिप्टी सीवीओ के पद के साथ कई कर्मचारियों के पद रिक्त चल रहे हैं। इसके कारण क्षेत्र के पशु पालकों को इसका उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में यहां मुडिया धुरेकी अस्पताल पर तैनात डाॅ. रविंद्र सिह पर पशु चिकित्साधिकारी का अतिरिक्त चार्ज है। जो सप्ताह में तीन दिन ही बैठते हैं। ब्लाॅक क्षेत्र के अंतर्गत रिसौली, निजामपुर और बेहटा गुंसाई गांव में पशु सेवा केंद्र है। इसमें से रिसौली केंद्र पर कोई पशुधन प्रसार अधिकारी तैनात नहीं है। जो लंबे से रिक्त चल रहा है। यहां मिले पशुधन प्रसार अधिकारी सुशील कुमार सिंह ने बताया कि चिकित्सकों के अभाव में उन्हें ही पशुओं का इलाज करना पड़ता है। साथ ही अस्पताल पर एक मोबाइल वैन भी शासन की ओर से दी गई है। जो कॉल करके पशु पालक इलाज के लिए अपने यहां बुला सकते है। संवाद
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उझानी ब्लॉक परिसर स्थित पशु चिकित्सालय में सोमवार को दिन में 11 बजे पैरावेट्स हरीओम पाल और जागेश कुमार मिले। इसी दौरान बरामालदेव की मीना पत्नी प्रमोद पहुंचीं। उन्होंने अपनी गाय में खून चूसने वाले कीड़े (किलनी) लग जाने के बारे में बताया। पैरावेट्स ने उन्हें दवा दी और लगाने की विधि भी समझा दी। पशु चिकित्सक डॉ. विवेक माहेश्वरी जिला मुख्यालय पर बैठक में बताए गए। फोन पर बात हुई तो उन्होंने बताया कि वह दोपहर बाद लौटेंगे। इसके बाद गांवों में जाकर पशु गणना भी करानी है।
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अलापुर का पशु चिकित्सालय तो अपने वजूद को लेकर संकट में है। कई साल से यहां सफाई तक नहीं कराई गई। पशु के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे मोहित यादव ने बताया कि अस्पताल बंद रहता है। जब भी पशु बीमार पड़ते हैं, उन्हें दिखाने के लिए झोलाछाप का सहारा लेना पड़ता है। सरकारी स्तर से कोई दवा नहीं मिलती। पर्चे लेकर बाजार से दवा खरीदकर लानी पड़ती है।
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उसावां का पशु चिकित्सालय खुला तो मिला, लेकिन पशु चिकित्सा कर्मी सतीश सैनी और मोहम्मद नाजिम के अलावा कोई और नजर नहीं आया। पूछने पर दोनों ने बता दिया कि पशु चिकित्सक योगेश कुमार गोआश्रय का भ्रमण करने के लिए गए हैं।
आसफपुर का राजकीय पशु चिकित्सालय चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के बलबूते अस्तित्व में है। पशु चिकित्सक दीप कुमार वार्ष्णेय रोजाना नहीं आते। कभी कभार ही आते हैं। दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के बलबूते अस्पताल संचालित हो रहा है। मानपुर, मन्नू नगर और लक्ष्मीपुर में मिनी अस्पताल है। वहां तैनात पशुधन प्रसार अधिकारी भी अपनी मर्जी से ड्यूटी करते हैं। सोमवार दोपहर एक कुत्ता और दो बकरी इलाज को लाए गए। एंबुलेंस थी, लेकिन स्टाफ नजर नहीं आया।
अंबियापुर पशु अस्पताल में तो स्टाफ ही नहीं
बिल्सी। अंबियापुर ब्लाॅक परिसर में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय है। इसकी स्थिति लंबे समय दयनीय बनी हुई है। यहां पर डिप्टी सीवीओ के पद के साथ कई कर्मचारियों के पद रिक्त चल रहे हैं। इसके कारण क्षेत्र के पशु पालकों को इसका उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में यहां मुडिया धुरेकी अस्पताल पर तैनात डाॅ. रविंद्र सिह पर पशु चिकित्साधिकारी का अतिरिक्त चार्ज है। जो सप्ताह में तीन दिन ही बैठते हैं। ब्लाॅक क्षेत्र के अंतर्गत रिसौली, निजामपुर और बेहटा गुंसाई गांव में पशु सेवा केंद्र है। इसमें से रिसौली केंद्र पर कोई पशुधन प्रसार अधिकारी तैनात नहीं है। जो लंबे से रिक्त चल रहा है। यहां मिले पशुधन प्रसार अधिकारी सुशील कुमार सिंह ने बताया कि चिकित्सकों के अभाव में उन्हें ही पशुओं का इलाज करना पड़ता है। साथ ही अस्पताल पर एक मोबाइल वैन भी शासन की ओर से दी गई है। जो कॉल करके पशु पालक इलाज के लिए अपने यहां बुला सकते है। संवाद

रूबीना।- फोटो : mathura