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एक पल में काफूर हो गईं खुशियां, मातम पसरा
बदायूं।
Updated Wed, 20 Sep 2017 12:19 AM IST
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हादसा
- फोटो : अमर उजाला
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सड़क हादसे में दूल्हे समेत 10 लोगों की मौत का मामला, हर चेहरा दु:ख में डूबा
दोपहर करीब तीन बजे का समय रहा होगा। दुल्हन के लिबास में सजी बैठी नाजरीन बेहद खुश थी। मायके वालों से जुदा होने का गम था...लेकिन अंदरखाने अपने जीवन साथी के साथ जाने की खुशी भी थी। आने वाले खौफनाक क्षणों का उसे सपने में भी भान न था। मायके वालों ने खुशी-खुशी नाजरीन को गाड़ी में बैठाया, लेकिन उन्होंने नहीं सोचा होगा कि ऊपरवाला क्या करने जा रहा है। अब दामाद अमजद फिर कभी उनके द्वार नहीं लौटेगा यह तो वह सोच भी नहीं सकते थे। बेटी को विदा करने के कुछ देर बाद ही हादसे की मनहूस खबर आई तो पहले किसी को यकीन ही नहीं हुआ। मगर हकीकत का पता चला तो कोहराम मच गया।
17 सितंबर को गांव मईबूचन निवासी इकबाल ने धूमधाम से बेटी नाजरीन का निकाह किया। नाते-रिश्तेदार सभी शरीक हुए। 18 सितंबर को नाजरीन की ससुराल में वलीमा हुआ। मायके वाले नाजरीन को उसी दिन बुलाकर ले गए। मंगलवार को दूल्हा अमजद परिवारीजनों के साथ पत्नी नाजरीन की विदा कराने गया। अमजद का चेहरा खुशी से चमक रहा था। अमजद की बहनें और बहनोई भी साथ में थे। जिस समय नाजरीन को विदा किया जा रहा था तब तीनों ननद इमराना, परवीन और सोनी बेहद खुश थीं। दोनों परिवारों के लोग बेहद खुश थे। मगर दोनों परिवारों की खुशियां पलक झपकते ही मातम में बदल गईं।
अलापुर। मई बूचन गांव के इकबाल और उनके परिवार वालों ने बेटी नाजरीन को खुशी-खुशी विदा किया था। घर में बेटी की विदाई की चर्चा ही चल रही थीं कि हादसे की मनहूस खबर इकबाल के घर पहुंची तो सभी सन्न रह गए।
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तीन दिन पहले रविवार को किसी ने यह सोचा नहीं होगा कि जिस बेटी को सदा सुहागन का आशीर्वाद देकर विदा कर रहे हैं व इस तरह विधवा हो जाएगी। मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।
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शादी बनी बहाना...मुंबई से मौत ले आई अमजद को घर
तीन बहनों के साथ चला गया मौत के आगोश में
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। कहा जाता है कि मौत के पीछे कुछ न कुछ बहाना अवश्य होता है। अमजद के साथ भी ऐसा ही हुआ है। शादी तो एक बहाना था। जिसके चलते वह मुंबई से यहां चला आया। अमजद को भी नहीं पता होगा कि अब वह कभी मुंबई नहीं लौटेगा। सबसे ज्यादा दुखद बात तो यह है कि तीन बहनों की मौत भी उसी के साथ हुई।
अलापुर थाना क्षेत्र के गांव आसपुर में मातम छाया हुआ है। सभी के घरों में रोने-चिल्लाने की आवाज आ रही हैं। अमजद के पिता इदरीस बेहद सीधे इंसान हैं। वह खेतीबाड़ी करते हैं। परिवारिक सूत्रों के मुताबिक इदरीस का बेटा अमजद कई साल से मुंबई में टेंपो चलाता। बाकी तीन बेटे उन्हीं के साथ खेतीबाड़ी में हाथ बांटते। इदरीस के दस संतानें थीं जिनमें चार बेटे और छह बेटियां। चार बेटियों के उन्होंने हाथ पीले कर दिए जबकि बेटे गुड्डू, जीशान और अमजद की शादी हो गई। छोटा बेटा अनीस जिसकी आयु करीब 20 बताई गई है। वह पढ़ाई कर रहा है।
अमजद की शादी इसी 17 सितंबर को हुई। सो परिवार में खुशी का माहौल था। घर के लोग दुल्हन को विदा कराने निकले थे। शायद किसी के जेहन में नहीं आया होगा कि दुल्हन को लेने जा रहे इन लोगों के साथ कोई हादसा हो जाएगा। हादसा भी ऐसा हुआ जिसने सब कुछ खत्म कर दिया। लोगों का कहना था कि क्या मौत मुंबई से अमजद को लेकर आई थी। जो शादी उसका बहाना बनी।
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....चीत्कारों से दहल उठा जिला अस्पताल
बदायूं। एक ही परिवार के 10 लोगों की मौत के बाद परिवार वालों की चीत्कार से जिला अस्पताल दहल उठा। कुछ ही देर में गांव वालों और रिश्तेदारों की भीड़ जमा हो गई। रिश्तेदार और नजदीकी लोग हालांकि पीड़ित परिवार के सदस्यों को ढाढ़स बंधाने में जुटे थे, लेकिन खुद के आंसू नहीं रोक पा रहे थे। देर शाम तक काफी संख्या में लोग जिला अस्पताल में जमे रहे।
अमजद की मां तसरीदन जवान बेटे, तीन बेटियों और नाती, पोते के गम में सुधबुध खो बैठीं। वह पागलों की तरह बातें करके अपने बेटे से मिलने की जिद कर रहीं थीं। उन्हें घेरे खड़े रिश्तेदार समझाने की कोशिश में लगे थे। दिल में पहाड़ सा गम लिए अमजद के पिता गुमसुम थे। लोगों के कई बार बुलाने पर बमुश्किल कुछ बोलते थे। मृतकों के भाई, बहन और रिश्तेदारों का बुरा हाल था।
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छावनी बना जिला अस्पताल
हादसे में 10 लोगों की मौत का पता लगने पर शहर कोतवाली, सिविल लाइंस और महिला थाने की पुलिस जिला अस्पताल पहुंच गई। इससे कुछ ही देर में जिला अस्पताल परिसर पुलिस छावनी नजर आने लगा। हालांकि पुलिस वाले भी पीड़ित परिवार वालों को ढाढ़स बंधाने की कोशिश कर रहे थे।
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शहर विधायक की भर आईं आंखें
शहर विधायक महेश चंद्र गुप्ता हादसे की खबर मिलने पर शाम को जिला अस्पताल पहुंच गए। वह पीड़ित परिवार के लोगों से मिले। परिवार वालों को बिलखता देख शहर विधायक की आंखें भी नम हो गईं।
विधायक ने पीड़ित परिवार वालों से कहा कि इस दुख की घड़ी में वह उनके साथ है। जो भी सहायता होगी वह करेंगे। श्री गुप्ता से पीड़ित परिवार वालों ने रात में ही पोस्टमार्टम कराने को कहा। इस पर विधायक ने डीएम और सीएमओ से बात की और रात में ही पोस्टमार्टम कराने को कहा। विधायक महेश गुप्ता ने कहा कि शासन स्तर से जो भी मदद हो सकती है वह कराएंगे। जिला अस्पताल प्रशासन से भी बात कर घायलों को बेहतर इलाज देने को कहा। चेताया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। पूर्व राज्यमंत्री भगवान सिंह शाक्य और पूर्व विधायक मुस्लिम खां भी पीड़ित परिवार के लोगों से मिले। उन्होंने भी हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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आसपुर में मातमी सन्नाटा
ककराला। हादसे में दूल्हे अमजद समेत नौ लोगों के मरने की खबर आसपुर पहुंची तो पूरे गांव में मातमी सन्नाटा छा गया। कुछ ही देर में पूरा गांव जिला अस्पताल जा पहुंचा। माता-पिता, भाई, परिवारीजन और रिश्तेदार रोते-बिलखते जिला अस्पताल जा पहुंचे। हर किसी की जुबान से बस यही शब्द निकल रहे थे ऊपर वाले यह क्या किया?
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तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह
ककराला। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जिस जायलो कार का हादसा हुआ उसकी रफ्तार काफी तेज थी। गाड़ी अचानक अनियंत्रित हुई और उल्टी साइड में जाकर पेड़ से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज हुई कि कार के परखचे उड़ गए और टकराने के बाद नीचे खाई में पलट गई। हादसे का पता लगने पर सीओ और अलापुर थाने के पुलिस वाले मौके पर जा पहुंचे। फौरन घायलों को जिला अस्पताल भेज दिया गया।
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कहां गए महिलाओं के जेवर और रुपये
बदायूं। हादसे की सूचना मिलने के बाद परिवार वाले जिला अस्पताल पहुंचे तो मृत महिलाओं के जेवर और पुरुषों की जेब से रुपये गायब थे। लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद जेवर लूट लिए गए।
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दोपहर करीब तीन बजे का समय रहा होगा। दुल्हन के लिबास में सजी बैठी नाजरीन बेहद खुश थी। मायके वालों से जुदा होने का गम था...लेकिन अंदरखाने अपने जीवन साथी के साथ जाने की खुशी भी थी। आने वाले खौफनाक क्षणों का उसे सपने में भी भान न था। मायके वालों ने खुशी-खुशी नाजरीन को गाड़ी में बैठाया, लेकिन उन्होंने नहीं सोचा होगा कि ऊपरवाला क्या करने जा रहा है। अब दामाद अमजद फिर कभी उनके द्वार नहीं लौटेगा यह तो वह सोच भी नहीं सकते थे। बेटी को विदा करने के कुछ देर बाद ही हादसे की मनहूस खबर आई तो पहले किसी को यकीन ही नहीं हुआ। मगर हकीकत का पता चला तो कोहराम मच गया।
17 सितंबर को गांव मईबूचन निवासी इकबाल ने धूमधाम से बेटी नाजरीन का निकाह किया। नाते-रिश्तेदार सभी शरीक हुए। 18 सितंबर को नाजरीन की ससुराल में वलीमा हुआ। मायके वाले नाजरीन को उसी दिन बुलाकर ले गए। मंगलवार को दूल्हा अमजद परिवारीजनों के साथ पत्नी नाजरीन की विदा कराने गया। अमजद का चेहरा खुशी से चमक रहा था। अमजद की बहनें और बहनोई भी साथ में थे। जिस समय नाजरीन को विदा किया जा रहा था तब तीनों ननद इमराना, परवीन और सोनी बेहद खुश थीं। दोनों परिवारों के लोग बेहद खुश थे। मगर दोनों परिवारों की खुशियां पलक झपकते ही मातम में बदल गईं।
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अलापुर। मई बूचन गांव के इकबाल और उनके परिवार वालों ने बेटी नाजरीन को खुशी-खुशी विदा किया था। घर में बेटी की विदाई की चर्चा ही चल रही थीं कि हादसे की मनहूस खबर इकबाल के घर पहुंची तो सभी सन्न रह गए।
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तीन दिन पहले रविवार को किसी ने यह सोचा नहीं होगा कि जिस बेटी को सदा सुहागन का आशीर्वाद देकर विदा कर रहे हैं व इस तरह विधवा हो जाएगी। मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।
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शादी बनी बहाना...मुंबई से मौत ले आई अमजद को घर
तीन बहनों के साथ चला गया मौत के आगोश में
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। कहा जाता है कि मौत के पीछे कुछ न कुछ बहाना अवश्य होता है। अमजद के साथ भी ऐसा ही हुआ है। शादी तो एक बहाना था। जिसके चलते वह मुंबई से यहां चला आया। अमजद को भी नहीं पता होगा कि अब वह कभी मुंबई नहीं लौटेगा। सबसे ज्यादा दुखद बात तो यह है कि तीन बहनों की मौत भी उसी के साथ हुई।
अलापुर थाना क्षेत्र के गांव आसपुर में मातम छाया हुआ है। सभी के घरों में रोने-चिल्लाने की आवाज आ रही हैं। अमजद के पिता इदरीस बेहद सीधे इंसान हैं। वह खेतीबाड़ी करते हैं। परिवारिक सूत्रों के मुताबिक इदरीस का बेटा अमजद कई साल से मुंबई में टेंपो चलाता। बाकी तीन बेटे उन्हीं के साथ खेतीबाड़ी में हाथ बांटते। इदरीस के दस संतानें थीं जिनमें चार बेटे और छह बेटियां। चार बेटियों के उन्होंने हाथ पीले कर दिए जबकि बेटे गुड्डू, जीशान और अमजद की शादी हो गई। छोटा बेटा अनीस जिसकी आयु करीब 20 बताई गई है। वह पढ़ाई कर रहा है।
अमजद की शादी इसी 17 सितंबर को हुई। सो परिवार में खुशी का माहौल था। घर के लोग दुल्हन को विदा कराने निकले थे। शायद किसी के जेहन में नहीं आया होगा कि दुल्हन को लेने जा रहे इन लोगों के साथ कोई हादसा हो जाएगा। हादसा भी ऐसा हुआ जिसने सब कुछ खत्म कर दिया। लोगों का कहना था कि क्या मौत मुंबई से अमजद को लेकर आई थी। जो शादी उसका बहाना बनी।
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....चीत्कारों से दहल उठा जिला अस्पताल
बदायूं। एक ही परिवार के 10 लोगों की मौत के बाद परिवार वालों की चीत्कार से जिला अस्पताल दहल उठा। कुछ ही देर में गांव वालों और रिश्तेदारों की भीड़ जमा हो गई। रिश्तेदार और नजदीकी लोग हालांकि पीड़ित परिवार के सदस्यों को ढाढ़स बंधाने में जुटे थे, लेकिन खुद के आंसू नहीं रोक पा रहे थे। देर शाम तक काफी संख्या में लोग जिला अस्पताल में जमे रहे।
अमजद की मां तसरीदन जवान बेटे, तीन बेटियों और नाती, पोते के गम में सुधबुध खो बैठीं। वह पागलों की तरह बातें करके अपने बेटे से मिलने की जिद कर रहीं थीं। उन्हें घेरे खड़े रिश्तेदार समझाने की कोशिश में लगे थे। दिल में पहाड़ सा गम लिए अमजद के पिता गुमसुम थे। लोगों के कई बार बुलाने पर बमुश्किल कुछ बोलते थे। मृतकों के भाई, बहन और रिश्तेदारों का बुरा हाल था।
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छावनी बना जिला अस्पताल
हादसे में 10 लोगों की मौत का पता लगने पर शहर कोतवाली, सिविल लाइंस और महिला थाने की पुलिस जिला अस्पताल पहुंच गई। इससे कुछ ही देर में जिला अस्पताल परिसर पुलिस छावनी नजर आने लगा। हालांकि पुलिस वाले भी पीड़ित परिवार वालों को ढाढ़स बंधाने की कोशिश कर रहे थे।
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शहर विधायक की भर आईं आंखें
शहर विधायक महेश चंद्र गुप्ता हादसे की खबर मिलने पर शाम को जिला अस्पताल पहुंच गए। वह पीड़ित परिवार के लोगों से मिले। परिवार वालों को बिलखता देख शहर विधायक की आंखें भी नम हो गईं।
विधायक ने पीड़ित परिवार वालों से कहा कि इस दुख की घड़ी में वह उनके साथ है। जो भी सहायता होगी वह करेंगे। श्री गुप्ता से पीड़ित परिवार वालों ने रात में ही पोस्टमार्टम कराने को कहा। इस पर विधायक ने डीएम और सीएमओ से बात की और रात में ही पोस्टमार्टम कराने को कहा। विधायक महेश गुप्ता ने कहा कि शासन स्तर से जो भी मदद हो सकती है वह कराएंगे। जिला अस्पताल प्रशासन से भी बात कर घायलों को बेहतर इलाज देने को कहा। चेताया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। पूर्व राज्यमंत्री भगवान सिंह शाक्य और पूर्व विधायक मुस्लिम खां भी पीड़ित परिवार के लोगों से मिले। उन्होंने भी हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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आसपुर में मातमी सन्नाटा
ककराला। हादसे में दूल्हे अमजद समेत नौ लोगों के मरने की खबर आसपुर पहुंची तो पूरे गांव में मातमी सन्नाटा छा गया। कुछ ही देर में पूरा गांव जिला अस्पताल जा पहुंचा। माता-पिता, भाई, परिवारीजन और रिश्तेदार रोते-बिलखते जिला अस्पताल जा पहुंचे। हर किसी की जुबान से बस यही शब्द निकल रहे थे ऊपर वाले यह क्या किया?
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तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह
ककराला। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जिस जायलो कार का हादसा हुआ उसकी रफ्तार काफी तेज थी। गाड़ी अचानक अनियंत्रित हुई और उल्टी साइड में जाकर पेड़ से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज हुई कि कार के परखचे उड़ गए और टकराने के बाद नीचे खाई में पलट गई। हादसे का पता लगने पर सीओ और अलापुर थाने के पुलिस वाले मौके पर जा पहुंचे। फौरन घायलों को जिला अस्पताल भेज दिया गया।
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कहां गए महिलाओं के जेवर और रुपये
बदायूं। हादसे की सूचना मिलने के बाद परिवार वाले जिला अस्पताल पहुंचे तो मृत महिलाओं के जेवर और पुरुषों की जेब से रुपये गायब थे। लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद जेवर लूट लिए गए।