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ये नहीं मानते साहब का आदेश, फिर दौड़ाने लगे डग्गामार
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बदायूं। रोडवेज चौराहे से अब शायद डग्गामार बसें नहीं हट पाएंगी, क्योंकि उन्हें हटवाने को पूरा परिवहन निगम एड़ी से लेकर चोटी तक का जोर लगा चुका है, और तो और, डीएम ने स्वयं आदेश दिए हैं कि कोई डग्गामार बस खड़ी नहीं होगी, फिर भी डग्गामार बस संचालक हैं कि दबंग की तरह चौराहे पर डग्गामार बसें लाकर खड़ी कर रहे हैं। ऐसे में लगता कि उन्हें पुलिस प्रशासन का बिल्कुल भी डर नहीं रहा है। कारगुजारी तो यहां तक है कि वे लोग रोडवेज की अनुबंधित बसों के रंग में रंगी बसों से यात्रियों को ले जाकर उन्हें तो चूना लगा ही रहे हैं परिवहन निगम को भी रोजाना लाखों रुपये की चपत लगा रहे हैं।
ऐसा लगता है कि जैसे डग्गामार बस संचालकों ने रोडवेज चौराहे पर कब्जा कर लिया है। पूरा चौराहा उनके नाम हो गया है, या फिर उनके ताल्लुकात ऐसे जनप्रतिनिधियों से हैं, जो सीधे प्रशासनिक अधिकारियों पर प्रभाव डाल रहे हैं। जिससे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश उनके लिए कोई मायने नहीं रखते। अभी एक दिन पहले स्वयं डीएम दिनेश कुमार सिंह ने रोडवेज बस स्टैंड का निरीक्षण किया था। इसी चौराहे पर चार डग्गामार बसें खड़ी मिलीं थीं, जिनमें एक बस काफी हद तक रोडवेज की अनुबंधित बस के रंग में थी। उसे बदायूं से बरेली रूट पर चलाया जा रहा था। उसका कोई परमिट भी नहीं था। इसके बावजूद खुलेआम सड़कों पर बस दौड़ रही थी। वो तो गनीमत रही थी कि डीएम की उस पर नजर पड़ी गई थी, जिससे उन्होंने चेकिंग करवाकर उस बस को सीज करा दिया था। इस बात को 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि शनिवार को फिर अनुबंधित बसों के रंग की बस आकर रोडवेज चौराहे पर लग गईं। बाकायदा बरेली की आवाज लगाकर सवारियां बैठाई गईं। एक बस में कासगंज के लिए सवारियां बैठाई गईं लेकिन इस दौरान उन्हें न तो किसी अधिकारी का खौफ नजर आया और न ही उन्होंने डीएम के आदेश माने। ऐसे में बस संचालक दबंगों की श्रेणी में आकर खड़े हो गए हैं।
रोडवेज बसों ने लगाया जाम
- एक तरफ डग्गामार बसें सिरदर्द बनी हुईं हैं तो वही रोडवेज बसों के चालक किसी से कम नहीं है। कई बार पुलिस अधिकारी कह चुके हैं कोई बस सड़क पर खड़ी नहीं होगी। इसके बावजूद रोडवेज बसों को सड़क पर खड़ा किया जा रहा है। इससे न सिर्फ सड़क पर जाम लग रहा है बल्कि लोगों को उधर से गुजरने में मुसीबत पैदा हो रही है। शनिवार दोपहर एक बस की वजह से लगभग एक घंटे जाम लगा रहा। जाम खुलवाने में होमगार्डों के पसीने छूट गए।
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परिवहन निगम के कर्मचारियों में आक्रोश
-डग्गामार बसों की मनमानी के चलते परिवहन निगम के कर्मचारियों में आक्रोश पनपना शुरू हो गया है। आज वो उसी जगह आकर खड़े हो गए हैं, जहां से उन्होंने डग्गामार बसों के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू किया था। कर्मचारियों की माने तो अगर डग्गामार बसें बंद नहीं हुईं तो उन्हें एक बार फिर प्रदर्शन करना पड़ सकता है।
डग्गामार बस संचालकों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। अगर परिवहन निगम के कर्मचारी कुछ कह दें तो शायद विवाद ही होगा। हम विवाद से बचना चाहते हैं, जबकि सामने चौकी है और पुलिस कुछ नहीं कर रही है।
राजेश कुमार, एआरएम
रोडवेज चौराहे पर मैं शनिवार को भी गया था लेकिन तब तक चालक डग्गामार बसें लेकर भाग गए थे। शनिवार को भी मैंने कई वाहनों का चालान किया है। एक-दो दिन में फिर डग्गामार बसों के खिलाफ अभियान चलाएंगे।
सोहेल अहमद, एआरटीओ प्रवर्तन
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ऐसा लगता है कि जैसे डग्गामार बस संचालकों ने रोडवेज चौराहे पर कब्जा कर लिया है। पूरा चौराहा उनके नाम हो गया है, या फिर उनके ताल्लुकात ऐसे जनप्रतिनिधियों से हैं, जो सीधे प्रशासनिक अधिकारियों पर प्रभाव डाल रहे हैं। जिससे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश उनके लिए कोई मायने नहीं रखते। अभी एक दिन पहले स्वयं डीएम दिनेश कुमार सिंह ने रोडवेज बस स्टैंड का निरीक्षण किया था। इसी चौराहे पर चार डग्गामार बसें खड़ी मिलीं थीं, जिनमें एक बस काफी हद तक रोडवेज की अनुबंधित बस के रंग में थी। उसे बदायूं से बरेली रूट पर चलाया जा रहा था। उसका कोई परमिट भी नहीं था। इसके बावजूद खुलेआम सड़कों पर बस दौड़ रही थी। वो तो गनीमत रही थी कि डीएम की उस पर नजर पड़ी गई थी, जिससे उन्होंने चेकिंग करवाकर उस बस को सीज करा दिया था। इस बात को 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि शनिवार को फिर अनुबंधित बसों के रंग की बस आकर रोडवेज चौराहे पर लग गईं। बाकायदा बरेली की आवाज लगाकर सवारियां बैठाई गईं। एक बस में कासगंज के लिए सवारियां बैठाई गईं लेकिन इस दौरान उन्हें न तो किसी अधिकारी का खौफ नजर आया और न ही उन्होंने डीएम के आदेश माने। ऐसे में बस संचालक दबंगों की श्रेणी में आकर खड़े हो गए हैं।
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रोडवेज बसों ने लगाया जाम
- एक तरफ डग्गामार बसें सिरदर्द बनी हुईं हैं तो वही रोडवेज बसों के चालक किसी से कम नहीं है। कई बार पुलिस अधिकारी कह चुके हैं कोई बस सड़क पर खड़ी नहीं होगी। इसके बावजूद रोडवेज बसों को सड़क पर खड़ा किया जा रहा है। इससे न सिर्फ सड़क पर जाम लग रहा है बल्कि लोगों को उधर से गुजरने में मुसीबत पैदा हो रही है। शनिवार दोपहर एक बस की वजह से लगभग एक घंटे जाम लगा रहा। जाम खुलवाने में होमगार्डों के पसीने छूट गए।
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परिवहन निगम के कर्मचारियों में आक्रोश
-डग्गामार बसों की मनमानी के चलते परिवहन निगम के कर्मचारियों में आक्रोश पनपना शुरू हो गया है। आज वो उसी जगह आकर खड़े हो गए हैं, जहां से उन्होंने डग्गामार बसों के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू किया था। कर्मचारियों की माने तो अगर डग्गामार बसें बंद नहीं हुईं तो उन्हें एक बार फिर प्रदर्शन करना पड़ सकता है।
डग्गामार बस संचालकों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। अगर परिवहन निगम के कर्मचारी कुछ कह दें तो शायद विवाद ही होगा। हम विवाद से बचना चाहते हैं, जबकि सामने चौकी है और पुलिस कुछ नहीं कर रही है।
राजेश कुमार, एआरएम
रोडवेज चौराहे पर मैं शनिवार को भी गया था लेकिन तब तक चालक डग्गामार बसें लेकर भाग गए थे। शनिवार को भी मैंने कई वाहनों का चालान किया है। एक-दो दिन में फिर डग्गामार बसों के खिलाफ अभियान चलाएंगे।
सोहेल अहमद, एआरटीओ प्रवर्तन