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स्वच्छता देखने केंद्र से आई टीम
बदायूं, ब्यूरो
Updated Wed, 01 Feb 2017 11:54 PM IST
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स्वच्छता देखने केंद्र से आई टीम
- फोटो : अमर उजाला
स्वच्छ भारत मिशन के तहत संचालित स्वच्छता कार्यक्रमों की शहर में हकीकत जानने के लिए केंद्र सरकार की ओर से भेजी गई टीम बुधवार को यहां पहुंच गई। तीन सदस्यीय टीम यहां दो दिन रुककर शहर में सफाई, कूड़ा निस्तारण और शौचालयों की स्थिति का जायजा लेगी। जो स्थिति मिलेगी, उसके आधार पर शहर को ग्रेडिंग दी जाएगी।
टीम को दिखाने के लिए नगर पालिका के अफसरों ने आनन-फानन में शहर के कुछ स्थलों को चमकाने की कोशिश की। बुधवार को दोपहर प्रमुख स्थानों पर साफ-सफाई कार्य कराया गया। बावजूद इसके शहर के कई स्थानों पर कूड़े के ढेर नजर आए और जलभराव की स्थिति भी बनी रही। शहर में लीकेज पाइपलाइन की वजह से जहां लोगों को पेयजल की किल्लत है। साथ ही शहर के तमाम परिवार खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। इन सभी बिंदुओं पर क्यूसीआई टीम ने फोकस किया तो बदायूं की ग्रेडिंग खराब हो सकती है। तीन सदस्यीय संदीप हांडा के नेतृत्व में बुधवार को दोपहर आ गई। टीम शहर के प्रमुख स्थलों पर जाकर लोगों से भी सफाई व्यवस्था पर जानकारी जुटाएगी।
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हाल मत पूछो, अच्छा नहीं है
बदायूं। शहर में कूड़े की स्थिति पर गौर किया गया, तो हर गली और नुक्कड़ पर कूड़े के ढेर नजर आ जाएंगे। शहर की गलियों से कूड़ा उठाया तो जाता है, लेकिन उसे शेखूपुर, दातागंज, बिसौली एवं अन्य सड़कों के किनारे डाल दिया जाता है, जिसकी शिकायत पहले भी जा चुकी है। कूड़े के इन ढेरों से लोगों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, नगर पालिका कर्मचारी यह कहकर अपना बचाव करते हैं कि वे लोग ककराला रोड पर रसूलपुर गांव के पास स्थित 7500 वर्ग मीटर के डंपिंग ग्राउंड में डालते हैं। हालांकि, जांच टीम के आने की खबर के बाद से सड़क किनारे लगे कूड़े के ढेरों को मिट्टी के नीचे दबाने के प्रयास भी किए गए। शहर में नगर पालिका की ओर से लगाए गए प्लास्टिक के कूड़ेदान चंद महीनों में ही खत्म गए थे। इसके बाद लोहे कूड़ेदान करीब 125 स्थानों पर लगे हैं, लेकिन अधिकांश शहरी उनमें कूड़ा न डालकर खुले में डालते हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत खरीदे गए करीब 200 कूड़ेदान शहर में रखवा दिए गए हैं। पालिका की ओर से खरीदे गए मोबाइल टॉयलेट से भी शहर के लोगों को खास लाभ नहीं मिल पाता है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए जा रहे शौचालयों के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जा रहे हैं। करीब 1600 लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें करीब 300 लाभार्थियों के शौचालय बनाने के लिए प्रथम किश्त की धनराशि भेजी जा चुकी है, जबकि सैकड़ों परिवार शौचालयविहीन है। शहर के लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए नगर पालिका की ओर से वॉल पेंटिंग और होर्डिंग्स के जरिए जागरूक करने के कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई। इसके बावजूद शहर के किनारों पर बसे तमाम लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। जिले में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से 55 टन पर डे (टीपीडी) कूड़ा निस्तारित करने वाली सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की स्थिति जिले में अधूरा पड़ा है। इससे शहर का कूड़ा नाले-नालियों और शहर से बाहर जाने वाली सड़कों के किनारे डाला जा रहा है। वर्ष 2011 में शुरू हुआ निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इससे शहर के कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत चलने वाली अटल मिशन फॉर रेजोवेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) योजना के तहत जिले में वाटर सप्लाई, सीवरेज और पार्क डेवलपमेंट का कार्य किया जाना था। इसके लिए 12.65 करोड़ रुपये से निर्माण कार्य कराया जाना था, जिसमें वाटर सप्लाई के लिए पहली किश्त के रूप में 205 लाख रुपये नगर पालिका को मिल चुके हैं, लेकिन अभी तक नगर पालिका ने जल निगम को यह धनराशि ट्रांसफर नहीं की है। शहर में बिछने वाली 12 किलोमीटर अंडरग्राउंड पाइप लाइन, 3600 हाउस कनेक्शन और 28850 वाटर मीटर लगाने के कार्य की शुरुआत तक नहीं हो सकी है। पार्क सुंदरीकरण का कार्य भी नगर पालिका परिषद की ओर से शुरू नहीं किया गया है।
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टीम को दिखाने के लिए नगर पालिका के अफसरों ने आनन-फानन में शहर के कुछ स्थलों को चमकाने की कोशिश की। बुधवार को दोपहर प्रमुख स्थानों पर साफ-सफाई कार्य कराया गया। बावजूद इसके शहर के कई स्थानों पर कूड़े के ढेर नजर आए और जलभराव की स्थिति भी बनी रही। शहर में लीकेज पाइपलाइन की वजह से जहां लोगों को पेयजल की किल्लत है। साथ ही शहर के तमाम परिवार खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। इन सभी बिंदुओं पर क्यूसीआई टीम ने फोकस किया तो बदायूं की ग्रेडिंग खराब हो सकती है। तीन सदस्यीय संदीप हांडा के नेतृत्व में बुधवार को दोपहर आ गई। टीम शहर के प्रमुख स्थलों पर जाकर लोगों से भी सफाई व्यवस्था पर जानकारी जुटाएगी।
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हाल मत पूछो, अच्छा नहीं है
बदायूं। शहर में कूड़े की स्थिति पर गौर किया गया, तो हर गली और नुक्कड़ पर कूड़े के ढेर नजर आ जाएंगे। शहर की गलियों से कूड़ा उठाया तो जाता है, लेकिन उसे शेखूपुर, दातागंज, बिसौली एवं अन्य सड़कों के किनारे डाल दिया जाता है, जिसकी शिकायत पहले भी जा चुकी है। कूड़े के इन ढेरों से लोगों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, नगर पालिका कर्मचारी यह कहकर अपना बचाव करते हैं कि वे लोग ककराला रोड पर रसूलपुर गांव के पास स्थित 7500 वर्ग मीटर के डंपिंग ग्राउंड में डालते हैं। हालांकि, जांच टीम के आने की खबर के बाद से सड़क किनारे लगे कूड़े के ढेरों को मिट्टी के नीचे दबाने के प्रयास भी किए गए। शहर में नगर पालिका की ओर से लगाए गए प्लास्टिक के कूड़ेदान चंद महीनों में ही खत्म गए थे। इसके बाद लोहे कूड़ेदान करीब 125 स्थानों पर लगे हैं, लेकिन अधिकांश शहरी उनमें कूड़ा न डालकर खुले में डालते हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत खरीदे गए करीब 200 कूड़ेदान शहर में रखवा दिए गए हैं। पालिका की ओर से खरीदे गए मोबाइल टॉयलेट से भी शहर के लोगों को खास लाभ नहीं मिल पाता है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए जा रहे शौचालयों के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जा रहे हैं। करीब 1600 लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें करीब 300 लाभार्थियों के शौचालय बनाने के लिए प्रथम किश्त की धनराशि भेजी जा चुकी है, जबकि सैकड़ों परिवार शौचालयविहीन है। शहर के लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए नगर पालिका की ओर से वॉल पेंटिंग और होर्डिंग्स के जरिए जागरूक करने के कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई। इसके बावजूद शहर के किनारों पर बसे तमाम लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। जिले में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से 55 टन पर डे (टीपीडी) कूड़ा निस्तारित करने वाली सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की स्थिति जिले में अधूरा पड़ा है। इससे शहर का कूड़ा नाले-नालियों और शहर से बाहर जाने वाली सड़कों के किनारे डाला जा रहा है। वर्ष 2011 में शुरू हुआ निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इससे शहर के कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत चलने वाली अटल मिशन फॉर रेजोवेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) योजना के तहत जिले में वाटर सप्लाई, सीवरेज और पार्क डेवलपमेंट का कार्य किया जाना था। इसके लिए 12.65 करोड़ रुपये से निर्माण कार्य कराया जाना था, जिसमें वाटर सप्लाई के लिए पहली किश्त के रूप में 205 लाख रुपये नगर पालिका को मिल चुके हैं, लेकिन अभी तक नगर पालिका ने जल निगम को यह धनराशि ट्रांसफर नहीं की है। शहर में बिछने वाली 12 किलोमीटर अंडरग्राउंड पाइप लाइन, 3600 हाउस कनेक्शन और 28850 वाटर मीटर लगाने के कार्य की शुरुआत तक नहीं हो सकी है। पार्क सुंदरीकरण का कार्य भी नगर पालिका परिषद की ओर से शुरू नहीं किया गया है।
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