बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर पर चल रही वेद कथा के छठे दिन आचार्य संजीव रूप ने कहा कि चांद की पूजा करने से नहीं चांद जैसे शीतल और कोमल व्यवहार से पति की आयु बढ़ती है। स्त्री को चांद के गुणों को अपने जीवन व्यवहार में ढालना चाहिए। जो स्त्रियां अपने पति से कठोर शब्दों में बोलती हैं, अपमान करती हैं, उन्हें ताने देती हैं। वह अपने पति की आयु कम ही करती हैं। वैसे ही पति को सूर्य के गुणों को धारण करना चाहिए। तभी गृहस्थ निर्दोष होता है।
स्त्री उस पुरुष को पसंद करती है जो सूर्य की तरह तेजस्वी हो अर्थात मर्यादित जीवन वाला चरित्रवान हो। उन्होंने कहा बेटियां चुनरी बेशक न रखें किंतु सदा अपने साथ कटार या शस्त्र अवश्य रखें। इस मौके पर तृप्ति शास्त्री, कौशिकी आर्य, ईशा आर्य, ईशू आर्य ने सुंदर भजन सुनाकर सबको मंत्र मुग्ध किया। इस मौके पर विश्वजीत आर्य, धर्मेंद्र आर्य, लेखराज पाल आदि मौजूद रहे।