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बैंकों में ग्राहकों की कम नहीं हो रही भीड़
ब्यूरो/बदायूं
Updated Fri, 02 Dec 2016 11:15 PM IST
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बैंकों में ग्राहकों की कम नहीं हो रही भीड़
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नोटबंदी के 23 दिन बाद भी शहर समेत जिले भर के बैंकों में ग्राहकों की भीड़ कम नहीं हो रही है। कई बैंक शाखाओं में कैश नहीं होने का बोर्ड लगा दिया गया है, इस वजह से ग्राहकों को निराशा ही रही है। जिन बैंकों में भुगतान हो भी रहा है तो वहां ग्राहकों को दो हजार के नोट ही मिल रहे हैं। लिहाजा, लोगों की समस्याएं दूर नहीं हो रही हैं। शहर में शुक्रवार को अधिकांश एटीएम पर भी रकम निकालने के लिए लोगों की देर शाम तक लाइनें लगीं रहीं।
पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट बंद हो जाने के बाद से समाज का हर तबका परेशान हो गया है। वजह है कि उसकी जरूरत के मुताबिक बैंकों से रकम नहीं मिल पा रही है। स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक के अलावा अन्य बैंक शाखाओं पर रुपये निकालने के लिए लोगों की सुबह से ही लाइनें लग जातीं हैं। यह सिलसिला नोटबंदी के दिन से ही बना हुआ है। बैंकों में अब रुपये जमा करने वालों की कम निकालने वालों की ज्यादा भीड़ देखी जा रही है, लेकिन हर रोज ग्राहक घंटों की मशक्कत के बाद दो हजार रुपये तक ही घर लेकर पा रहे हैं। शहर में देखा जा रहा है कि निजी क्षेत्र की बैंकों में कई दिनों से कैश नहीं होने का बोर्ड लगा है। यदि इन बैंकों में कैश आ भी जाता है तो कुछ ही दूर में खत्म हो जाता है। लोग कहने लगे हैं कि व्यवस्था में फिलहाल सुधार के आसार भी नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि उन्हें 23 दिन से घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक से रुपये नहीं मिल पा रहे हैं।
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पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट बंद हो जाने के बाद से समाज का हर तबका परेशान हो गया है। वजह है कि उसकी जरूरत के मुताबिक बैंकों से रकम नहीं मिल पा रही है। स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक के अलावा अन्य बैंक शाखाओं पर रुपये निकालने के लिए लोगों की सुबह से ही लाइनें लग जातीं हैं। यह सिलसिला नोटबंदी के दिन से ही बना हुआ है। बैंकों में अब रुपये जमा करने वालों की कम निकालने वालों की ज्यादा भीड़ देखी जा रही है, लेकिन हर रोज ग्राहक घंटों की मशक्कत के बाद दो हजार रुपये तक ही घर लेकर पा रहे हैं। शहर में देखा जा रहा है कि निजी क्षेत्र की बैंकों में कई दिनों से कैश नहीं होने का बोर्ड लगा है। यदि इन बैंकों में कैश आ भी जाता है तो कुछ ही दूर में खत्म हो जाता है। लोग कहने लगे हैं कि व्यवस्था में फिलहाल सुधार के आसार भी नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि उन्हें 23 दिन से घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक से रुपये नहीं मिल पा रहे हैं।
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