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सीबीआई को स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड पर आपत्ति
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sat, 28 May 2016 12:38 AM IST
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एनआरएचएम के तहत चल रही योजनाओं में वर्ष 2005 से 2011 के बीच हुए करोड़ों रुपये के घोटाले के मामले में सीबीआई को बदायूं के रिकार्ड पर आपत्ति है। दवा खरीद संबंधी रिकार्ड पर आपत्ति लगाकर सीबीआई ने इसे वापस कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रुपये की दवा खरीद से जुड़े तमाम रिकार्ड अधूरे हैं। मामले में स्वास्थ्य विभाग के आठ बाबुओं से पूछताछ भी हो चुकी है। फिलहाल माना जा रहा है कि घोटाले में पड़ताल लंबी खिंच सकती है।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में 2011 में बड़ा घोटाला सामने आया था। घोटाले का जिन्न बाहर आने के बाद लखनऊ में दो सीएमओ की हत्या भी की गई। मामले में जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। बाद में पता लगा कि घोटाला बदायूं में भी हुआ है। नवंबर, 2015 में सीबीआई के देहरादून मुख्यालय ने वर्ष 2005 से 2011 के बीच का एनआरएचएम से जुड़ा रिकार्ड तलब किया था। गौर करने वाली बात यह है कि वर्ष 2005 से 2008 तक का रिकार्ड ही नहीं मिला। जो रिकार्ड सीबीआई को भेजा गया वह भी आधा-अधूरा था। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी ने इस रिकार्ड को भी आपत्ति लगाकर वापस कर दिया है। सीएमओ को नोटिस देकर रिकार्ड नये सिरे से देने को कहा है।
घोटाला में आठ बाबू सीबीआई के निशाने पर
बदायूं। एनआरएचएम में करोड़ों रुपये के घोटाला में स्वास्थ्य विभाग के आठ बाबू देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के निशाने पर हैं। जनवरी में पांच बाबुओं से सीबीआई देहरादून मुख्यालय में अलग-अलग पूछताछ कर चुकी है। सूत्रों की मानें तो इन बाबुओं से फिर पूछताछ हो सकती है। घोटाले के दौरान आरएस यादव, शिशुपाल सिंह, वेद गंगवार, राजेश राय, रफत हुसैन, अनुराग सपरा और सुरेश चंद्र एनआरएचएम से जुड़े पलट देख रहे थे।
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सेवानिवृत्त नौ सीएमओ को भी नोटिस
बदायूं। सीबीआई ने वर्ष 2005 से 2011 तक बदायूं में तैनात रहे सभी सीएमओ को नोटिस दिया है। इनमें नौ सीएमओ सेवानिवृत्त हो गए हैं। जांच एजेंसी इनसे भी पूछताछ करेगी। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग से उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में पूरी जानकारी मांगी गई है जो एनआरएचएम की योजनाओं से जुड़े रहे थे।
वर्जन-
कुछ रिकार्ड सीबीआई ने नए सिरे से देने को कहा है। यह रिकार्ड तैयार कराए जा रहे हैं। संबंधित पटलों के बाबुओं को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। मामले में सीबीआई पड़ताल कर रही है। मैं कुछ ज्यादा नहीं कह सकता।
-सुनील कुमार, सीएमओ
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राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में 2011 में बड़ा घोटाला सामने आया था। घोटाले का जिन्न बाहर आने के बाद लखनऊ में दो सीएमओ की हत्या भी की गई। मामले में जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। बाद में पता लगा कि घोटाला बदायूं में भी हुआ है। नवंबर, 2015 में सीबीआई के देहरादून मुख्यालय ने वर्ष 2005 से 2011 के बीच का एनआरएचएम से जुड़ा रिकार्ड तलब किया था। गौर करने वाली बात यह है कि वर्ष 2005 से 2008 तक का रिकार्ड ही नहीं मिला। जो रिकार्ड सीबीआई को भेजा गया वह भी आधा-अधूरा था। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी ने इस रिकार्ड को भी आपत्ति लगाकर वापस कर दिया है। सीएमओ को नोटिस देकर रिकार्ड नये सिरे से देने को कहा है।
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घोटाला में आठ बाबू सीबीआई के निशाने पर
बदायूं। एनआरएचएम में करोड़ों रुपये के घोटाला में स्वास्थ्य विभाग के आठ बाबू देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के निशाने पर हैं। जनवरी में पांच बाबुओं से सीबीआई देहरादून मुख्यालय में अलग-अलग पूछताछ कर चुकी है। सूत्रों की मानें तो इन बाबुओं से फिर पूछताछ हो सकती है। घोटाले के दौरान आरएस यादव, शिशुपाल सिंह, वेद गंगवार, राजेश राय, रफत हुसैन, अनुराग सपरा और सुरेश चंद्र एनआरएचएम से जुड़े पलट देख रहे थे।
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सेवानिवृत्त नौ सीएमओ को भी नोटिस
बदायूं। सीबीआई ने वर्ष 2005 से 2011 तक बदायूं में तैनात रहे सभी सीएमओ को नोटिस दिया है। इनमें नौ सीएमओ सेवानिवृत्त हो गए हैं। जांच एजेंसी इनसे भी पूछताछ करेगी। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग से उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में पूरी जानकारी मांगी गई है जो एनआरएचएम की योजनाओं से जुड़े रहे थे।
वर्जन-
कुछ रिकार्ड सीबीआई ने नए सिरे से देने को कहा है। यह रिकार्ड तैयार कराए जा रहे हैं। संबंधित पटलों के बाबुओं को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। मामले में सीबीआई पड़ताल कर रही है। मैं कुछ ज्यादा नहीं कह सकता।
-सुनील कुमार, सीएमओ