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सीएमओ ऑफिस पहुंची साइबर क्राइम सेल टीम ने की पड़ताल
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बदायूं का सीएमओ कार्यालय। संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत फर्जीवाड़ा कर आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जाने के मामले में साइबर क्राइम सेल ने जांच शुरू कर दी है। बुधवार को साइबर क्राइम सेल की टीम ने बदायूं सीएमओ ऑफिस पहुंचकर पड़ताल की। जिला समन्वयक पीएम जन आरोग्य योजना नितिन वर्मा से भी काफी देर पूछताछ की गई।
पिछले महीने मध्यप्रदेश के भोपाल में एक ही मोबाइल नंबर पर 150 से ज्यादा आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जाने का मामला सामने आया था। प्रारंभिक पड़ताल में पता लगा कि आयुुष्मान कार्ड जारी करने के लिए जिला महिला अस्पताल की सीएमएस की ईमेल आईडी और आगरा का मोबाइल नंबर इस्तेमाल किया गया। बाद में पता लगा कि प्रमोद कुमार संत नाम के व्यक्ति ने यह कार्ड जारी किए थे।
दरअसल, प्रमोद कुमार संत बदायूं जिला महिला अस्पताल में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर तैनात था। उसने 2020 में इस्तीफा दे दिया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने उसकी आईडी को ब्लॉक नहीं किया था। इसका फायदा उठाते हुए प्रमोद ने फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने का रैकेट शुरू कर दिया। उसने बड़ी संख्या में आयुष्मान कार्ड जारी करने के साथ अपात्र कार्ड धारकों को एक साल में पांच लाख तक के मुफ्त इलाज का लाभ भी दिलाया। यह घोटाला करोड़ों में किया गया।
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फर्जी आयुष्मान कार्डों के जरिया अपात्रों के मुफ्त इलाज का मामला सामने आने के बाद एनएचए और एसएचए ने जांच का आदेश दिया था। फर्जी आयुष्मान कार्ड जारी किए जाने के इस मामले में साइबर क्राइम सेल ने जांच शुरू कर दी है। मध्यप्रदेश से शुरू हुई जांच की आंच अब बदायूं तक पहुंच गई है। बुधवार को साइबर क्राइम सेल की एक टीम सीएमओ ऑफिस पहुंची। यहां टीम के सदस्यों ने आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक नितिन वर्मा से पूरे मामले में पूछताछ की। प्रमोद कुमार संत के बारे में भी पड़ताल की गई। साइबर क्राइम सेल की टीम बदायूं से मिले जांच इनपुट भोपाल को देगी।
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बदायूं में 23 हजार आयुष्मान कार्ड संदेह के घेरे में
प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत देश में पहली बार घपला सामने आया है। गौर करने की बात यह है कि भोपाल से यह घपला खुलने के साथ ही इससे बदायूं का नाम जुड़ गया। जांच के दौरान कई तथ्य सामने आ रहे हैं। बदायूं जिले में करीब 23 हजार आयुष्मान कार्ड भी संदेह के घेरे में आ गए हैं। बदायूं में बड़ी संख्या में फर्जी आईडी के जरिये कार्ड जारी किए जाने और अपात्रों को अस्पतालों में इलाज दिलाने संबंधी तथ्य सामने आ रहे हैं। इसके बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से बदायूं सीएमओ से इस संबंध में रिपोर्ट तलब की गई है। जिला समन्वयक से भी फर्जी कार्डों के बारे में सूचनाएं मांगने के साथ 2018 से अब तक का रिकॉर्ड मांगा गया है।
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साइबर क्राइम सेल की टीम बुधवार को सीएमओ कार्यालय पहुंची थी। आयुष्मान कार्ड जारी करने संबंधी फर्जीवाड़ा में पड़ताल की गई। भोपाल में फर्जी कार्ड जारी किए जाने संबंधी मामले में जानकारियां ली गईं। साइबर क्राइम सेल ने पड़ताल के दौरान जो भी सूचनाएं मांगी वह टीम को उपलब्ध करा दी गई हैं।
- नितिन वर्मा, जिला समन्वयक आयुष्मान भारत योजना
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के स्तर से पूरे प्रकरण में जांच चल रही है। मध्यप्रदेश में बदायूं की आईडी से कार्ड जारी किए जाने संबंधी मामले में साइबर क्राइम सेल जांच कर रही है। साइबर क्राइम सेल का पूरा सहयोग किया जा रहा है। इस संबंध में जिला समन्वयक आयुष्मान भारत से कुछ पूछताछ की गई है।
- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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पिछले महीने मध्यप्रदेश के भोपाल में एक ही मोबाइल नंबर पर 150 से ज्यादा आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जाने का मामला सामने आया था। प्रारंभिक पड़ताल में पता लगा कि आयुुष्मान कार्ड जारी करने के लिए जिला महिला अस्पताल की सीएमएस की ईमेल आईडी और आगरा का मोबाइल नंबर इस्तेमाल किया गया। बाद में पता लगा कि प्रमोद कुमार संत नाम के व्यक्ति ने यह कार्ड जारी किए थे।
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दरअसल, प्रमोद कुमार संत बदायूं जिला महिला अस्पताल में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर तैनात था। उसने 2020 में इस्तीफा दे दिया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने उसकी आईडी को ब्लॉक नहीं किया था। इसका फायदा उठाते हुए प्रमोद ने फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने का रैकेट शुरू कर दिया। उसने बड़ी संख्या में आयुष्मान कार्ड जारी करने के साथ अपात्र कार्ड धारकों को एक साल में पांच लाख तक के मुफ्त इलाज का लाभ भी दिलाया। यह घोटाला करोड़ों में किया गया।
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फर्जी आयुष्मान कार्डों के जरिया अपात्रों के मुफ्त इलाज का मामला सामने आने के बाद एनएचए और एसएचए ने जांच का आदेश दिया था। फर्जी आयुष्मान कार्ड जारी किए जाने के इस मामले में साइबर क्राइम सेल ने जांच शुरू कर दी है। मध्यप्रदेश से शुरू हुई जांच की आंच अब बदायूं तक पहुंच गई है। बुधवार को साइबर क्राइम सेल की एक टीम सीएमओ ऑफिस पहुंची। यहां टीम के सदस्यों ने आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक नितिन वर्मा से पूरे मामले में पूछताछ की। प्रमोद कुमार संत के बारे में भी पड़ताल की गई। साइबर क्राइम सेल की टीम बदायूं से मिले जांच इनपुट भोपाल को देगी।
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बदायूं में 23 हजार आयुष्मान कार्ड संदेह के घेरे में
प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत देश में पहली बार घपला सामने आया है। गौर करने की बात यह है कि भोपाल से यह घपला खुलने के साथ ही इससे बदायूं का नाम जुड़ गया। जांच के दौरान कई तथ्य सामने आ रहे हैं। बदायूं जिले में करीब 23 हजार आयुष्मान कार्ड भी संदेह के घेरे में आ गए हैं। बदायूं में बड़ी संख्या में फर्जी आईडी के जरिये कार्ड जारी किए जाने और अपात्रों को अस्पतालों में इलाज दिलाने संबंधी तथ्य सामने आ रहे हैं। इसके बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से बदायूं सीएमओ से इस संबंध में रिपोर्ट तलब की गई है। जिला समन्वयक से भी फर्जी कार्डों के बारे में सूचनाएं मांगने के साथ 2018 से अब तक का रिकॉर्ड मांगा गया है।
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साइबर क्राइम सेल की टीम बुधवार को सीएमओ कार्यालय पहुंची थी। आयुष्मान कार्ड जारी करने संबंधी फर्जीवाड़ा में पड़ताल की गई। भोपाल में फर्जी कार्ड जारी किए जाने संबंधी मामले में जानकारियां ली गईं। साइबर क्राइम सेल ने पड़ताल के दौरान जो भी सूचनाएं मांगी वह टीम को उपलब्ध करा दी गई हैं।
- नितिन वर्मा, जिला समन्वयक आयुष्मान भारत योजना
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के स्तर से पूरे प्रकरण में जांच चल रही है। मध्यप्रदेश में बदायूं की आईडी से कार्ड जारी किए जाने संबंधी मामले में साइबर क्राइम सेल जांच कर रही है। साइबर क्राइम सेल का पूरा सहयोग किया जा रहा है। इस संबंध में जिला समन्वयक आयुष्मान भारत से कुछ पूछताछ की गई है।
- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ