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फरीदापुर, सराय पिपरिया में भी संक्रामक बीमारियों का प्रकोप
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जगत ब्लॉक के गांव बेला में गंदगी और जल भराव। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। गांवों में गंदगी और जलभराव के कारण वायरल बुखार के साथ संक्रामक रोग फैलने लगे हैं। हालांकि, संक्रामक रोगों पर नियंत्रण की जिम्मेदारी स्वास्थ्य, पंचायती राज समेत 15 विभागों की है, लेकिन मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य विभाग काम करते नजर नहीं आ रहे।
हाल ही के दिनों में जगत ब्लॉक के गांव रायपुर में टाइफाइड से महिला की मौत हो चुकी है। म्याऊ के गांव बिलहरी में काफी संख्या में ग्रामीण वायरल फीवर की चपेट में हैं। अब जगत के गांव फरीदापुर और दातागंज ब्लॉक के गांव सराय पिपरिया में भी संक्रामक बीमारियों ने दस्तक दे दी है। फरीदपुर गांव में अमित कुमार (22), राज कुमार (18), श्रीपाल (38), सचिन (18), सीताराम (40), मोहित (12) समेत कई लोग वायरल फीवर की चपेट में हैं। जगत के गांव हथनीभूड़, उपरैला, उतरना में भी बीमारियों का प्रकोप है। गौर करने की बात यह है कि इन गांवों में व्यापक गंदगी है। पानी निकासी न होने के कारण कीचड़ जमा हो गई है और इसमें सड़ांध आ रही है।
पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी गांवों में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखता है, लेकिन संक्रामक रोगों के सीजन में भी बड़ी संख्या में गांवों में सफाई कर्मचारी नहीं पहुंच रहे। मलेरिया विभाग की ओर से गांवों में मच्छर और लार्वा नाशक दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है, लेकिन गांवों में लगातार गंदगी के कारण यह नाकाफी है। स्वास्थ्य विभाग भी हेल्थ कैंप लगा रहा है, लेकिन गंदगी के कारण बीमारियां पैर पसार रही हैं।
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बड़ी संख्या में अटैच सफाई कर्मी, गांवों में जाते ही नहीं
गांवों में साफ सफाई के साथ हैंडपंप लगाने, रिबोर कराने की जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग की है। जिले में 1037 ग्राम पंचायतें हैं। बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों के मजरे भी हैं। गांवों में लगे ज्यादातर हैंडपंप पीला पानी दे रहे हैं। पानी की जांच नहीं कराई जा रही। सफाई कर्मचारी गांवों में सफाई करने नहीं जाते। दरअसल, बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारियों ने अपने आप को कार्यालय या फिर अधिकारियों के यहां अटैच करा रखा है। काफी ने प्रधान और सचिव से सांठगांठ कर रखी है। इसका खामियाजा ग्रामीण गंदगी के कारण बीमारियों के रूप में भुगत रहे हैं।
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संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण की जिम्मेदारी स्वास्थ्य, पंचायती राज समेत 12 विभागों को दी गई है। जहां से भी बीमारी फैलने की सूचना मिलती है वहां तत्काल टीमों को भेजा जाता है। लगातार गांवों में हेल्थ कैंपों का आयोजन कराया जा रहा है। काफी गांव ऐसे हैं जहां गंदगी, कीचड़, जल भराव और हैंडपंपों में पीला पानी आने के कारण भी बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। इसके संबंध में लिखा गया है।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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हाल ही के दिनों में जगत ब्लॉक के गांव रायपुर में टाइफाइड से महिला की मौत हो चुकी है। म्याऊ के गांव बिलहरी में काफी संख्या में ग्रामीण वायरल फीवर की चपेट में हैं। अब जगत के गांव फरीदापुर और दातागंज ब्लॉक के गांव सराय पिपरिया में भी संक्रामक बीमारियों ने दस्तक दे दी है। फरीदपुर गांव में अमित कुमार (22), राज कुमार (18), श्रीपाल (38), सचिन (18), सीताराम (40), मोहित (12) समेत कई लोग वायरल फीवर की चपेट में हैं। जगत के गांव हथनीभूड़, उपरैला, उतरना में भी बीमारियों का प्रकोप है। गौर करने की बात यह है कि इन गांवों में व्यापक गंदगी है। पानी निकासी न होने के कारण कीचड़ जमा हो गई है और इसमें सड़ांध आ रही है।
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पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी गांवों में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखता है, लेकिन संक्रामक रोगों के सीजन में भी बड़ी संख्या में गांवों में सफाई कर्मचारी नहीं पहुंच रहे। मलेरिया विभाग की ओर से गांवों में मच्छर और लार्वा नाशक दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है, लेकिन गांवों में लगातार गंदगी के कारण यह नाकाफी है। स्वास्थ्य विभाग भी हेल्थ कैंप लगा रहा है, लेकिन गंदगी के कारण बीमारियां पैर पसार रही हैं।
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बड़ी संख्या में अटैच सफाई कर्मी, गांवों में जाते ही नहीं
गांवों में साफ सफाई के साथ हैंडपंप लगाने, रिबोर कराने की जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग की है। जिले में 1037 ग्राम पंचायतें हैं। बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों के मजरे भी हैं। गांवों में लगे ज्यादातर हैंडपंप पीला पानी दे रहे हैं। पानी की जांच नहीं कराई जा रही। सफाई कर्मचारी गांवों में सफाई करने नहीं जाते। दरअसल, बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारियों ने अपने आप को कार्यालय या फिर अधिकारियों के यहां अटैच करा रखा है। काफी ने प्रधान और सचिव से सांठगांठ कर रखी है। इसका खामियाजा ग्रामीण गंदगी के कारण बीमारियों के रूप में भुगत रहे हैं।
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संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण की जिम्मेदारी स्वास्थ्य, पंचायती राज समेत 12 विभागों को दी गई है। जहां से भी बीमारी फैलने की सूचना मिलती है वहां तत्काल टीमों को भेजा जाता है। लगातार गांवों में हेल्थ कैंपों का आयोजन कराया जा रहा है। काफी गांव ऐसे हैं जहां गंदगी, कीचड़, जल भराव और हैंडपंपों में पीला पानी आने के कारण भी बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। इसके संबंध में लिखा गया है।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ