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तीन घंटे बिना डॉक्टर चलीं जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवाएं
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इमरजेंसी में वार्ड ब्वाय की बेटी को देखते सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवाएं मंगलवार को करीब तीन घंटे तक बिना डॉक्टर चलीं। पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों को देखता रहा, लेकिन जब यहां जिला अस्पताल के वार्ड ब्वॉय की बेटी की तबीयत बिगड़ी तब हंगामा हो गया।
वार्ड ब्वॉय बेचे सिंह परिवार वालों के साथ सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम के पास पहुंचा और शिकायत की। तब सीएमएस खुद इमरजेंसी पहुंचे और वार्ड ब्वॉय की बेटी का इलाज किया।
मंगलवार को इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉ. पीयूष मोहन थे। वह करीब 11 बजे कलक्ट्रेट में किसी प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लेने चले गए। इसके बाद इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं बचा। यहां तैनात पैरामेडिकल स्टाफ ही आने वाले गंभीर मरीजों का इलाज करता रहा। इस दौरान जिला अस्पताल में ही तैनात वार्ड ब्वॉय बेचे सिंह हालत बिगड़ने पर अपनी 17 साल की बेटी नेहा राठौर को लेकर इमरजेंसी पहुंचा। उसकी बेटी की हालत गंभीर होती जा रही थी, लेकिन कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। इस पर बेचे सिंह अपने परिवार के साथ सीएमएस के पास पहुंचा।
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सीएमएस को बताया कि वह अस्पताल का वार्ड ब्वॉय है। उसकी बेटी इमरजेंसी में है और वहां कोई डॉक्टर है ही नहीं। इस पर सीएमएस ने पता किया तो मालूम चला कि डॉ. पीयूष करीब 11 बजे प्रशासनिक बैठक में चले गए हैं उसके बाद कोई दूसरा डॉक्टर इमरजेंसी पहुंचा ही नहीं। यह पता लगने पर सीएमएस ने इमरजेंसी पहुंच कर वार्ड ब्वॉय की बेटी का इलाज किया। बाद में करीब दो बजे डॉ. जीके गुप्ता इमरजेंसी ड्यूटी पर पहुंचे। तब यहां सेवाएं सुचारु हो सकीं।
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इमरजेंसी में नहीं मिला था सिटी मजिस्ट्रेट की बेटी को इलाज
तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार भी जिला अस्पताल की इमरजेंसी के डॉक्टरों की मनमानी का शिकार हो चुके हैं। उनकी चार वर्ष की बेटी इलाज के लिए इमरजेंसी में करीब एक घंटे तड़पती रही थी लेकिन उसको इलाज नहीं मिला। इस पर वह बेटी को निजी डॉक्टर के यहां ले गए थे। यह वाकया 19 मई की तड़के का है। इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉ. नितिन यादव थे। सिटी मजिस्ट्रेट की बेटी को नेबुलाइजर की जरूरत थी, लेकिन उसको यह सुविधा नहीं मिल सकी। सिटी मजिस्ट्रेट ने इस संबंध में लिखा भी, लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
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इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को जरूरी बैठक में जाना था। वार्ड ब्वॉय की बेटी इमरजेंसी में भर्ती थी। वार्ड ब्वॉय ने इमरजेंसी में डॉक्टर न होने की बात बताई थी। इमरजेंसी तीन घंटे बिना डॉक्टर के रही, ऐसा नहीं है। मुझे जब डॉक्टर के बैठक में जाने के संबंध में पता लगा तो मैं खुद इमरजेंसी पहुंच गया था। बाद में दूसरे डॉक्टर भी आ गए।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस
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वार्ड ब्वॉय बेचे सिंह परिवार वालों के साथ सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम के पास पहुंचा और शिकायत की। तब सीएमएस खुद इमरजेंसी पहुंचे और वार्ड ब्वॉय की बेटी का इलाज किया।
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मंगलवार को इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉ. पीयूष मोहन थे। वह करीब 11 बजे कलक्ट्रेट में किसी प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लेने चले गए। इसके बाद इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं बचा। यहां तैनात पैरामेडिकल स्टाफ ही आने वाले गंभीर मरीजों का इलाज करता रहा। इस दौरान जिला अस्पताल में ही तैनात वार्ड ब्वॉय बेचे सिंह हालत बिगड़ने पर अपनी 17 साल की बेटी नेहा राठौर को लेकर इमरजेंसी पहुंचा। उसकी बेटी की हालत गंभीर होती जा रही थी, लेकिन कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। इस पर बेचे सिंह अपने परिवार के साथ सीएमएस के पास पहुंचा।
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सीएमएस को बताया कि वह अस्पताल का वार्ड ब्वॉय है। उसकी बेटी इमरजेंसी में है और वहां कोई डॉक्टर है ही नहीं। इस पर सीएमएस ने पता किया तो मालूम चला कि डॉ. पीयूष करीब 11 बजे प्रशासनिक बैठक में चले गए हैं उसके बाद कोई दूसरा डॉक्टर इमरजेंसी पहुंचा ही नहीं। यह पता लगने पर सीएमएस ने इमरजेंसी पहुंच कर वार्ड ब्वॉय की बेटी का इलाज किया। बाद में करीब दो बजे डॉ. जीके गुप्ता इमरजेंसी ड्यूटी पर पहुंचे। तब यहां सेवाएं सुचारु हो सकीं।
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इमरजेंसी में नहीं मिला था सिटी मजिस्ट्रेट की बेटी को इलाज
तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार भी जिला अस्पताल की इमरजेंसी के डॉक्टरों की मनमानी का शिकार हो चुके हैं। उनकी चार वर्ष की बेटी इलाज के लिए इमरजेंसी में करीब एक घंटे तड़पती रही थी लेकिन उसको इलाज नहीं मिला। इस पर वह बेटी को निजी डॉक्टर के यहां ले गए थे। यह वाकया 19 मई की तड़के का है। इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉ. नितिन यादव थे। सिटी मजिस्ट्रेट की बेटी को नेबुलाइजर की जरूरत थी, लेकिन उसको यह सुविधा नहीं मिल सकी। सिटी मजिस्ट्रेट ने इस संबंध में लिखा भी, लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
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इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को जरूरी बैठक में जाना था। वार्ड ब्वॉय की बेटी इमरजेंसी में भर्ती थी। वार्ड ब्वॉय ने इमरजेंसी में डॉक्टर न होने की बात बताई थी। इमरजेंसी तीन घंटे बिना डॉक्टर के रही, ऐसा नहीं है। मुझे जब डॉक्टर के बैठक में जाने के संबंध में पता लगा तो मैं खुद इमरजेंसी पहुंच गया था। बाद में दूसरे डॉक्टर भी आ गए।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस