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नहीं मिला डीडीटी पाउडर, 15 से होना था छिड़काव
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जिला मलेरिया कार्यालय। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। मलेरिया के लिहाज से बदायूं बेहद संवेदनशील जिलों में शामिल है। हर वर्ष यहां मलेरिया का व्यापक प्रकोप रहता है। 2019 में यहां मलेरिया के 20 हजार से ज्यादा मामले सामने आए थे। हर वर्ष बड़ी संख्या में मच्छरजनित बीमारियों से लोगों की जान भी जाती हैं। इस बार भी बारिश के साथ मलेरिया का खतरा बढ़ गया है। गाइड लाइन के अनुसार मच्छरों का प्रकोप रोकने के लिए 15 मई से डीडीटी का छिड़काव शुरू हो जाना चाहिए, लेकिन इस बार मलेरिया विभाग को शासन स्तर से डीडीटी पाउडर ही नहीं मिला है।
जिले में मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए शासन स्तर से मॉनीटरिंग की जा रही है, इसके बाद भी मलेरिया रोकथाम और बचाव संबंधी कई काम समय से नहीं हो पा रहे। पिछले दिनों मलेरिया विभाग को लार्वा नाशक टेमोफॉस दवा की पांच सौ लीटर से ज्यादा सप्लाई मिली थी। मुख्यालय से लेकर गांवों तक इसका छिड़काव कराया जा रहा है। बदायूं ने शासन से छिड़काव के लिए 60 एमटी डीडीटी पाउडर की मांग की थी। गौर करने की बात यह है कि गाइड लाइन के अनुसार डीडीटी के घोल का छिड़काव 15 मई से शुरू हो जाना चाहिए, लेकिन जिले में अब तक छिड़काव शुरू नहीं किया गया है। दरअसल, अब तक शासन से जिले को डीडीटी पाउडर ही नहीं मिला है।
मुख्यालय पर मलेरिया विभाग की सात टीमें जल भराव वाले स्थानों पर टेमोफॉस का छिड़काव करा रही हैं। गांवों में छिड़काव की जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग की है, लेकिन गांवों में सही ढंग से टेमोफॉस के घोल का भी छिड़काव नहीं हो रहा। बारिश के बाद गांवों में जलभराव के कारण खतरा ज्यादा बढ़ गया है।
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डीडीटी पाउडर की सप्लाई अभी सप्लाई नहीं मिल सकी है। जिले को 60 एमटी डीडीटी की जरूरत है। इसके लिए मांग पहले ही भेजी जा रही है। बारिश होने के बाद मच्छर ज्यादा बढ़ने का खतरा है। डीडीटी का छिड़काव 15 मई से शुरू हो जाना चाहिए। अब तक दवा न मिलने के कारण छिड़काव शुरू नहीं हो सका है।
-अमित तिवारी, मलेरिया निरीक्षक
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जिले में मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए शासन स्तर से मॉनीटरिंग की जा रही है, इसके बाद भी मलेरिया रोकथाम और बचाव संबंधी कई काम समय से नहीं हो पा रहे। पिछले दिनों मलेरिया विभाग को लार्वा नाशक टेमोफॉस दवा की पांच सौ लीटर से ज्यादा सप्लाई मिली थी। मुख्यालय से लेकर गांवों तक इसका छिड़काव कराया जा रहा है। बदायूं ने शासन से छिड़काव के लिए 60 एमटी डीडीटी पाउडर की मांग की थी। गौर करने की बात यह है कि गाइड लाइन के अनुसार डीडीटी के घोल का छिड़काव 15 मई से शुरू हो जाना चाहिए, लेकिन जिले में अब तक छिड़काव शुरू नहीं किया गया है। दरअसल, अब तक शासन से जिले को डीडीटी पाउडर ही नहीं मिला है।
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मुख्यालय पर मलेरिया विभाग की सात टीमें जल भराव वाले स्थानों पर टेमोफॉस का छिड़काव करा रही हैं। गांवों में छिड़काव की जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग की है, लेकिन गांवों में सही ढंग से टेमोफॉस के घोल का भी छिड़काव नहीं हो रहा। बारिश के बाद गांवों में जलभराव के कारण खतरा ज्यादा बढ़ गया है।
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डीडीटी पाउडर की सप्लाई अभी सप्लाई नहीं मिल सकी है। जिले को 60 एमटी डीडीटी की जरूरत है। इसके लिए मांग पहले ही भेजी जा रही है। बारिश होने के बाद मच्छर ज्यादा बढ़ने का खतरा है। डीडीटी का छिड़काव 15 मई से शुरू हो जाना चाहिए। अब तक दवा न मिलने के कारण छिड़काव शुरू नहीं हो सका है।
-अमित तिवारी, मलेरिया निरीक्षक