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कार्रवाई के बाद भी नहीं सुधरे महिला अस्पताल के डॉक्टर, कर्मचारी
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ओपीडी में डॉ. कुमार बासु के कक्ष के बाहर बैठीं महिलाएं। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। कार्रवाई के बाद भी जिला महिला अस्पताल के डॉक्टरों के रवैये में कोई सुधार नहीं आया है। शुक्रवार को भी कई चिकित्सक अपने कक्षों से नदारद रहे। इस कारण ओपीडी में मरीजों को लाइन में लगकर घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ी।
बृहस्पतिवार को डीएम के निर्देश पर जिले भर के सरकारी अस्पतालों में प्रशासनिक अधिकारियों ने औचक निरीक्षण किया था। जिला महिला अस्पताल में ही सीएमएस डॉ. रेखा रानी समेत 12 डॉक्टर और 37 कर्मचारी गैरहाजिर मिले थे। इनके खिलाफ एक दिन का वेतन काटने और अगले आदेश तक वेतन आहरण पर रोक लगा दी गई।
प्रशासन के स्तर से की गई कार्रवाई के बाद भी डॉक्टरों और कर्मचारियों के रवैया में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। शुक्रवार को दूसरे दिन भी ज्यादातर डॉक्टर मनमानी करते रहे। ओपीडी में महिलाओं की भीड़ रही। बच्चों को इलाज के लिए लाईं महिलाएं भी इंतजार करती रहीं। ओपीडी में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप वार्ष्णेय, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका तो रोगियों को देखते हुईं मिलीं लेकिन डॉ. कुमार बासु कक्ष से नदारद थे। उनके कक्ष के बाहर कई महिलाएं बच्चों को लेकर बैठीं थीं। हालांकि, कुछ देर बाद डॉ. बासु आ गए और बताया कि वह अस्पताल में ही बच्चों को देखने गए थे।
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सीएमएस डॉ. रेखा रानी शुक्रवार को भी अपने कक्ष में नहीं रहीं।
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शासन की मंशा बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं हैं, जो डॉक्टर और कर्मचारी शासन की मंशा के अनुरूप काम नहीं कर रहे उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। डॉक्टरों और कर्मचारियों का ओपीडी से इस तरह नदारद होना गंभीर बात है। नियम विरुद्ध कर्मचारी की नियुक्ति मामले में अभी जांच पूरी नहीं हो सकी है।
-डॉ. दीपक अहोरी, एडी हेल्थ
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बृहस्पतिवार को डीएम के निर्देश पर जिले भर के सरकारी अस्पतालों में प्रशासनिक अधिकारियों ने औचक निरीक्षण किया था। जिला महिला अस्पताल में ही सीएमएस डॉ. रेखा रानी समेत 12 डॉक्टर और 37 कर्मचारी गैरहाजिर मिले थे। इनके खिलाफ एक दिन का वेतन काटने और अगले आदेश तक वेतन आहरण पर रोक लगा दी गई।
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प्रशासन के स्तर से की गई कार्रवाई के बाद भी डॉक्टरों और कर्मचारियों के रवैया में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। शुक्रवार को दूसरे दिन भी ज्यादातर डॉक्टर मनमानी करते रहे। ओपीडी में महिलाओं की भीड़ रही। बच्चों को इलाज के लिए लाईं महिलाएं भी इंतजार करती रहीं। ओपीडी में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप वार्ष्णेय, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका तो रोगियों को देखते हुईं मिलीं लेकिन डॉ. कुमार बासु कक्ष से नदारद थे। उनके कक्ष के बाहर कई महिलाएं बच्चों को लेकर बैठीं थीं। हालांकि, कुछ देर बाद डॉ. बासु आ गए और बताया कि वह अस्पताल में ही बच्चों को देखने गए थे।
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सीएमएस डॉ. रेखा रानी शुक्रवार को भी अपने कक्ष में नहीं रहीं।
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शासन की मंशा बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं हैं, जो डॉक्टर और कर्मचारी शासन की मंशा के अनुरूप काम नहीं कर रहे उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। डॉक्टरों और कर्मचारियों का ओपीडी से इस तरह नदारद होना गंभीर बात है। नियम विरुद्ध कर्मचारी की नियुक्ति मामले में अभी जांच पूरी नहीं हो सकी है।
-डॉ. दीपक अहोरी, एडी हेल्थ