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स्वास्थ्य व्यवस्था : कई केंद्र खंडहर, खिड़की-दरवाजे भी चोरी
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नौली हरनाथपुर में स्वास्थ्य केंद्र के दरवाजे खिड़की भी चोरी। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। मुख्यमंत्री ने रविवार को जिले में वर्चुअल तरीके से 97 स्वास्थ्य उपकेंद्रों का लोकार्पण किया। इधर, यहां कई कस्बों और गांवों में पहले से बने 43 स्वास्थ्य उपकेंद्र ऐसे हैं जो ध्यान न दिए जाने से खंडहर होते जा रहे हैं। कई मेें स्टाफ नहीं आता तो कई के दरवाजे और खिड़कियां तक चोरी हो गए हैं। और तो और कुछ उपकेंद्रों पर कब्जे तक हो गए हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि नए स्वास्थ्य उपकेंद्र तो बनाए जाएं, लेकिन पुरानों पर भी ध्यान दिया जाए।
जिले में कहने को करीब 43 स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर एएनएम की तो तैनाती है लेकिन यह उपकेंद्र ज्यादातर बंद ही रहते हैं। वर्षों से इनकी मरम्मत नहीं हुई है। कई अस्पतालों में आवासीय भवन भी हैं। इन पर भी कब्जा हो गया है। ग्रामीण इन उपकेंद्रों को पशुओं को बंधने, भूसा भरने और उपले रखने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
अधिकारियों का ज्यादा ध्यान सीएचसी और पीएचसी पर ही रहता है। यह उपकेंद्र संबंधित ब्लॉक की सीएचसी से संचालित होते हैं, बावजूद इसके सीएचसी प्रभारी इन पर गौर नहीं करते। इन्हीं में सालारपुर ब्लॉक के दरावनगर में स्वास्थ्य उपकेंद्र खंडहर हो गया है। इसी क्रम में सन 2016 में आसफपुर ब्लॉक के दबतोरी में उपकेंद्र के भवन को ब्लॉक मुख्यालय के लिए आवंटित कर दिया गया था। यहां ब्लॉक मुख्यालय तो नहीं बन सका, लेकिन अस्पताल भी बंद हो गया।
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अकबरपुर में खंडहर हो रहा स्वास्थ्य उपकेंद्र
उसावां। ब्लॉक क्षेत्र के गांव अकबरपुर में करीब 20 साल पहले स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण हुआ था। कुछ दिन तक तो यहां स्वास्थ्य सेवाएं मिलीं। बाद में धीरे-धीरे स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। उपकेंद्र पर एएनएम की तैनाती है, लेकिन वह यहां नहीं बैठतीं। दरअसल, यह उपकेंद्र खंडहर में तब्दील हो चुका है। टीकाकरण के लिए जब एएनएम पहुंचती हैं तो वह प्राथमिक विद्यालय या फिर प्रधान के घर पर बैठ कर टीकाकरण करतीं हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ग्रामीणों को उसावां या फिर मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। संवाद
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गांव नौली हरनाथपुर में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र भी खंडहर हुआ
वजीरगंज। ब्लॉक के गांव नौली हरनाथपुर में पदमश्री और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित एम्स में बतौर सर्जन तैनात रहे डॉ. राजवीर सिंह यादव के प्रयासों से 2005 में स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण हुआ था। यहां प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थियेटर, इमरजेंसी भी बनाई गई। स्टाफ के रहने के लिए अस्पताल परिसर में आवास भी बनाए गए। कुछ दिन अस्पताल चला, लेकिन बाद में अनदेखी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं चौपट हो गईं। अस्पताल का भवन अब खंडहर हो रहा है। दरवाजे और खिड़कियां चोरी हो गए हैं। स्टाफ के नाम पर एक फार्मासिस्ट और एक वार्ड ब्वॉय की तैनाती है। लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ब्लॉक या जिला मुख्यालय के लिए दौड़ लगानी पड़ती है। संवाद
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गुधनी के स्वास्थ्य उपकेंद्र का भी बुरा हाल
बिल्सी। ब्लॉक अंबियापुर के गांव गुधनी में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र खंडहर में तब्दील हो गया है। यहां एएनएम की तैनाती है, लेकिन भवन जर्जर होने के कारण एएनएम यहां नहीं बैठतीं। टीकाकरण भी घर-घर जाकर करना होता है। उपकेंद्र की दुर्दशा को लेकर गांव के लोगों ने कई बार बिल्सी सीएचसी और जिला मुख्यालय पर भी शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। स्टाफ की तैनाती और देखरेख न होने से उपकेंद्र दुर्दशा का शिकार है। संवाद
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यह बोले ग्रामीण
नौली हरनाथपुर स्वास्थ्य केंद्र का ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल रहा। प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थियेटर, इमरजेंसी वार्ड तक की यहां व्यवस्था है। स्टाफ के लिए आवास भी हैं, लेकिन स्टाफ की तैनाती नहीं है। उपकेंद्र धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।
-लक्ष्मी देवी, प्रधान नौली हरनाथपुर
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अकबरपुर में करीब 20 साल पहले स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाया गया था। यहां एएनएम की तैनाती है, लेकिन उपकेंद्र खंडहर होने के कारण एएनएम नहीं बैठतीं। चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर गांव में कुछ नहीं है। उपकेंद्र लगभग खंडहर हो गया है।
-सुनीता यादव, प्रधान अकबरपुर
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गांव में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कुछ नहीं है। मामूली बीमारी में भी ग्रामीणों को ब्लॉक और जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। कुछ समय के लिए नौली हरनाथपुर के स्वास्थ्य केंद्र का लोगों को लाभ मिला, लेकिन अब उपेक्षा के कारण हालात खराब हैं।
-बुद्धसेन
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स्वास्थ्य केंद्र पर किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। अनदेखी के कारण आवासीय भवन भी जर्जर हो रहे हैं। यहां खिड़की दरवाजे तक चोरी हो गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर नौली हरनाथपुर स्वास्थ्य केंद्र पर फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय ही काम देखते हैं।
-कुंवरपाल
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ज्यादातर उपकेंद्रों पर एएनएम की तैनाती है। कुछ उपकेंद्रों के भवन जर्जर हुए हैं। इनको लेकर समय-समय पर संबंधित एमओआईसी से रिपोर्ट भी ली जाती है। जहां भी उपकेंद्रों पर अगर कोई कब्जा है तो उसको हटवाया जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
-डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ
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जिले में कहने को करीब 43 स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर एएनएम की तो तैनाती है लेकिन यह उपकेंद्र ज्यादातर बंद ही रहते हैं। वर्षों से इनकी मरम्मत नहीं हुई है। कई अस्पतालों में आवासीय भवन भी हैं। इन पर भी कब्जा हो गया है। ग्रामीण इन उपकेंद्रों को पशुओं को बंधने, भूसा भरने और उपले रखने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
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अधिकारियों का ज्यादा ध्यान सीएचसी और पीएचसी पर ही रहता है। यह उपकेंद्र संबंधित ब्लॉक की सीएचसी से संचालित होते हैं, बावजूद इसके सीएचसी प्रभारी इन पर गौर नहीं करते। इन्हीं में सालारपुर ब्लॉक के दरावनगर में स्वास्थ्य उपकेंद्र खंडहर हो गया है। इसी क्रम में सन 2016 में आसफपुर ब्लॉक के दबतोरी में उपकेंद्र के भवन को ब्लॉक मुख्यालय के लिए आवंटित कर दिया गया था। यहां ब्लॉक मुख्यालय तो नहीं बन सका, लेकिन अस्पताल भी बंद हो गया।
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अकबरपुर में खंडहर हो रहा स्वास्थ्य उपकेंद्र
उसावां। ब्लॉक क्षेत्र के गांव अकबरपुर में करीब 20 साल पहले स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण हुआ था। कुछ दिन तक तो यहां स्वास्थ्य सेवाएं मिलीं। बाद में धीरे-धीरे स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। उपकेंद्र पर एएनएम की तैनाती है, लेकिन वह यहां नहीं बैठतीं। दरअसल, यह उपकेंद्र खंडहर में तब्दील हो चुका है। टीकाकरण के लिए जब एएनएम पहुंचती हैं तो वह प्राथमिक विद्यालय या फिर प्रधान के घर पर बैठ कर टीकाकरण करतीं हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ग्रामीणों को उसावां या फिर मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। संवाद
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गांव नौली हरनाथपुर में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र भी खंडहर हुआ
वजीरगंज। ब्लॉक के गांव नौली हरनाथपुर में पदमश्री और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित एम्स में बतौर सर्जन तैनात रहे डॉ. राजवीर सिंह यादव के प्रयासों से 2005 में स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण हुआ था। यहां प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थियेटर, इमरजेंसी भी बनाई गई। स्टाफ के रहने के लिए अस्पताल परिसर में आवास भी बनाए गए। कुछ दिन अस्पताल चला, लेकिन बाद में अनदेखी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं चौपट हो गईं। अस्पताल का भवन अब खंडहर हो रहा है। दरवाजे और खिड़कियां चोरी हो गए हैं। स्टाफ के नाम पर एक फार्मासिस्ट और एक वार्ड ब्वॉय की तैनाती है। लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ब्लॉक या जिला मुख्यालय के लिए दौड़ लगानी पड़ती है। संवाद
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गुधनी के स्वास्थ्य उपकेंद्र का भी बुरा हाल
बिल्सी। ब्लॉक अंबियापुर के गांव गुधनी में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र खंडहर में तब्दील हो गया है। यहां एएनएम की तैनाती है, लेकिन भवन जर्जर होने के कारण एएनएम यहां नहीं बैठतीं। टीकाकरण भी घर-घर जाकर करना होता है। उपकेंद्र की दुर्दशा को लेकर गांव के लोगों ने कई बार बिल्सी सीएचसी और जिला मुख्यालय पर भी शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। स्टाफ की तैनाती और देखरेख न होने से उपकेंद्र दुर्दशा का शिकार है। संवाद
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यह बोले ग्रामीण
नौली हरनाथपुर स्वास्थ्य केंद्र का ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल रहा। प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थियेटर, इमरजेंसी वार्ड तक की यहां व्यवस्था है। स्टाफ के लिए आवास भी हैं, लेकिन स्टाफ की तैनाती नहीं है। उपकेंद्र धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।
-लक्ष्मी देवी, प्रधान नौली हरनाथपुर
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अकबरपुर में करीब 20 साल पहले स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाया गया था। यहां एएनएम की तैनाती है, लेकिन उपकेंद्र खंडहर होने के कारण एएनएम नहीं बैठतीं। चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर गांव में कुछ नहीं है। उपकेंद्र लगभग खंडहर हो गया है।
-सुनीता यादव, प्रधान अकबरपुर
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गांव में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कुछ नहीं है। मामूली बीमारी में भी ग्रामीणों को ब्लॉक और जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। कुछ समय के लिए नौली हरनाथपुर के स्वास्थ्य केंद्र का लोगों को लाभ मिला, लेकिन अब उपेक्षा के कारण हालात खराब हैं।
-बुद्धसेन
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स्वास्थ्य केंद्र पर किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। अनदेखी के कारण आवासीय भवन भी जर्जर हो रहे हैं। यहां खिड़की दरवाजे तक चोरी हो गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर नौली हरनाथपुर स्वास्थ्य केंद्र पर फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय ही काम देखते हैं।
-कुंवरपाल
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ज्यादातर उपकेंद्रों पर एएनएम की तैनाती है। कुछ उपकेंद्रों के भवन जर्जर हुए हैं। इनको लेकर समय-समय पर संबंधित एमओआईसी से रिपोर्ट भी ली जाती है। जहां भी उपकेंद्रों पर अगर कोई कब्जा है तो उसको हटवाया जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
-डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ