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जज्बा बरकरार, एचआईवी के साथ बेहतर जिंदगी जी रहे लोग
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बदायूं। एचआईवी से सावधानी और सुरक्षित यौन संबंधों के जरिए बचा जा सकता है। जिले में ऐसे लोगों की संख्या काफी है, जो एचआईवी से पीड़ित हैं। काउंसिलिंग और एआरटी सेंटरों से संपर्क रखकर ये लोग जिंदगी जी रहे हैं। एचआईवी का भले कोई इलाज न हो, लेकिन नियमित दवा खाने से एचआईवी मरीज लंबे समय तक जिंदगी जी सकते है।
जिला और महिला अस्पताल के साथ उझानी सीएचसी पर एचआईवी काउंसिलिंग सेंटर हैं। तमाम जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद जिले में एचआईवी रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। पांच साल की स्थिति पर गौर करें तो जिले में एचआईवी रोगियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। जिला अस्पताल में आईसीटीसी सेंटर 2012 में खुला था। पहले साल जिले में एचआईवी रोगियों की संख्या नौ थी, लेकिन 2021 आते-आते एचआईवी रोगियों की संख्या 576 तक पहुंच गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार तीन सौ से ज्यादा लोगों को नियमित दवाएं देने के साथ उनकी काउंसलिंग भी की जा रही है।
ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जो एचआईवी ग्रस्त होने के बाद भी जिंदादिली के साथ जी रहे हैं। कुछ परिवार तो ऐसे हैं जहां एक से अधिक एचआईवी रोगी हैं। हर वर्ष औसतन सात से आठ लोगों की एचआईवी से जान भी जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि एचआईवी का शिकार करीब ज्यादातर लोग निम्न परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें ट्रक ड्राइवर, रिक्शा चलाने वाले, नियमित नशा करने वाले लोग शामिल हैं।
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कुल एचआईवी रोगियों में 75 फीसदी से ज्यादा पुरुष
एचआईवी का शिकार रोगियों में पुरुषों की संख्या ज्यादा है। कुल रोगियों में 75 फीसदी से ज्यादा पुरुष और शेष महिलाएं हैं। दो से तीन फीसदी की संख्या बच्चों और किशोरों की भी है। इनमें एचआईवी माता से पहुंचा है। हर महीने जिले में करीब दो हजार लोगों की एचआईवी जांच हो रही है। सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन से पहले एचआईवी टेस्ट किया जाता है। प्रसव को आने वाली महिलाओं का भी पहले एचआईवी टेस्ट किया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि जांच और जागरूकता का दायरा बढ़ने के बाद ज्यादा रोगी मिल रहे हैं।
पति ने एचआईवी से तोड़ा दम, पत्नी और बेटी भी शिकार हुई
मूसाझाग के एक गांव में 2019 में एचआईवी के एक रोगी की मौत हो गई थी। गौर करने वाली बात यह है कि इस व्यक्ति की पत्नी और बेटी भी जांच में एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे। इन दोनों का बरेली एआरटी सेंटर से इलाज चल रहा है। बदायूं में काउंसलिंग भी हो रही है। महिला का कहना है कि वह और उसकी बेटी नियमित दवा ले रही है। उनको कोई समस्या नहीं है।
जिले में तीन स्थानों पर काउंसलिंग सेंटर काम कर रहे हैं। एचआईवी रोगियों को एआरटी सेंटर बरेली से निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। एचआईवी से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षित यौन संबंध हैं। एक बार इस्तेमाल सिरिंज का भी प्रयोग करने से एचआईवी फैलता है। एचआईवी छूने या बात करने से नहीं फैसला। अगर नियमित दवा ली जाए तो एचआईवी का असर कम हो जाता है। रोगी व्यक्ति लंबे समय तक सामान्य जिंदगी जी सकता है। काफी संख्या में लोग सामान्य जीवन की तरह जी रहे हैं। - डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ
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जिला और महिला अस्पताल के साथ उझानी सीएचसी पर एचआईवी काउंसिलिंग सेंटर हैं। तमाम जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद जिले में एचआईवी रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। पांच साल की स्थिति पर गौर करें तो जिले में एचआईवी रोगियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। जिला अस्पताल में आईसीटीसी सेंटर 2012 में खुला था। पहले साल जिले में एचआईवी रोगियों की संख्या नौ थी, लेकिन 2021 आते-आते एचआईवी रोगियों की संख्या 576 तक पहुंच गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार तीन सौ से ज्यादा लोगों को नियमित दवाएं देने के साथ उनकी काउंसलिंग भी की जा रही है।
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ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जो एचआईवी ग्रस्त होने के बाद भी जिंदादिली के साथ जी रहे हैं। कुछ परिवार तो ऐसे हैं जहां एक से अधिक एचआईवी रोगी हैं। हर वर्ष औसतन सात से आठ लोगों की एचआईवी से जान भी जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि एचआईवी का शिकार करीब ज्यादातर लोग निम्न परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें ट्रक ड्राइवर, रिक्शा चलाने वाले, नियमित नशा करने वाले लोग शामिल हैं।
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कुल एचआईवी रोगियों में 75 फीसदी से ज्यादा पुरुष
एचआईवी का शिकार रोगियों में पुरुषों की संख्या ज्यादा है। कुल रोगियों में 75 फीसदी से ज्यादा पुरुष और शेष महिलाएं हैं। दो से तीन फीसदी की संख्या बच्चों और किशोरों की भी है। इनमें एचआईवी माता से पहुंचा है। हर महीने जिले में करीब दो हजार लोगों की एचआईवी जांच हो रही है। सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन से पहले एचआईवी टेस्ट किया जाता है। प्रसव को आने वाली महिलाओं का भी पहले एचआईवी टेस्ट किया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि जांच और जागरूकता का दायरा बढ़ने के बाद ज्यादा रोगी मिल रहे हैं।
पति ने एचआईवी से तोड़ा दम, पत्नी और बेटी भी शिकार हुई
मूसाझाग के एक गांव में 2019 में एचआईवी के एक रोगी की मौत हो गई थी। गौर करने वाली बात यह है कि इस व्यक्ति की पत्नी और बेटी भी जांच में एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे। इन दोनों का बरेली एआरटी सेंटर से इलाज चल रहा है। बदायूं में काउंसलिंग भी हो रही है। महिला का कहना है कि वह और उसकी बेटी नियमित दवा ले रही है। उनको कोई समस्या नहीं है।
जिले में तीन स्थानों पर काउंसलिंग सेंटर काम कर रहे हैं। एचआईवी रोगियों को एआरटी सेंटर बरेली से निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। एचआईवी से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षित यौन संबंध हैं। एक बार इस्तेमाल सिरिंज का भी प्रयोग करने से एचआईवी फैलता है। एचआईवी छूने या बात करने से नहीं फैसला। अगर नियमित दवा ली जाए तो एचआईवी का असर कम हो जाता है। रोगी व्यक्ति लंबे समय तक सामान्य जिंदगी जी सकता है। काफी संख्या में लोग सामान्य जीवन की तरह जी रहे हैं। - डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ