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हाईरिस्क गांवों में काबू होने लगा मलेरिया, अब वायरल का प्रकोप
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बदायूं। जिले के हाईरिस्क दातागंज, समरेर, सालारपुर और जगत ब्लॉक के गांवों में मलेरिया के हालात अब सामान्य हो रहे हैं। हालांकि, इन ब्लॉक के गांवों में अब वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ने लगा है। बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने से स्वास्थ्य विभाग भी परेशान है। प्रभावित गांवों में लगातार हेल्थ कैंप का आयोजन कर ग्रामीणों को जांच के बाद दवाओं का वितरण किया जा रहा है।
पिछले साल चार ब्लॉक के करीब सौ गांवों में मलेरिया का व्यापक प्रकोप था। ऐसे में इनको हाईरिस्क श्रेणी में शामिल किया गया था। इस बार भी मलेरिया का सीजन शुरू होने के साथ हालात बेकाबू होने लगे थे। 15 सितंबर तक जिले में पीवी (प्लाजमोडियम वाइवेक्स) कैटेगरी के नौ हजार से ज्यादा मामले सामने आने के बाद अब हालात सामान्य होते दिख रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो हाईरिस्क गांवों में इस माह एक से पांच सितंबर तक मलेरिया के करीब 392 मामले सामने आए थे, वहीं 15 से 20 सितंबर के बीच इनमें काफी गिरावट आई है। इस दौरान 87 ही नए केस मिले। जबकि इस दौरान वायरल फीवर के मरीजों की संख्या हजारों में पहुंच रही है। बिसौली के कुछ गांवों में बुखार से मौतें भी हुई है। संदिग्ध डेंगू के मरीज भी मिले। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग मौतों और डेंगू के मरीज मिलने की बात से इनकार कर रहा है।
सर्वाधिक प्रभावित जगत और सालारपुर ब्लॉक के गांवों में भी स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है। रविवार को भी कई गांवों में कैंप लगाए गए। इस दौरान सबसे ज्यादा मरीज वायरल फीवर के मिले हैं। अब मलेरिया के कुछ मरीज ही मिल रहे हैं। हालांकि, मलेरिया का प्रकोप आमतौर पर अक्तूबर के अंत तक रहता है। अधिकारी भी मानते हैं कि आने वाले दिनों की स्थिति को लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
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समय से पहले मानसून कमजोर होने का भी फायदा
इस बार अच्छी बारिश नहीं हुई। समय से पहले ही मानसून कमजोर हो गया। इससे खरीफ फसलों को तो नुकसान हुआ, लेकिन गांवों में कई-कई दिन पानी न भरने के चलते भी मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप कम हुआ। आमतौर पर मच्छरजनित बीमारियों का सीजन अगस्त से अक्टूबर तक होता है। इस बार अगस्त में नाम मात्र को बारिश हुई। सितंबर में तो मानसून लगभग पूरी तरह से रूठ गया।
मलेरिया के साथ संदिग्ध कोविड-19 की भी जांच
जिले में बढ़ रहे वायरल फीवर के मरीजों की संख्या ने स्वास्थ्य विभाग को परेशान कर दिया है। वायरल फीवर के मरीजों की कोविड-19 जांच भी चुनौती साबित हो रही है। ऐसे में लगातार स्वास्थ्य कैंपों में बुखार पीड़ितों की मलेरिया की जांच के साथ संदिग्धों की कोविड-19 जांच भी की जा रही है। हालांकि, वायरल फीवर के ज्यादातर पड़ितों की जांच निगेटिव आ रही है। मलेरिया के रोगी भी कम ही मिल रहे हैं।
बुखर से युवक की मौत
बिनावर कस्बा स्थित एक बीयर शॉप पर सेल्समैन का काम करने वाले ओमेंद्र साहू (28) पुत्र धर्मेंद्र साहू को बीते शनिवार की रात बुखार आ गया। परिवार वाले आधी रात में उन्हें शहर के एक एक निजी अस्पताल में दवा दिलवाने ले गए, लेकिन हालत देखते हुए डॉक्टर ने उन्हें बरेली ले जाने की सलाह दी। रविवार सुबह बरेली ले जाते समय ओमेंद्र ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। परिजनों के अनुसार रात करीब दस बजे ओमेंद्र ने खाना खाने के बाद एक गिलास दूध भी पिया था। रात में अचानक बुखार आने के बाद उसकी हालत बिगड़ती चली गई।
मलेरिया तेजी से काबू हो रहा है। वायरल फीवर के मरीजों को जांच के बाद दवाओं का वितरण किया जा रहा है। जिन गांवों में भी मलेरिया का प्रकोप है वहां कैंपों का आयोजन कर लोगों की जांच की जा रही है। मलेरिया काबू हो गया तो डेंगू का खतरा भी नहीं रहेगा।
- डॉ. हरिदत्त कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी
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पिछले साल चार ब्लॉक के करीब सौ गांवों में मलेरिया का व्यापक प्रकोप था। ऐसे में इनको हाईरिस्क श्रेणी में शामिल किया गया था। इस बार भी मलेरिया का सीजन शुरू होने के साथ हालात बेकाबू होने लगे थे। 15 सितंबर तक जिले में पीवी (प्लाजमोडियम वाइवेक्स) कैटेगरी के नौ हजार से ज्यादा मामले सामने आने के बाद अब हालात सामान्य होते दिख रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो हाईरिस्क गांवों में इस माह एक से पांच सितंबर तक मलेरिया के करीब 392 मामले सामने आए थे, वहीं 15 से 20 सितंबर के बीच इनमें काफी गिरावट आई है। इस दौरान 87 ही नए केस मिले। जबकि इस दौरान वायरल फीवर के मरीजों की संख्या हजारों में पहुंच रही है। बिसौली के कुछ गांवों में बुखार से मौतें भी हुई है। संदिग्ध डेंगू के मरीज भी मिले। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग मौतों और डेंगू के मरीज मिलने की बात से इनकार कर रहा है।
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सर्वाधिक प्रभावित जगत और सालारपुर ब्लॉक के गांवों में भी स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है। रविवार को भी कई गांवों में कैंप लगाए गए। इस दौरान सबसे ज्यादा मरीज वायरल फीवर के मिले हैं। अब मलेरिया के कुछ मरीज ही मिल रहे हैं। हालांकि, मलेरिया का प्रकोप आमतौर पर अक्तूबर के अंत तक रहता है। अधिकारी भी मानते हैं कि आने वाले दिनों की स्थिति को लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
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समय से पहले मानसून कमजोर होने का भी फायदा
इस बार अच्छी बारिश नहीं हुई। समय से पहले ही मानसून कमजोर हो गया। इससे खरीफ फसलों को तो नुकसान हुआ, लेकिन गांवों में कई-कई दिन पानी न भरने के चलते भी मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप कम हुआ। आमतौर पर मच्छरजनित बीमारियों का सीजन अगस्त से अक्टूबर तक होता है। इस बार अगस्त में नाम मात्र को बारिश हुई। सितंबर में तो मानसून लगभग पूरी तरह से रूठ गया।
मलेरिया के साथ संदिग्ध कोविड-19 की भी जांच
जिले में बढ़ रहे वायरल फीवर के मरीजों की संख्या ने स्वास्थ्य विभाग को परेशान कर दिया है। वायरल फीवर के मरीजों की कोविड-19 जांच भी चुनौती साबित हो रही है। ऐसे में लगातार स्वास्थ्य कैंपों में बुखार पीड़ितों की मलेरिया की जांच के साथ संदिग्धों की कोविड-19 जांच भी की जा रही है। हालांकि, वायरल फीवर के ज्यादातर पड़ितों की जांच निगेटिव आ रही है। मलेरिया के रोगी भी कम ही मिल रहे हैं।
बुखर से युवक की मौत
बिनावर कस्बा स्थित एक बीयर शॉप पर सेल्समैन का काम करने वाले ओमेंद्र साहू (28) पुत्र धर्मेंद्र साहू को बीते शनिवार की रात बुखार आ गया। परिवार वाले आधी रात में उन्हें शहर के एक एक निजी अस्पताल में दवा दिलवाने ले गए, लेकिन हालत देखते हुए डॉक्टर ने उन्हें बरेली ले जाने की सलाह दी। रविवार सुबह बरेली ले जाते समय ओमेंद्र ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। परिजनों के अनुसार रात करीब दस बजे ओमेंद्र ने खाना खाने के बाद एक गिलास दूध भी पिया था। रात में अचानक बुखार आने के बाद उसकी हालत बिगड़ती चली गई।
मलेरिया तेजी से काबू हो रहा है। वायरल फीवर के मरीजों को जांच के बाद दवाओं का वितरण किया जा रहा है। जिन गांवों में भी मलेरिया का प्रकोप है वहां कैंपों का आयोजन कर लोगों की जांच की जा रही है। मलेरिया काबू हो गया तो डेंगू का खतरा भी नहीं रहेगा।
- डॉ. हरिदत्त कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी