फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Health

हाईरिस्क गांवों में काबू होने लगा मलेरिया, अब वायरल का प्रकोप

Mon, 21 Sep 2020 01:06 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2020 01:06 AM IST
विज्ञापन
Health
बदायूं। जिले के हाईरिस्क दातागंज, समरेर, सालारपुर और जगत ब्लॉक के गांवों में मलेरिया के हालात अब सामान्य हो रहे हैं। हालांकि, इन ब्लॉक के गांवों में अब वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ने लगा है। बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने से स्वास्थ्य विभाग भी परेशान है। प्रभावित गांवों में लगातार हेल्थ कैंप का आयोजन कर ग्रामीणों को जांच के बाद दवाओं का वितरण किया जा रहा है।
विज्ञापन

पिछले साल चार ब्लॉक के करीब सौ गांवों में मलेरिया का व्यापक प्रकोप था। ऐसे में इनको हाईरिस्क श्रेणी में शामिल किया गया था। इस बार भी मलेरिया का सीजन शुरू होने के साथ हालात बेकाबू होने लगे थे। 15 सितंबर तक जिले में पीवी (प्लाजमोडियम वाइवेक्स) कैटेगरी के नौ हजार से ज्यादा मामले सामने आने के बाद अब हालात सामान्य होते दिख रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो हाईरिस्क गांवों में इस माह एक से पांच सितंबर तक मलेरिया के करीब 392 मामले सामने आए थे, वहीं 15 से 20 सितंबर के बीच इनमें काफी गिरावट आई है। इस दौरान 87 ही नए केस मिले। जबकि इस दौरान वायरल फीवर के मरीजों की संख्या हजारों में पहुंच रही है। बिसौली के कुछ गांवों में बुखार से मौतें भी हुई है। संदिग्ध डेंगू के मरीज भी मिले। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग मौतों और डेंगू के मरीज मिलने की बात से इनकार कर रहा है।
विज्ञापन

सर्वाधिक प्रभावित जगत और सालारपुर ब्लॉक के गांवों में भी स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है। रविवार को भी कई गांवों में कैंप लगाए गए। इस दौरान सबसे ज्यादा मरीज वायरल फीवर के मिले हैं। अब मलेरिया के कुछ मरीज ही मिल रहे हैं। हालांकि, मलेरिया का प्रकोप आमतौर पर अक्तूबर के अंत तक रहता है। अधिकारी भी मानते हैं कि आने वाले दिनों की स्थिति को लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन

समय से पहले मानसून कमजोर होने का भी फायदा
इस बार अच्छी बारिश नहीं हुई। समय से पहले ही मानसून कमजोर हो गया। इससे खरीफ फसलों को तो नुकसान हुआ, लेकिन गांवों में कई-कई दिन पानी न भरने के चलते भी मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप कम हुआ। आमतौर पर मच्छरजनित बीमारियों का सीजन अगस्त से अक्टूबर तक होता है। इस बार अगस्त में नाम मात्र को बारिश हुई। सितंबर में तो मानसून लगभग पूरी तरह से रूठ गया।
मलेरिया के साथ संदिग्ध कोविड-19 की भी जांच
जिले में बढ़ रहे वायरल फीवर के मरीजों की संख्या ने स्वास्थ्य विभाग को परेशान कर दिया है। वायरल फीवर के मरीजों की कोविड-19 जांच भी चुनौती साबित हो रही है। ऐसे में लगातार स्वास्थ्य कैंपों में बुखार पीड़ितों की मलेरिया की जांच के साथ संदिग्धों की कोविड-19 जांच भी की जा रही है। हालांकि, वायरल फीवर के ज्यादातर पड़ितों की जांच निगेटिव आ रही है। मलेरिया के रोगी भी कम ही मिल रहे हैं।
बुखर से युवक की मौत
बिनावर कस्बा स्थित एक बीयर शॉप पर सेल्समैन का काम करने वाले ओमेंद्र साहू (28) पुत्र धर्मेंद्र साहू को बीते शनिवार की रात बुखार आ गया। परिवार वाले आधी रात में उन्हें शहर के एक एक निजी अस्पताल में दवा दिलवाने ले गए, लेकिन हालत देखते हुए डॉक्टर ने उन्हें बरेली ले जाने की सलाह दी। रविवार सुबह बरेली ले जाते समय ओमेंद्र ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। परिजनों के अनुसार रात करीब दस बजे ओमेंद्र ने खाना खाने के बाद एक गिलास दूध भी पिया था। रात में अचानक बुखार आने के बाद उसकी हालत बिगड़ती चली गई।

मलेरिया तेजी से काबू हो रहा है। वायरल फीवर के मरीजों को जांच के बाद दवाओं का वितरण किया जा रहा है। जिन गांवों में भी मलेरिया का प्रकोप है वहां कैंपों का आयोजन कर लोगों की जांच की जा रही है। मलेरिया काबू हो गया तो डेंगू का खतरा भी नहीं रहेगा।
- डॉ. हरिदत्त कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed