{"_id":"5e1777aa8ebc3e87c20e6666","slug":"health-badaun-news-bly3913899187","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्टाफ की कमी, शाम को लग जाता है ताला, फिर भी सीएचसी पर जमकर हो रहे संस्थागत प्रसव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्टाफ की कमी, शाम को लग जाता है ताला, फिर भी सीएचसी पर जमकर हो रहे संस्थागत प्रसव
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। जिले के सीएचसी की हालत किसी से छिपी नहीं है। स्टाफ की कमी तो सभी स्थानों पर बनी हुई है, शाम होते ही तमाम सीएचसी में ताला भी लग जाते हैं। इसके बावजूद जिले के तमाम सीएचसी संस्थागत प्रसव का रिकार्ड बना रहे हैं। जिले के 17 सीएचसी में एक जनवरी से 30 नवंबर 2019 तक रिकार्ड तोड़ 43841 संस्थागत प्रसव हुए हैं। सहसवान सीएचसी ने तो इस दौरान जिला महिला अस्पताल को भी पीछे छोड़ दिया। इस अवधि में जिला महिला अस्पताल में 4668 संस्थागत प्रसव हुए वहीं सहसवान सीएचसी ने 4977 संस्थागत प्रसव का रिकार्ड बनाया है।
मातृ-शिशु मृत्युदर पर काबू पाने के लिए सरकार का संस्थागत प्रसव पर जोर है। प्रोत्साहन के लिए जननी सुरक्षा योजना, मातृ-शिशु पोषण जैसी कई योजनाएं संचालित हो रही हैं। जिले में 17 सीएचसी हैं। सभी पर प्रसव की सुविधा है। यहां स्टाफ का हाल किसी से छिपा हुआ नहीं है। जिला अस्पताल को छोड़ दें तो किसी भी सीएचसी पर महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। शाम होते ही ताला लगने को लेकर भी कुछ सीएचसी बदनाम हैं। अभी हाल ही में सहसवान और कुछ दिन पहले ककराला में इसको लेकर विवाद हो चुका है। इसके बावजूद संस्थागत प्रसव के मामले में सीएचसी रिकार्ड बना रहे हैं। ऐसे में यदि प्रतिमाह के औसतन आंकड़ों को देखा जाए तो आंकड़े चौकाने वाले निकलकर आते हैं।
इस्लामनगर अस्पताल में चार डॉक्टर, तीन फार्मासिस्ट, चार वार्ड ब्वाय, पांच नर्स, दो स्वीपर की तैनाती है। हालांकि, अस्पताल के मानक के अनुरूप यह स्टाफ नहीं है। यहां भी अक्सर शाम छह बजे के बाद चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ इमरजेंसी सेवाएं भी बंद हो जाती हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो इस्लामनगर अस्पताल में हर माह संस्थागत औसत 212 प्रसव हो रहे हैं। अस्पताल में अव्यवस्थाएं और गंदगी किसी से छिपी नहीं है। अस्पताल परिसर में गंदगी के साथ कई कंडम एंबुलेंस भी खड़ी हैं।
विज्ञापन
सहसवान सीएचसी ने तो जनवरी से नवंबर 2019 तक संस्थागत प्रसव के मामले में जिला अस्पताल को ही पीछे छोड़ दिया है। जिला अस्पताल में कुल 2668 प्रसव हुए तो सहसवान में 4977 संस्थागत प्रसव हुए। रात में यहां भी स्टाफ नहीं मिलता। हालांकि, व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त होने की बात कही जाती है। सवाल यह भी उठता है कि अगर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। संस्थागत प्रसव के मामले में सीएचसी जिले में नंबर एक पर है तो अक्सर हंगामा क्यों होता है। हाल ही में भाजयुमो जिलाध्यक्ष का यहां विवाद हो गया था। उनके एक परिचित के परिवार की महिला अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती थी। रात में हालत बिगड़ी तो कोई डॉक्टर नहीं था।
जिले के अन्य सीएचसी की तरह उसावां सीएचसी पर भी महिला रोग, या गायनी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। हालांकि यहां स्टाफ में तीनडॉक्टर, दो फार्मासिस्ट, तीन स्टाफ नर्स, दो वार्ड ब्याय की तैनाती है। प्रसव का काम दाई ही देखती है। संस्थागत प्रसव के मामले में उसावां भी पीछे नहीं है। यहां 11 महीने में 3917 संस्थागत प्रसव हुए हैं। औसत निकाला जाए तो यहां अव्यवस्थाओं के बावजूद हर माह 356 प्रसव हो रहे हैं। यह भी आंकड़ा चौंकाने वाला है।
इन सीएचसी में रिकार्ड संस्थागत प्रसव
जिला महिला अस्पताल- 4558
सहसवान 4977
दहगवां 3547
बिल्सी 3532
दातागंज 3438
बिनावर 3139
बिसौली 2969
उझानी 2851
कादरचौक 2689
म्याऊं 2944
इस्लामनगर 2341
आसफपुर 2324
समरेर 2918
( सभी आंकड़े एक जनवरी से 30 नवंबर-2019 तक)
-----------
कुछ सीएचसी पर स्टाफ की कमी है। वहां संस्थागत प्रसव भी कम हुए हैं। ज्यादातर सीएचसी पर स्टाफ नर्स आदि संबंधित स्टाफ की ठीक-ठाक तैनाती है। एंबुलेंस 102 सेवा से संस्थागत प्रसव लगातार बढ़ रहे हैं। आंकड़ेबाजी जैसी कोई बात नहीं है। संस्थागत प्रसव की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। इससे मातृ-शिशु मृत्यु दर पर भी लगाम लग रही है।
- डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी सीएमओ
विज्ञापन
मातृ-शिशु मृत्युदर पर काबू पाने के लिए सरकार का संस्थागत प्रसव पर जोर है। प्रोत्साहन के लिए जननी सुरक्षा योजना, मातृ-शिशु पोषण जैसी कई योजनाएं संचालित हो रही हैं। जिले में 17 सीएचसी हैं। सभी पर प्रसव की सुविधा है। यहां स्टाफ का हाल किसी से छिपा हुआ नहीं है। जिला अस्पताल को छोड़ दें तो किसी भी सीएचसी पर महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। शाम होते ही ताला लगने को लेकर भी कुछ सीएचसी बदनाम हैं। अभी हाल ही में सहसवान और कुछ दिन पहले ककराला में इसको लेकर विवाद हो चुका है। इसके बावजूद संस्थागत प्रसव के मामले में सीएचसी रिकार्ड बना रहे हैं। ऐसे में यदि प्रतिमाह के औसतन आंकड़ों को देखा जाए तो आंकड़े चौकाने वाले निकलकर आते हैं।
विज्ञापन
इस्लामनगर अस्पताल में चार डॉक्टर, तीन फार्मासिस्ट, चार वार्ड ब्वाय, पांच नर्स, दो स्वीपर की तैनाती है। हालांकि, अस्पताल के मानक के अनुरूप यह स्टाफ नहीं है। यहां भी अक्सर शाम छह बजे के बाद चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ इमरजेंसी सेवाएं भी बंद हो जाती हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो इस्लामनगर अस्पताल में हर माह संस्थागत औसत 212 प्रसव हो रहे हैं। अस्पताल में अव्यवस्थाएं और गंदगी किसी से छिपी नहीं है। अस्पताल परिसर में गंदगी के साथ कई कंडम एंबुलेंस भी खड़ी हैं।
विज्ञापन
सहसवान सीएचसी ने तो जनवरी से नवंबर 2019 तक संस्थागत प्रसव के मामले में जिला अस्पताल को ही पीछे छोड़ दिया है। जिला अस्पताल में कुल 2668 प्रसव हुए तो सहसवान में 4977 संस्थागत प्रसव हुए। रात में यहां भी स्टाफ नहीं मिलता। हालांकि, व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त होने की बात कही जाती है। सवाल यह भी उठता है कि अगर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। संस्थागत प्रसव के मामले में सीएचसी जिले में नंबर एक पर है तो अक्सर हंगामा क्यों होता है। हाल ही में भाजयुमो जिलाध्यक्ष का यहां विवाद हो गया था। उनके एक परिचित के परिवार की महिला अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती थी। रात में हालत बिगड़ी तो कोई डॉक्टर नहीं था।
जिले के अन्य सीएचसी की तरह उसावां सीएचसी पर भी महिला रोग, या गायनी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। हालांकि यहां स्टाफ में तीनडॉक्टर, दो फार्मासिस्ट, तीन स्टाफ नर्स, दो वार्ड ब्याय की तैनाती है। प्रसव का काम दाई ही देखती है। संस्थागत प्रसव के मामले में उसावां भी पीछे नहीं है। यहां 11 महीने में 3917 संस्थागत प्रसव हुए हैं। औसत निकाला जाए तो यहां अव्यवस्थाओं के बावजूद हर माह 356 प्रसव हो रहे हैं। यह भी आंकड़ा चौंकाने वाला है।
इन सीएचसी में रिकार्ड संस्थागत प्रसव
जिला महिला अस्पताल- 4558
सहसवान 4977
दहगवां 3547
बिल्सी 3532
दातागंज 3438
बिनावर 3139
बिसौली 2969
उझानी 2851
कादरचौक 2689
म्याऊं 2944
इस्लामनगर 2341
आसफपुर 2324
समरेर 2918
( सभी आंकड़े एक जनवरी से 30 नवंबर-2019 तक)
-----------
कुछ सीएचसी पर स्टाफ की कमी है। वहां संस्थागत प्रसव भी कम हुए हैं। ज्यादातर सीएचसी पर स्टाफ नर्स आदि संबंधित स्टाफ की ठीक-ठाक तैनाती है। एंबुलेंस 102 सेवा से संस्थागत प्रसव लगातार बढ़ रहे हैं। आंकड़ेबाजी जैसी कोई बात नहीं है। संस्थागत प्रसव की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। इससे मातृ-शिशु मृत्यु दर पर भी लगाम लग रही है।
- डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी सीएमओ