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एसएनसीयू में नवजात भूखे, बाहर तड़प रहीं %ममता%

Fri, 05 Jul 2019 08:12 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jul 2019 08:12 PM IST
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Health
बदायूं। एसएनसीयू में सुधार के तमाम दावे किए जा रहे हैं, इसके बावजूद तीमारदार महिलाएं स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगा रहीं हैं। दो महिलाओं ने अपने बच्चों को दूध न पिलाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्टाफ उनसे दूध तो मांग लेता है लेकिन बच्चों के मुंह तक दूध पहुंचेगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में उनके बच्चे वार्मर पर रोते रहते हैं। डायपर बदलने में लापरवाही बरती जा रही है।
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इस समय एसएनसीयू में कुल 26 नवजात भर्ती हैं। उनमें कुछ नवजातों की हालत वास्तव में गंभीर है। इसको लेकर उनके परिवार वाले काफी परेशान हैं। शुक्रवार को कादरचौक इलाके के ग्राम हिम्मत नगर बझेड़ा निवासी किरन पत्नी रामकुमार ने बताया कि उन्होंने गुरुवार शाम करीब छह बजे अपनी नवजात बच्ची को भर्ती कराया था। रात नौ बजे स्टाफ नर्स ने दूध मांगा था, जिस पर उन्होंने कटोरी में दूध दे दिया। 11 बजे उन्होंने दूध पिलाने के बारे में पूछा लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया। उसके बाद शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे बच्ची को दूध पिलाया गया। तब कहीं बच्ची शांत हुई। नहीं तो बच्ची रात भर रोती रही थी।
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इधर, तालगांव निवासी ममता पत्नी शंकर का आरोप है कि उन्होंने करीब एक सप्ताह पूर्व अपने बच्चे को भर्ती कराया था। तब से बच्चा एसएनसीयू में भर्ती है। कोई सुधार भी नहीं दिख रहा है। ऊपर से बच्चे को दूध भी नहीं पिलाया जा रहा है। जब बच्चा दूध नहीं पीता है तो रोता रहता है और दूध पी लेता है तो शांत रहता है। अगर बच्चा दूध के लिए रो रहा है तो कम से कम इस पर ध्यान देना चाहिए।
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पैसे दो, बाहर से आएगी दवा
-बिल्सी थाना क्षेत्र के ग्राम बेहटा गुसाई निवासी इमराना पत्नी मोहम्मद अली ने बताया कि उनका बच्चा करीब आठ दिन से एसएनसीयू में भर्ती है। जब बच्चे को लेकर आए थे, तब एक किलो 400 ग्राम वजन था लेकिन उसके बाद बच्चे का वजन घटकर एक किलो रह गया। शुक्रवार सुबह स्टाफ ने उनसे रुपये मांगे। कहा कि रुपये दो, कुछ दवाईयां बाहर से आएंगी। उनसे 26 नंबर का वीगो बाजार से मंगाया गया।
खराब हुए दो वार्मर
-एसएनसीयू में अब तक 16 वार्मर हो गए थे। उनमें से दो वार्मर अब खराब हो गए हैं। दोनों वार्मर रिपेयरिंग को भेज दिए गए हैं। बाकी वार्मर पर नवजात भर्तीं हैं। 12 वार्मर पर दो-दो नवजात भर्ती हैं। दो वार्मर पर एक-एक नवजात रखा गया है।

बच्चे को दूध तभी दिया जाता है, जब उसे वास्तव में जरूरत होती है। हर स्थिति में दूध नहीं पिला सकते। अगर दूध फेफड़ों में पहुंच गया तो खतरा हो सकता है। रही वीगो मंगाने की बात तो मैंने इमराना को अपनी जेब से 20 रुपये ग्लिसरीन सपोजटरी मंगाने को दिए। सौ रुपये 26 नंबर वीगो मंगाने के लिए दिए थे। रुपये मांगने की बात गलत है।
डॉ. अहमद अली, बाल रोग विशेषज्ञ एसएनसीयू
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