यूपी: चरमरा रही आयुष्मान भारत योजना, 70 प्रतिशत अस्पतालों ने बंद किया मरीजों का इलाज
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उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना का हैरान करने वाला चेहरा सामने आ रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत राज्य के जिन प्राइवेट अस्पतालों को चिह्नित किया गया था, वे धीरे-धीरे काम छोड़ते जा रहे हैं। करीब 70 प्रतिशत प्राइवेट अस्पतालों ने पूरी तरह से इलाज बंद कर दिया है। अब वे आयुष्मान योजना के तहत आने वाले मरीजों का इलाज नहीं कर रहे हैं। इसकी वजह बताई जा रही है कि जिन अस्पतालों में मरीजों का इलाज हुआ था, उनका अब तक कोई भुगतान नहीं हुआ है, इसलिए प्राइवेट अस्पताल नए मरीजों का इलाज करने से डर रहे हैं।
बदायूं जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत आठ प्राइवेट अस्पताल चिह्नित किए गए थे। इनमें राज नर्सिंग होम बिल्सी, डॉ. रामनिवास गुप्ता सहसवान, सिटी हॉस्पिटल बदायूं, जयश्री मैरीगोल्ड हॉस्पिटल, नैना आई केयर हॉस्पिटल, डॉ. सुधीर नर्सिंग होम, र्साइं हॉस्पिटल एंड हार्ट केयर सेंटर, डॉ. आशीष सारस्वत नर्सिंग होम शामिल हैं। शुरुआती दौर में सभी हॉस्पिटल संचालकों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज किया था। उन्होंने ऑनलाइन बिल बनाकर भी विभाग को भेजा था। कुछ हॉस्पिटल में मरीजों के ऑपरेशन के दौरान बाहर से डॉक्टर बुलाए गए थे। उन डॉक्टरों का अस्पताल संचालकों ने तुरंत भुगतान कर दिया लेकिन इस योजना के तहत अस्पताल संचालकों का भुगतान अटक गया।
इससे नाराज हो कर पांच अस्पतालों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत आए मरीजों के लिए काम करना बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने गोल्डन कार्ड लेकर आने वाले मरीजों को भर्ती नहीं किया। इससे मरीजों को या तो सरकारी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा या फिर उन्हें अपनी जमापूंजी खर्च कर इलाज कराना पड़ा। इस समय आयुष्मान भारत योजना के तहत सिर्फ डॉ. रामनिवास गुप्ता सहसवान, नैना आई केयर सेंटर और डॉ. सुधीर नर्सिंग होम काम कर रहे हैं। योजना शुरू होने से लेकर अब तक इन अस्पतालों का भी भुगतान नहीं हुआ है। इससे अस्पतालों के चिकित्सक और संचालकों का मनोबल टूट रहा है।
डॉ. सुधीर नर्सिंग होम में हुए 12 ऑपरेशन, लेकिन भुगतान नहीं
डॉ. सुधीर नर्सिंग होम में अब तक इस योजना के तहत 12 ऑपरेशन हो चुके हैं। नर्सिंग होम के संचालक डॉ. सुधीर ने बताया कि हमारे नर्सिंग होम में तीन डॉक्टर हैं। जब से योजना शुरू हुई है तब से हम 12 ऑपरेशन कर चुके हैं। इसका भुगतान एक लाख 67 हजार रुपये बन रहा है, लेकिन अब तक भुगतान नहीं किया गया है। जब राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की गई थी, तब भी हमने काम किया था। उस समय के छह लाख 70 हजार रुपये आज तक नहीं मिले हैं। इससे मनोबल टूटता है। तुरंत भुगतान हो तो कम से कम काम चलता रहता है।
वहीं सिटी हॉस्पिटल के संचालक संजय यादव ने कहा कि हमारे हॉस्पिटल में तीन ऑपरेशन हुए थे। इसके लिए हमें बाहर से डॉक्टर बुलाने पड़े थे। उनका तो पेमेंट हो गया लेकिन हमारा 64 हजार रुपये अटक गए। भुगतान नहीं होगा, तो मरीजों का कैसे इलाज करेंगे।
मामले को लेकर सीएमओ प्रभारी डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि भुगतान कराने के लिए ऑन लाइन रिपोर्ट भेजनी पड़ती है। कोई कमी रह गई होगी, जिससे भुगतान नहीं हुआ होगा। जो अस्पताल काम नहीं कर रहे हैं उनके साथ अगले सप्ताह बैठक करेंगे और उनकी समस्याओं को खत्म किया जाएगा।
यहां आयुष्मान भारत योजना से जरूरतमंद के नाम गायब
उसावां थाना क्षेत्र निवासी विजयभान सिंह ने स्वास्थ्य विभाग और सरकारी मशीनरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2011 में जो जनगणना हुई थी, उसकी सूची में उनका नाम था। 30 हजार रुपये तक के इलाज के लिए कार्ड भी बने थे। करीब दो साल तक कार्ड से इलाज हुआ, लेकिन आयुष्मान भारत योजना में उनका नाम गायब कर दिया गया, जबकि उनके पास नाममात्र की जमीन है। एक दुकान से परिवार का खर्च चलता है। एक बेटा और तीन बेटियां हैं। जैसे-तैसे गुजारा कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने उनके साथ अन्याय किया है।