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Budaun News: हेल्थ और वेलनेस सेंटर की खुद की ‘हेल्थ’ खराब...कहीं सीएचओ नहीं तो कहीं स्टाफ
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बदायूं। जिले में स्वास्थ्य महकमे के रिकॉर्ड में 234 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर हैं। ग्रामीण इलाकों में मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के लिए ये सेंटर बनाए गए थे, पर इनकी खुद की हालत खराब है। खास बात यह है कि जर्जर भवनों पर पेंटिंग कर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का रूप तो दे दिया गया, लेकिन यहां न सीएचओ है और न ही स्टाफ। ऐसे में ये सेंटर और ज्यादा जर्जर अवस्था में आ गए हैं।
ग्रामीणों को उनके गांव या फिर समीपवर्ती गांव में ही 30 मिनट में इलाज दिलाने के लिए उप स्वास्थ्य केंद्रों पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाए गए थे। मरीजों को सामान्य बीमारियों का इलाज मिलने के साथ ही गंभीर रोगों में बेहतर परामर्श दिए जाने के लिए ही सीएचओ की तैनाती की गई थी।
इस सेंटर पर मलेरिया, हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, बलगम आदि की जांच की जाती है। सेंटरों पर आने वाले मरीजों को परामर्श देने के साथ ही प्रारंभिक इलाज के लिए वहां सीएचओ (सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी) की नियुक्ति की गई। साथ ही संबंधित प्रसव केंद्र पर तैनात एएनएम की भी तैनाती की गई।
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जिले में 234 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर हैं। इन सेंटरों पर रिकॉर्ड में 210 सीएचओ की तैनाती हैं। इसके अलावा 24 सेंटर ऐसे हैं जहां अभी तक सीएचओ की तैनाती नहीं हो पाई है। जहां रिकॉर्ड में तैनाती है वहां भी कोई नहीं पहुंचता। इससे ग्रामीणों को इस सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस्लामनगर, कुंवरगांव, सहसवान आदि कई जगहों पर इन सेंटरों के भवन अब और ज्यादा जर्जर हो गए हैं।
यह है सीएचओ की भूमिका
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर आने वाले गंभीर मरीजों की समस्याओं को सुनकर सर्जन या फिर फिजीशियन से बीमारी के बारे में ऑनलाइन चर्चा करेंगे। इसके बाद डॉक्टर ग्रुप पर ही संबंधित बीमारियों की दवाएं लिखकर भेजेंगे जो मरीजों को दी जाएंगी। गंभीर मरीज होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किए जाने की व्यवस्था है।
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर लगभग सभी सीएचओ की तैनाती हो चुकी है। 24 सेंटरों पर भी सीएचओ की डिमांड की गई है। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर जहां भी अव्यवस्थाएं हैं उनको दूर किया जा रहा है। नए भवन बनाए जा रहे हैं ताकि उनको वहां शिफ्ट किया जा सके। - डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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ग्रामीणों को उनके गांव या फिर समीपवर्ती गांव में ही 30 मिनट में इलाज दिलाने के लिए उप स्वास्थ्य केंद्रों पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाए गए थे। मरीजों को सामान्य बीमारियों का इलाज मिलने के साथ ही गंभीर रोगों में बेहतर परामर्श दिए जाने के लिए ही सीएचओ की तैनाती की गई थी।
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इस सेंटर पर मलेरिया, हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, बलगम आदि की जांच की जाती है। सेंटरों पर आने वाले मरीजों को परामर्श देने के साथ ही प्रारंभिक इलाज के लिए वहां सीएचओ (सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी) की नियुक्ति की गई। साथ ही संबंधित प्रसव केंद्र पर तैनात एएनएम की भी तैनाती की गई।
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जिले में 234 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर हैं। इन सेंटरों पर रिकॉर्ड में 210 सीएचओ की तैनाती हैं। इसके अलावा 24 सेंटर ऐसे हैं जहां अभी तक सीएचओ की तैनाती नहीं हो पाई है। जहां रिकॉर्ड में तैनाती है वहां भी कोई नहीं पहुंचता। इससे ग्रामीणों को इस सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस्लामनगर, कुंवरगांव, सहसवान आदि कई जगहों पर इन सेंटरों के भवन अब और ज्यादा जर्जर हो गए हैं।
यह है सीएचओ की भूमिका
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर आने वाले गंभीर मरीजों की समस्याओं को सुनकर सर्जन या फिर फिजीशियन से बीमारी के बारे में ऑनलाइन चर्चा करेंगे। इसके बाद डॉक्टर ग्रुप पर ही संबंधित बीमारियों की दवाएं लिखकर भेजेंगे जो मरीजों को दी जाएंगी। गंभीर मरीज होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किए जाने की व्यवस्था है।
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर लगभग सभी सीएचओ की तैनाती हो चुकी है। 24 सेंटरों पर भी सीएचओ की डिमांड की गई है। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर जहां भी अव्यवस्थाएं हैं उनको दूर किया जा रहा है। नए भवन बनाए जा रहे हैं ताकि उनको वहां शिफ्ट किया जा सके। - डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ