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Budaun News: गोकुल पुरस्कार पाने वाले जिले के पहले दुग्ध उत्पादक हैं हरविलास
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गोकुल पुरस्कार पाने वाले हरविलास।
उझानी। लखनऊ में गोकुल पुरस्कार योजना के तहत द्वितीय पुरस्कार पाने वाले उझानी के कुंआडांडा निवासी हरविलास रोजाना करीब डेढ़ से दो सौ लीटर दूध समिति को देते हैं। रिकॉर्ड दुग्ध उत्पादन करके उझानी ब्लॉक के गांव कुंआडांडा निवासी हरविलास ने प्रदेश में दूसरा स्थान पाया है। वह दुग्ध उत्पादन समिति से सात सालों से जुड़े हुए हैं। शुक्रवार को उन्हें लखनऊ में प्रदेश के पशु धन एवं दुग्ध विकास मंत्री ने गोकुल पुरस्कार योजना के तहत द्वितीय पुरस्कार के रूप में डेढ़ लाख रुपये की धनराशि प्रदान कर सम्मानित किया।
हरविलास जिले के पहले दुग्ध उत्पादक हैं, जिन्हें यह पुरस्कार मिला है। उन्होंने बताया कि वह मिनी कामधेनु डेयरी संचालित करते हैं। साथ ही वह दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के सदस्य भी है। इस संबंध में जिला दुग्ध विकास अधिकारी ने बताया कि हरविलास हर मौसम में अच्छी गुणवत्ता का दूध समिति पर पहुंचाते हैं।
हरविलास सिंह ने बताया कि उनकी डेयरी में केवल भैंसें हैं। इनमें अधिकांश सामान्य प्रजाति की ही हैं। उनसे ही ज्यादा दूध लिया जा रहा है। इसके लिए परिवार के सदस्यों की तरह उनका ख्याल रखना पड़ता है। सुबह उन्हें पशु आहार दिया जाता है। इसके अलावा, भूसा, हरा चारा, खल और चोकर आदि खिलाते हैं। डॉक्टरों के परामर्श से एक निश्चित अंतराल पर कैल्शियम की टेबलेट और हर तीन माह में पेट के कीड़ों की दवाई दी जाती है। इस समय 15 गाय व भैंस उनके पास हैं। उनको यह पुरस्कार तीसरी बार प्रदान किया गया है।
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हरविलास जिले के पहले दुग्ध उत्पादक हैं, जिन्हें यह पुरस्कार मिला है। उन्होंने बताया कि वह मिनी कामधेनु डेयरी संचालित करते हैं। साथ ही वह दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के सदस्य भी है। इस संबंध में जिला दुग्ध विकास अधिकारी ने बताया कि हरविलास हर मौसम में अच्छी गुणवत्ता का दूध समिति पर पहुंचाते हैं।
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हरविलास सिंह ने बताया कि उनकी डेयरी में केवल भैंसें हैं। इनमें अधिकांश सामान्य प्रजाति की ही हैं। उनसे ही ज्यादा दूध लिया जा रहा है। इसके लिए परिवार के सदस्यों की तरह उनका ख्याल रखना पड़ता है। सुबह उन्हें पशु आहार दिया जाता है। इसके अलावा, भूसा, हरा चारा, खल और चोकर आदि खिलाते हैं। डॉक्टरों के परामर्श से एक निश्चित अंतराल पर कैल्शियम की टेबलेट और हर तीन माह में पेट के कीड़ों की दवाई दी जाती है। इस समय 15 गाय व भैंस उनके पास हैं। उनको यह पुरस्कार तीसरी बार प्रदान किया गया है।
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