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Budaun News: हनुमान ने प्रभु श्रीराम की सुग्रीव से कराई मित्रता

Tue, 12 Nov 2024 12:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 12 Nov 2024 12:53 AM IST
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Hanuman made Lord Shri Ram friends with SugreevaHanuman made Lord Shri Ram friends with Sugreeva
दबतोरी के मुसिया नगला में रामलीला में राम सुग्रीव की मित्रता का मंचन करते कलाकार। संवाद
बदायूं। अलापुर समेत, रहेड़िया और दबतोरी के गांव मुसिया नगला में रामलीला का मंचन जारी है। जैसे-जैसे रामलीला समाप्ति की ओर है दर्शकों की भीड़ बढ़ रही है। रामलीला के मंच पर सोमवार रात को सुग्रीव मैत्री, बाली वध और हनुमान-रावण संवाद का मंचन किया गया। मंचन देख दर्शक भाव-विभोर हो गए।
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मंचन के शुभारंभ में शबरी-राम दर्शन के माध्यम से भगवान की असहायों के प्रति कृपा दृष्टि की प्रस्तुति दी गई, जबकि सुग्रीव और राम की मित्रता कराने में हनुमान की भूमिका सराही गई। इस प्रसंग के माध्यम से जनता को सीधे प्रेरणा दी गई कि परस्पर मिलन से दोनों के काम सिद्ध हो जाते हैं।
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बाली ने अपने छोटे भाई की पत्नी को रखकर दुष्टता का परिचय दिया। इसलिए भगवान राम ने उसे छिपकर मारा। सुग्रीव ने भी राम के उपकार का बदला चुकाने के लिए अपनी संपूर्ण सेना को सीता की खोज में लगा दिया गया। हनुमान ने जब लंका जाकर माता सीता को राम की मुद्रिका दी तो वह आश्चर्य चकित हो गईं और प्रमाण स्वरूप अपनी चूड़ामणि हनुमान को देकर विदा किया। इन सभी दृश्यों को मनोहारी बनाने में हनुमान के रूप में कलाकारों की भूमिका सराहनीय रही।
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राम का जन्म होते ही अयोध्या में बजी बधाई
उसावां। श्रीरामलीला समिति के तत्वाधान नगर की सब्जी मंडी में चल रही रामलीला के दूसरे दिन राम जन्मोत्सव बधाई गीत एवं रावण उत्पति व रावण उत्पात का मंचन किया गया। रामजन्म होते ही अयोध्या में बधाइयां बजने लगीं। श्रीराम के जयकारे से वातावरण राममय हो गया।

लीला के आरंभ में दिखाया गया कि ऋषियों, मुनियों पर असुर अत्याचार करते हैं। रावण अपने दरबार में बैठा है। तभी असुर घड़े में रक्त लेकर पहुंचते हैं। आकाशवाणी होती है कि ‘हे रावण यही रक्त तुम्हारे वंश के विनाश का कारण बनेगा। रावण ने घबराकर घड़े को जनकपुर में गड़वा दिया। कुछ समय पश्चात जनकपुर में अकाल पड़ा।

निवारण के लिए जनकपुर के राजा जनक और रानी खेत में हल चला रहे थे। हल घड़े से टकराकर रुक गया और घड़े से सीता के रूप में कन्या उत्पन्न हुई। दूसरी तरफ राजा दशरथ अपने वंश को जीवित रखने के लिए चिंतित होना स्वाभाविक है। चिंतित मुद्रा में राजा ऋषि मुनियों के शरण में आते हैं। कुछ समय पश्चात राम, लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुध्न का जन्म होता है।


जन्म के पश्चात सभी भाइयों का नामकरण किया गया। कलाकारों के इस मंचन ने समा बांध दिया। इस लीला को देखने के लिए दर्शकों और श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रामलीला पांडाल में महिलाओं, युवतियों एवं बच्चों का उत्साह देखते बनता था। इस रामलीला के पात्रों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में लगे रहे। संवाद

दबतोरी के मुसिया नगला में रामलीला में राम सुग्रीव की मित्रता का मंचन करते कलाकार। संवाद

दबतोरी के मुसिया नगला में रामलीला में राम सुग्रीव की मित्रता का मंचन करते कलाकार। संवाद

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