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सरकारी अस्पताल खामियों का अंबार

Mon, 06 Jun 2016 08:55 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Mon, 06 Jun 2016 08:55 PM IST
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government hospital The deluge of flaws
hospital
स्थानीय सरकारी अस्पताल खामियों और बुराइयों को अंबार नजर आने लगा है। पीएचसी के मुख्य द्वारों पर नालों का गंदा पानी काफी समय से जमा हुआ है। यहां तक नाले के पानी का निकास न होने के कारण नाले का सारा गंदा पानी अस्पताल परिसर में घुस जाता है। जो बदबू और बीमारी दे रहा हैं। 
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काफी समय से पीएचसी को सीएचसी बनाने की मुहिम भी शुरू हुई लेकिन बह आज तक पूरी ना हो सकी, जबकि सीएचसी में करोड़ों रुपये सुविधा के नाम पर लग चुका है। विभागीय अनदेखी इसी अनदेखी की वजह से सीएचसी मे लगी खिड़कियों के शीशे भी टूटकर बिखर चुके हैं।
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अस्पताल परिसर के ठीक पीछे प्रसव वार्ड हैं, जिसमें आज तक एक नल भी नहीं है। यहां आने जाने वाली प्रसूताओं के तीमारदारों को इस भरी दोपहरी में पीने लायक पानी भी नसीब नहीं होता। मरीज को पीने के पानी के लिए अस्पताल परिसर से बाहर जाना पड़ता है। सूत्रों पर जाएं तो आशाओं से उनके एकाउंट में रकम डालने से पहले वसूली की रस्म अदायगी हो जाती है।  एक आशा ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि यदि उसकी जानकारी डॉक्टर को दी जाती है तो वेेतन एकांट मे ट्रांसफर नहीं हो पाता है। आशाओं को चुप ही रहना पड़ता है। कुछ लोगों का मानना है कि सरकारी अस्पताल खुद एक प्राइवेट अस्पताल बनकर रह गया है। सुविधाएं नहीं है लेकिन बाहर से दवाएं लिखी जाती हैं। मरीजों से व्यवहार सही नहीं रखा जाता है। विभाग के साथ जनप्रतिनिधि भी इस ओर ध्यान दें तो क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं।
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