फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Girl students beat up Shohde for teasing

Budaun News: धूप न निकलने से घट रहा न्यूरोट्रांसमीटर का उत्सर्जन, बढ़ रहे अवसाद रोगी

Thu, 25 Jan 2024 02:22 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jan 2024 02:22 AM IST
विज्ञापन
Girl students beat up Shohde for teasing
बदायूं। एक हफ्ते से धूप न निकलने का असर अवसाद के रूप में सामने आने लगा है। दरअसल, धूप न निकलने से न्यूरोट्रांसमीटर का उत्सर्जन घट गया है। जिला अस्पताल स्थित मनकक्ष में आने वाले मरीजों का आंकड़ा यही कह रहा है। इस समय लोग अवसाद का ज्यादा शिकार हो रहे हैं। मनकक्ष में आने वाले कुल मरीजों में 10 प्रतिशत अवसादग्रस्त हैं। डॉक्टर और काउंसलर उनका इलाज विभिन्न थैरेपी से कर रहे हैं।
विज्ञापन

जिला चिकित्सालय के मनकक्ष में सामान्यत: 50 से 60 मरीजों की ओपीडी प्रतिदिन होती है। इस समय जो मरीज यहां आ रहे हैं, उनमें से ज्यादातर किसी न किसी रूप में अवसादग्रस्त हैं। अन्य मरीजोंं में माइग्रेन, एंग्जाइटी, अनिद्रा या फिर मिर्गी के हैं। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट सर्वेश कुमारी के अनुसार, सर्दी में सूर्य के प्रकाश का समय घट जाता है और धूप कम निकलती है।
विज्ञापन

इससे मस्तिष्क में सेरेटोनिन और डोपामाइन न्यूरोट्रांसमीटर का स्राव प्रभावित होता है। यह न्यूरोट्रांसमीटर मूड लाइटनिंग हॉर्मोन की तरह काम करते हैं और सीधे तौर पर मूड को प्रभावित करते हैं। ये न्यूरोट्रांसमीटर धूप में ज्यादा रिलीज होते हैं। इस समय धूप न निकलने के कारण इनका उत्सर्जन कम हो रहा है। इससे व्यक्ति का मूड ज्यादा अपसेट हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लाइट थैरेपी से किया जाता है इलाज
- क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट सर्वेश कुमारी के अनुसार, इस समय जो मरीज ज्यादा आ रहे हैं, वे बीमार नहीं लगते, लेकिन बात करने पर पता चलता है कि वे अवसाद ग्रस्त हैं। ऐसे मरीजों का दवाओं के साथ लाइट थैरेपी से इलाज किया जाता है। इस थैरेपी में मरीजों को ज्यादा वॉट के बल्ब की रोशनी में बैठाया जाता है। कई मरीज डिसोसिएटिव डिसऑर्डर के भी शिकार होते हैं। इन्हें आमतौर पर लोग मिर्गी का मरीज समझ लेते हैं, लेकिन वास्तव में वह इस डिसऑर्डर का शिकार होते हैं।


अवसाद को ऐसे पहचानें
- हमेशा उदासी और आत्मविश्वास में कमी।
- किसी काम में मन नहीं लगना और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी।
- अकेले में समय बिताना पसंद करना।
- स्वभाव हमेशा चिड़चिड़ा रहना। ज्यादा बोलना पसंद न होना।
- गुस्सा ज्यादा आना। छोटी-छोटी बात पर आक्रामक प्रतिक्रिया देना।
- कोई समस्या आने पर बहुत जल्दी हताश हो जाना।

ऐसे बचें

- आहार पौष्टिक हो। बासी खाने से बचें।
- अधिक चीनी एवं अधिक नमक का सेवन न करें।
- उदासी या खुशी होने पर धूम्रपान, मद्यपान से बचें।

- परिवार और दोस्तों के साथ अधिक समय बिताएं।
- कोई बात मन में न रखें। समस्या को अपनों से शेयर करें।
- योग और व्यायाम से हार्मोन संतुलित रहते हैं। इन्हें दिनचर्या में शामिल करें।
- ध्यान या मेडिटेशन करेंं। संगीत का शौक हो जरूर सुनें।
- स्वयं को सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रखने का प्रयास करें।

अस्पताल में मनोरोगियों के लिए 10 बेड आरक्षित
- मनकक्ष में आने वाले रोगियों का इलाज सामान्यत: ओपीडी में ही किया जाता है लेकिन कुछ मरीजों की स्थिति ऐसी भी होती है, जिन्हें भर्ती करना पड़ता है। ऐसे मरीजों के लिए जनरल वार्ड में 10 बेड आरक्षित हैं। इनमें पांच बेड महिलाओं के लिए हैं। हालांकि मरीज न होने पर उन्हें सामान्य मरीजों के लिए उपयोग किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed