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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   From Holashtak 24th to 3rd March, there will be no band-baja.

Budaun News: होलाष्टक 24 से, 3 मार्च तक नहीं बजेंगे बैंड-बाजे

Sun, 22 Feb 2026 12:31 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 22 Feb 2026 12:31 AM IST
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From Holashtak 24th to 3rd March, there will be no band-baja.
पंडित गिरीश शर्मा।
बदायूं। इस बार होलाष्टक 24 फरवरी दिन मंगलवार से प्रारंभ हो रहे हैं, जो तीन मार्च तक रहेंगे। पंचांग के अनुसार, यह समय फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक होगा। इसलिए आठ दिनों तक विवाह आदि सभी शुभ कार्य निषेध रहेंगे।
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पंडित गिरीश शर्मा के अनुसार, होलाष्टक को लेकर हैं, कई पौराणिक कथाएं हैं। उन्होंने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे प्रह्लाद को नाना प्रकार से शारीरिक और मानसिक यातनाएं दीं। होलाष्टक को तभी से अशुभ समय माना जाता है।फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन वाले दिन जब आग में होलिका जलकर मर गई और भक्त प्रहलाद बच गए। तब समस्त जनता और देवताओं में खुशियां छा गईं और मांगलिक कार्य शुरू हो गए।
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दूसरी कथा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने क्रोध में आकर कामदेव को तीसरे नेत्र से भस्म कर दिया। तब सारी सृष्टि में भय, दुख, अशांति और व्याकुलता उत्पन्न हो गई। जन समुदाय ने दुखित होकर शुभ और मांगलिक कार्य प्रारंभ करना बंद कर दिए। यह तिथि फाल्गुन मास की अष्टमी तिथि थी। कामदेव की पत्नी रति ने भगवान शिव की नाना प्रकार से प्रार्थना की। तब भगवान शिव ने फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन प्रकट होकर रति को वरदान दिया कि अगले जन्म, द्वापर में उन्हें उनके पति कामदेव पुन: प्राप्त होंगे। इसलिए ये आठ दिन अशुभ माने गए।
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तीसरी कथा के हवाले से उन्होंने बताया कि फाल्गुन मास हिंदी वर्ष का अंतिम मास होता है। कालांतर में इसी फाल्गुन शुक्लपक्ष में प्रलय होती रही है। इसके बाद चैत्र मास शुक्लपक्ष में नया वर्ष / नव संवत शुरू होता है। देवताओं को प्रलय को लेकर हर फाल्गुन अष्टमी को देवता दुखी और चिंताग्रस्त हो गए। भगवान नारायण ने फाल्गुन पूर्णिमा को सभी देवताओं को आशीष दिया और बताया कि यह प्रलय क्रम यूं ही चलती रहती है। आप लोग निराश न हों फिर देवतागण चिंतामुक्त और बलवान हो गए।



होलाष्टक की अवधि में वर्जित कार्य
शास्त्रों के अनुसार विवाह कार्य, नामकरण संस्कार, मुंडन संस्कार, विद्या आरंभ, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, यज्ञोपवीत संस्कार, नवीन व्यापार आदि कार्य वर्जित हैं।
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