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जानलेवा हमले में दो भाइयों समेत चार को सात- सात साल की सजा
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बदायूं। करीब आठ साल पहले हुए जानलेवा हमले के मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राजकुमार सिंह ने दो सगे भाइयों समेत चार लोगों को सात-सात साल की सजा सुनाई है। उन पर सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
जानलेवा हमले का ये मामला इस्लामनगर थाना क्षेत्र के ग्राम बझांगी का है। गांव निवासी महेश पुत्र भगवान सिंह ने 27 जनवरी 2012 को थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने भाई मानकचंद्र और गांव वालों के साथ अपनी फसल बेचने तांगे से जा रहे थे। तभी पुरानी रंजिश के चलते रास्ते में उनके गांव के बादशाह सिंह, उसका भाई कुंवरपाल पुत्र परमेश्वरी, सत्यवीर पुत्र रमेश यादव और जसपाल पुत्र सुखराम बाइक से आए। उनका तांगा रोक कर जान से मारने की नीयत से फायर कर दिया। फायर लगने से उनका भाई मानकचंद्र गंभीर रूप से घायल हो गया। इस पर महेश ने बादशाह, कुंवरपाल, सत्यवीर और जसपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राजकुमार सिंह ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी मुकेश यादव और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने बादशाह, कुंवरपाल, सत्यवीर और जसपाल को मुजरिम ठहराते हुए सभी को सात-सात साल की सजा सुनाई है और चारों मुजरिमों पर सात-सात हजार का जुर्माना भी लगाया है।
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जानलेवा हमले का ये मामला इस्लामनगर थाना क्षेत्र के ग्राम बझांगी का है। गांव निवासी महेश पुत्र भगवान सिंह ने 27 जनवरी 2012 को थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने भाई मानकचंद्र और गांव वालों के साथ अपनी फसल बेचने तांगे से जा रहे थे। तभी पुरानी रंजिश के चलते रास्ते में उनके गांव के बादशाह सिंह, उसका भाई कुंवरपाल पुत्र परमेश्वरी, सत्यवीर पुत्र रमेश यादव और जसपाल पुत्र सुखराम बाइक से आए। उनका तांगा रोक कर जान से मारने की नीयत से फायर कर दिया। फायर लगने से उनका भाई मानकचंद्र गंभीर रूप से घायल हो गया। इस पर महेश ने बादशाह, कुंवरपाल, सत्यवीर और जसपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राजकुमार सिंह ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी मुकेश यादव और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने बादशाह, कुंवरपाल, सत्यवीर और जसपाल को मुजरिम ठहराते हुए सभी को सात-सात साल की सजा सुनाई है और चारों मुजरिमों पर सात-सात हजार का जुर्माना भी लगाया है।
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