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Budaun News: दो साल में दो गेट के पिलर ही बना पाया वन विभाग
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कछला के पास निर्माणाधीन बायोडायवर्सिटी पार्क। संवाद
उझानी। बरेली-मथुरा हाईवे के किनारे दहेमू गांव के पास निर्माणाधीन बायोडायवर्सिटी पार्क (जैव विविधता) का निर्माण कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा। दो साल में अब तक पार्क के दो गेट के पिलर ही बन पाए हैं। ऐसे में वित्तीय वर्ष 2025-26 तक पार्क के पूरी तरह अस्तित्व में आ जाने के आसार नजर नहीं आ रहे। यहां बता दें कि 2022-23 में विभाग को पहली किस्त की धनराशि मिल गई थी, लेकिन तब काम शुरू नहीं हो सका था।
जलशक्ति मंत्रालय के अधीन यह परियोजना बनी थी। परियोजना के तहत 2022-23 में करीब 50 हेक्टेयर रकबे में वन विभाग ने दहेमू गांव के पास कटरी की भूमि पर बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने का निर्णय लिया था। इसके लिए शासन ने 6.64 करोड़ की धनराशि भी स्वीकृत की थी।2022 में इसके निर्माण के लिए वन विभाग को 1.52 करोड़ रुपये की धनराशि दे दी गई है। इस धनराशि से काम शुरू होना था, लेकिन कुछ कमियों के चलते काम 2022-2023 में काम शुरू नहीं हो सका।
साल 2023-24 में काम शुरू हुआ। पहले चरण में तारकशी कराई गई। इसके बाद वन विभाग अब तक पार्क के दो गेट के पिलर ही बना पाया है। साथ ही परिसर में कुछ छोटे काम भी हुए, लेकिन अब तक निर्माण 30 फीसदी के आसपास ही बताया जा रहा है। अगर यही हाल रहा तो पार्क का काम पूरा कराने में अभी करीब तीन साल और लग सकते हैं। वन विभाग के अफसर भी इस हकीकत से वाकिफ हैं। अफसरों ने निर्माण कार्य को रफ्तार प्रदान करने के लिए कवायद भी शुरू कर दी है।
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पार्क में प्रस्तावित हैं अतिथि और प्रकृति संरक्षण जोन
दहेमू के पास निर्माणाधीन बायोडायवर्सिटी पार्क को प्राकृतिक माहौल के अनुरूप दो जोन में बांटा गया है। अतिथि जोन में पार्किंग स्थल के अलावा घूमने-फिरने और पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था होगी तो प्रकृति संरक्षण जोन गंगा के मैदानी इलाकों में पाई जाने वाली वनस्पति और जीव-जंतुओं के लिए आरक्षित रहेगा। अतिथि जोन कछला गंगाघाट पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षित करेगा। गंगाघाट पर राजस्थान और मध्यप्रदेश के अलावा बृज क्षेत्र के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं।
विलुप्त हो रहीं प्रजातियों को मिलेगा संरक्षण
जिले में गंगा करीब सवा सौ किलोमीटर के दायरे से होकर गुजरती है। तटवर्ती इलाके में कई प्रजाति के जीव-जंतु पाए जाते हैं। खासकर सहसवान इलाके में काले हिरन (ब्लैक बक) भी देखे गए हैं। गंगा में डॉल्फिन नजर आ चुकी है। प्रवासी पक्षियों का भी बसेरा भी देखने को मिल चुका है। वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की टीम ने जनवरी- 2021 में नरौरा से कछला होते हुए उसहैत के अटैना तक गंगा में सर्वे किया था। तब डॉल्फिन दिखाई देने की बात सामने आई थी।
कटरी में बायोडायवर्सिटी पार्क का निर्माण कार्य चल रहा है। उसे तय समय में पूरा कराने की कोशिश की जा रही है। पार्क बन जाने के बाद कछला के आसपास इलाके में पर्यटक भी आकर्षित होंगे। -प्रदीप कुमार वर्मा, डीएफओ
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जलशक्ति मंत्रालय के अधीन यह परियोजना बनी थी। परियोजना के तहत 2022-23 में करीब 50 हेक्टेयर रकबे में वन विभाग ने दहेमू गांव के पास कटरी की भूमि पर बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने का निर्णय लिया था। इसके लिए शासन ने 6.64 करोड़ की धनराशि भी स्वीकृत की थी।2022 में इसके निर्माण के लिए वन विभाग को 1.52 करोड़ रुपये की धनराशि दे दी गई है। इस धनराशि से काम शुरू होना था, लेकिन कुछ कमियों के चलते काम 2022-2023 में काम शुरू नहीं हो सका।
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साल 2023-24 में काम शुरू हुआ। पहले चरण में तारकशी कराई गई। इसके बाद वन विभाग अब तक पार्क के दो गेट के पिलर ही बना पाया है। साथ ही परिसर में कुछ छोटे काम भी हुए, लेकिन अब तक निर्माण 30 फीसदी के आसपास ही बताया जा रहा है। अगर यही हाल रहा तो पार्क का काम पूरा कराने में अभी करीब तीन साल और लग सकते हैं। वन विभाग के अफसर भी इस हकीकत से वाकिफ हैं। अफसरों ने निर्माण कार्य को रफ्तार प्रदान करने के लिए कवायद भी शुरू कर दी है।
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पार्क में प्रस्तावित हैं अतिथि और प्रकृति संरक्षण जोन
दहेमू के पास निर्माणाधीन बायोडायवर्सिटी पार्क को प्राकृतिक माहौल के अनुरूप दो जोन में बांटा गया है। अतिथि जोन में पार्किंग स्थल के अलावा घूमने-फिरने और पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था होगी तो प्रकृति संरक्षण जोन गंगा के मैदानी इलाकों में पाई जाने वाली वनस्पति और जीव-जंतुओं के लिए आरक्षित रहेगा। अतिथि जोन कछला गंगाघाट पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षित करेगा। गंगाघाट पर राजस्थान और मध्यप्रदेश के अलावा बृज क्षेत्र के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं।
विलुप्त हो रहीं प्रजातियों को मिलेगा संरक्षण
जिले में गंगा करीब सवा सौ किलोमीटर के दायरे से होकर गुजरती है। तटवर्ती इलाके में कई प्रजाति के जीव-जंतु पाए जाते हैं। खासकर सहसवान इलाके में काले हिरन (ब्लैक बक) भी देखे गए हैं। गंगा में डॉल्फिन नजर आ चुकी है। प्रवासी पक्षियों का भी बसेरा भी देखने को मिल चुका है। वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की टीम ने जनवरी- 2021 में नरौरा से कछला होते हुए उसहैत के अटैना तक गंगा में सर्वे किया था। तब डॉल्फिन दिखाई देने की बात सामने आई थी।
कटरी में बायोडायवर्सिटी पार्क का निर्माण कार्य चल रहा है। उसे तय समय में पूरा कराने की कोशिश की जा रही है। पार्क बन जाने के बाद कछला के आसपास इलाके में पर्यटक भी आकर्षित होंगे। -प्रदीप कुमार वर्मा, डीएफओ