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गंगा खतरे के निशान से 75 सेमी ऊपर
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सहसवान के वीर सहाय नगला में घुसा बाढ़ का पानी। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। गंगा ने अब रौद्र रूप ले लिया है। इस मौसम में पहली बार मंगलवार को गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से रिकॉर्ड 75 सेमी ऊपर पहुंच गया। सहसवान और उसहैत के दस से ज्यादा तटवर्ती गांवों का बाढ़ के कारण सड़क संपर्क टूट गया है। कई गांवों में चार फुट तक बाढ़ का पानी भरा हुआ है। प्रशासन की ओर से गांवों को खाली कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
मंगलवार को गंगा में गुन्नौर से 154105, बिजनौर से 50727 और हरिद्वार से 66059 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। मंगलवार शाम कछला में मीटर गेज पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर 162.75 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 162 मीटर पर है। सोमवार को भी जलस्तर खतरे के निशान से 64 सेमी ऊपर था। गंगा की धारा कटान करती हुई दातागंज तहसील के तटवर्ती अहमदनगर बछौरा, असमया रफतपुर के नजदीक पहुंच गई है। दातागंज तहसील के ही जटा, रैपुरा, कमलैयापुर बाढ़ से घिर गए हैं। गंगा के उस पार के गांवों का संपर्क टूट गया है।
इधर, सहसवान तहसील क्षेत्र के तटवर्ती इलाकों में भी हालात बेकाबू हैं। यहां वीर सहाय नगला, बसौलिया, तौफी नगला, परशुराम नगला, खागी नगला गांवों में तीन से चार फुट तक बाढ़ का पानी भरा हुआ है। तौफी नगला में महावा पर बने पुल की दोनों ओर एप्रोच रोड डूबने के कारण आवागमन बंद हो गया है। उत्तराखंड में हो रही भारी बारिश के कारण फिलहाल गंगा के जलस्तर में कमी आने की उम्मीद नहीं है।
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तटबंधों पर दबाव बढ़ने से खतरा गहराया
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 75 सेमी तक ऊपर पहुंचने के कारण उसहैत, उसावां, गंगा-महावा तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है। इन तटबंधों को पहले ही संवेदनशील श्रेणी में रखा गया था। जलस्तर में 75 सेमी तक का इजाफा होने के कारण कछला, अटैना घाट पानी में डूब गए हैं।
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इस सीजन में पहली बार गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर 162.75 मीटर तक पहुंचा है। ऐसा उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण हो रहा है। हालात संवेदनशील मगर नियंत्रण में हैं। तटबंधों पर खतरा बना हुआ है। तटवर्ती कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। प्रशासन और बाढ़ खंड की ओर से यहां लगातार राहत और बचाव कार्य किए जा रहे हैं।
-नेशपाल सिंह, सहायक अभियंता बाढ़ खंड
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मंगलवार को गंगा में गुन्नौर से 154105, बिजनौर से 50727 और हरिद्वार से 66059 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। मंगलवार शाम कछला में मीटर गेज पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर 162.75 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 162 मीटर पर है। सोमवार को भी जलस्तर खतरे के निशान से 64 सेमी ऊपर था। गंगा की धारा कटान करती हुई दातागंज तहसील के तटवर्ती अहमदनगर बछौरा, असमया रफतपुर के नजदीक पहुंच गई है। दातागंज तहसील के ही जटा, रैपुरा, कमलैयापुर बाढ़ से घिर गए हैं। गंगा के उस पार के गांवों का संपर्क टूट गया है।
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इधर, सहसवान तहसील क्षेत्र के तटवर्ती इलाकों में भी हालात बेकाबू हैं। यहां वीर सहाय नगला, बसौलिया, तौफी नगला, परशुराम नगला, खागी नगला गांवों में तीन से चार फुट तक बाढ़ का पानी भरा हुआ है। तौफी नगला में महावा पर बने पुल की दोनों ओर एप्रोच रोड डूबने के कारण आवागमन बंद हो गया है। उत्तराखंड में हो रही भारी बारिश के कारण फिलहाल गंगा के जलस्तर में कमी आने की उम्मीद नहीं है।
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तटबंधों पर दबाव बढ़ने से खतरा गहराया
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 75 सेमी तक ऊपर पहुंचने के कारण उसहैत, उसावां, गंगा-महावा तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है। इन तटबंधों को पहले ही संवेदनशील श्रेणी में रखा गया था। जलस्तर में 75 सेमी तक का इजाफा होने के कारण कछला, अटैना घाट पानी में डूब गए हैं।
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इस सीजन में पहली बार गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर 162.75 मीटर तक पहुंचा है। ऐसा उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण हो रहा है। हालात संवेदनशील मगर नियंत्रण में हैं। तटबंधों पर खतरा बना हुआ है। तटवर्ती कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। प्रशासन और बाढ़ खंड की ओर से यहां लगातार राहत और बचाव कार्य किए जा रहे हैं।
-नेशपाल सिंह, सहायक अभियंता बाढ़ खंड