{"_id":"6188194bb665a86bbb582bee","slug":"five-years-of-noutbandi-badaun-news-bly465374262","type":"story","status":"publish","title_hn":"कहां ‘गुम’ हो गया दो हजार का नोट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कहां ‘गुम’ हो गया दो हजार का नोट
विज्ञापन
दिसंबर 2016 में एसबीआई ब्रांच के बाहर लगी लाइन। फाइल फोटो
- फोटो : BADAUN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। देश में पांच साल पहले आठ नवंबर 2016 को नोट बंदी की गई थी। नोट बंदी का मकसद ब्लैक मनी को बाहर लाना था, लेकिन नोट बंदी के बाद जारी किया गया दो हजार रुपये का नोट इन पांच साल में कहीं ‘गुम’ हो गया। टैक्स कंसलटेंट, अधिवक्ता और बाजार से जुड़े विशेषज्ञों के साथ आम लोग भी इस बात को मानते हैं कि नोट बंदी के दौरान जारी किया गया दो हजार का नोट इन पांच साल में ब्लैक मनी के रूप में डंप कर लिया गया है। वहीं कैशलेस व्यवस्था भी ज्यादा प्रसारित नहीं हो सकी। यहां तक कि पांच साल में काफी कुछ बदला पर सिस्टम 20 फीसदी भी कैशलेस नहीं हो सका।
केंद्र सरकार ने नोट बंदी उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से एन पहले की थी। पुराने पांच सौ और एक हजार के नोटों को बंद किए जाने के साथ सरकार ने सीमा भी तय की थी कि एक दिन में बैंक या अन्य सरकारी वित्तीय संस्थानों से कितने रुपयों को बदला जा सकता है। साथ ही एक दिन में अधिकतम दो हजार रुपये निकासी की सीमा भी तय की गई थी। उन दिनों बैंकों के बाहर लंबी कतारें लगती थीं। नोट बंदी को लेकर काफी हल्ला भी हुआ। विपक्षी दलों ने भी अचानक से नोट बंदी किए जाने को गलत बताया। कई ऐसे मामले भी सामने आए कि नोट बंदी के कारण शादी-विवाह तक को टालना पड़ा।
नोटबंदी के एन बाद फरवरी 2017 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुआ और लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन हुआ। उसके बाद लोगों को लगा कि केंद्र सरकार ने नोट बंदी संबंधी सही निर्णय लिया था। अब नोट बंदी को पांच साल हो चुके हैं। कुछ ही महीनों में फिर से उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी आने वाले हैं। इस दौरान दो हजार का नया नोट बाजार के साथ एटीएम से भी बाहर हो जाने को लेकर कई चर्चाएं होने लगी हैं। काफी लोगों का कहना है कि दो हजार का नया नोट नेताओं और बड़े पूंजीपतियों ने दबा लिया है। इसी कारण अब दो हजार का नोट चलन में कम दिखता है।
विज्ञापन
-
दो हजार के नोट में चिप भी बनी थी चर्चा
आठ नवंबर 2016 में नोट बंदी के करीब एक महीने के बाद बाजार में दो हजार रुपये का नया नोट आया था। उस समय दो हजार रुपये के नोट में सेटेलाइट चिप लगी होने की चर्चा आम थीं। सोशल मीडिया पर दो हजार रुपये के नए नोट में चिप संबंधी खबरों के साथ वीडियो तक की भरमार थी, लेकिन पांच साल के बाद दो हजार रुपये का वह नोट और उसकी चिप को लेकर कोई चर्चा करने के लिए भी तैयार नहीं है। हालांकि, काफी संख्या में ऐसे लोग हैं जो नोटबंदी के समय हुई दुश्वारियों को अब भी याद करते हैं।
-
केवल मॉल्स और पेट्रोल पंप हो सके कैशलेस
सरकार ने नोटबंदी के बहाने व्यवस्था को कैशलेस बनाने का आह्वान किया था। शुरू में कैशलेस भुगतान पर कई तरह की छूट व प्रोत्साहन भी दिया गया जो बाद में बंद हो गया। अब शॉपिंग मॉल्स, बडे़ शोरूम व पेट्रोल पंप पर ही कैशलेस व्यवस्था दिखती है। सराफ से लेकर तमाम अन्य कारोबार में ग्राहकों से नकदी ही ली जा रही है।
-
दस रुपये के नोट ने बनवा दी सोनम पर फिल्म
नोटबंदी के दौरान दस रुपये का एक नोट बाजार में आया था। वह नोट पूरे देश में चर्चा में रहा। दरअसल, इस नोट पर किसी ने लिखा था ‘सोनम गुप्ता बेवफा है’। इसी को लेकर इन पांच साल में एक फिल्म भी बन गई। इस फिल्म को बदायूं और बरेली से जोड़ा गया। बदायूं के कई इलाकों में इस फिल्म की शूटिंग हुई। पिछले महीनों ही यह फिल्म रिलीज हुई। बदायूं और बरेली में ‘मेरी सोनम बेवफा नहीं है’ नाम से बनी फिल्म को काफी पसंद किया गया।
-
नोट बंदी सरकार का सिर्फ एक शिगूफा था, काला धन तो बाहर नहीं आया, लेकिन दो हजार का नोट काले धन के रूप में जमा जरूर हो गया। याद नहीं कि आखिरी बार दो हजार का नोट कब देखा था।
- जुबैर, शिक्षक
-
नोट बंदी के बाद करीब दो साल तक तो दो हजार का नया नोट दिखता था, लेकिन धीरे-धीरे यह आम चलन से दूर हो गया। अब तो बैंक या एटीएम में भी दो हजार का नोट नहीं मिलता।
-खालिद, व्यापारी
-
दो हजार का नोट अब बाजार में नहीं दिखता। नोट बंदी के समय काला धन बाहर लाने की बातें की गईं थीं, लेकिन मुझे लगता है कि सबसे बड़ा काला धन वही दो हजार का नोट साबित हो रहा है।
-राधेश्याम, राजकीय ठेकेदार
-
यह बात सही है कि दो हजार का नोट चलन में नहीं है। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि दो हजार का नोट काले धन के रूप में छिपा लिया गया है। यह नोट किन लोगों ने छिपाया है इसके बारे में ज्यादा नहीं कहा जा सकता। दो हजार का नोट ब्लैक मनी के रूप में छिपाने वालों में पूंजीपतियों के साथ राजनेता, बड़े व्यापारी भी हो सकते हैं। पांच साल में दो हजार के नोट का इस तरह से गायब होना चौंकाने वाली बात है।
-केबी रस्तोगी एडवोकेट, टैक्स कंसलटेंस
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने नोट बंदी उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से एन पहले की थी। पुराने पांच सौ और एक हजार के नोटों को बंद किए जाने के साथ सरकार ने सीमा भी तय की थी कि एक दिन में बैंक या अन्य सरकारी वित्तीय संस्थानों से कितने रुपयों को बदला जा सकता है। साथ ही एक दिन में अधिकतम दो हजार रुपये निकासी की सीमा भी तय की गई थी। उन दिनों बैंकों के बाहर लंबी कतारें लगती थीं। नोट बंदी को लेकर काफी हल्ला भी हुआ। विपक्षी दलों ने भी अचानक से नोट बंदी किए जाने को गलत बताया। कई ऐसे मामले भी सामने आए कि नोट बंदी के कारण शादी-विवाह तक को टालना पड़ा।
विज्ञापन
नोटबंदी के एन बाद फरवरी 2017 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुआ और लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन हुआ। उसके बाद लोगों को लगा कि केंद्र सरकार ने नोट बंदी संबंधी सही निर्णय लिया था। अब नोट बंदी को पांच साल हो चुके हैं। कुछ ही महीनों में फिर से उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी आने वाले हैं। इस दौरान दो हजार का नया नोट बाजार के साथ एटीएम से भी बाहर हो जाने को लेकर कई चर्चाएं होने लगी हैं। काफी लोगों का कहना है कि दो हजार का नया नोट नेताओं और बड़े पूंजीपतियों ने दबा लिया है। इसी कारण अब दो हजार का नोट चलन में कम दिखता है।
विज्ञापन
-
दो हजार के नोट में चिप भी बनी थी चर्चा
आठ नवंबर 2016 में नोट बंदी के करीब एक महीने के बाद बाजार में दो हजार रुपये का नया नोट आया था। उस समय दो हजार रुपये के नोट में सेटेलाइट चिप लगी होने की चर्चा आम थीं। सोशल मीडिया पर दो हजार रुपये के नए नोट में चिप संबंधी खबरों के साथ वीडियो तक की भरमार थी, लेकिन पांच साल के बाद दो हजार रुपये का वह नोट और उसकी चिप को लेकर कोई चर्चा करने के लिए भी तैयार नहीं है। हालांकि, काफी संख्या में ऐसे लोग हैं जो नोटबंदी के समय हुई दुश्वारियों को अब भी याद करते हैं।
-
केवल मॉल्स और पेट्रोल पंप हो सके कैशलेस
सरकार ने नोटबंदी के बहाने व्यवस्था को कैशलेस बनाने का आह्वान किया था। शुरू में कैशलेस भुगतान पर कई तरह की छूट व प्रोत्साहन भी दिया गया जो बाद में बंद हो गया। अब शॉपिंग मॉल्स, बडे़ शोरूम व पेट्रोल पंप पर ही कैशलेस व्यवस्था दिखती है। सराफ से लेकर तमाम अन्य कारोबार में ग्राहकों से नकदी ही ली जा रही है।
-
दस रुपये के नोट ने बनवा दी सोनम पर फिल्म
नोटबंदी के दौरान दस रुपये का एक नोट बाजार में आया था। वह नोट पूरे देश में चर्चा में रहा। दरअसल, इस नोट पर किसी ने लिखा था ‘सोनम गुप्ता बेवफा है’। इसी को लेकर इन पांच साल में एक फिल्म भी बन गई। इस फिल्म को बदायूं और बरेली से जोड़ा गया। बदायूं के कई इलाकों में इस फिल्म की शूटिंग हुई। पिछले महीनों ही यह फिल्म रिलीज हुई। बदायूं और बरेली में ‘मेरी सोनम बेवफा नहीं है’ नाम से बनी फिल्म को काफी पसंद किया गया।
-
नोट बंदी सरकार का सिर्फ एक शिगूफा था, काला धन तो बाहर नहीं आया, लेकिन दो हजार का नोट काले धन के रूप में जमा जरूर हो गया। याद नहीं कि आखिरी बार दो हजार का नोट कब देखा था।
- जुबैर, शिक्षक
-
नोट बंदी के बाद करीब दो साल तक तो दो हजार का नया नोट दिखता था, लेकिन धीरे-धीरे यह आम चलन से दूर हो गया। अब तो बैंक या एटीएम में भी दो हजार का नोट नहीं मिलता।
-खालिद, व्यापारी
-
दो हजार का नोट अब बाजार में नहीं दिखता। नोट बंदी के समय काला धन बाहर लाने की बातें की गईं थीं, लेकिन मुझे लगता है कि सबसे बड़ा काला धन वही दो हजार का नोट साबित हो रहा है।
-राधेश्याम, राजकीय ठेकेदार
-
यह बात सही है कि दो हजार का नोट चलन में नहीं है। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि दो हजार का नोट काले धन के रूप में छिपा लिया गया है। यह नोट किन लोगों ने छिपाया है इसके बारे में ज्यादा नहीं कहा जा सकता। दो हजार का नोट ब्लैक मनी के रूप में छिपाने वालों में पूंजीपतियों के साथ राजनेता, बड़े व्यापारी भी हो सकते हैं। पांच साल में दो हजार के नोट का इस तरह से गायब होना चौंकाने वाली बात है।
-केबी रस्तोगी एडवोकेट, टैक्स कंसलटेंस