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Budaun News: मछलियों का भी होगा बीमा, यूपी फिश फार्मर एप से मिलेगी सुविधा
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बदायूं। अब सिर्फ खेतों की फसल नहीं, मछलियों का भी बीमा होगा। प्रदेश सरकार ने मत्स्य पालकों के लिए बीमा की शुरुआत की है। मत्स्य पालकों के लिए यूपी फिश फार्मर एप बनाया गया है। इस पर मछली का बीमा कराया जा सकता है।
बाढ़, बारिश, पानी की बीमारी या किसी तकनीकी चूक से तालाबों की मछलियां मर जाती हैं। इससे मत्स्य पालकों को भारी नुकसान होता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए अब बीमा कराया जा रहा है। मछली पालन करने वाले इसका फायदा उठा सकते हैं। इस योजना के तहत मत्स्य पालक अब अपनी मछलियों का बीमा करवा सकेंगे। प्राकृतिक आपदा या किसी अन्य कारण से मछलियों को नुकसान होने पर उन्हें मुआवजा मिलेगा। न्यू इंडिया कंपनी में इसका बीमा होगा। अब हर मत्स्य पालक अपनी इकाई को बीमा कवरेज में ला सकता है।
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जिले में 1500 टन मछली का होता है उत्पादन
-जिले में मछलियों का पालन धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। अभी जिले में सरकारी और प्राइवेट लगभग 1000 हेक्टेयर तालाब बने हुए है। जिनमें मछली का पालन किया जा रहा है। एक हेक्टेयर में 10 से 12 हजार मछलियों का रखा जाता है। एक साल में लगभग 1500 टन मछली का उत्पादन किया जा रहा है।
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बोले मत्स्य पालक
-प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तालाब बनाया और मछली का कारोबार शुरू किया। मन में हमेशा डर बना रहा है। क्योंकि यह कच्चा कारोबार है। कभी भी नुकसान हो सकता है। लेकिन अब इस योजना का फायदा मिलेगा, यह अच्छा है। -सुमित तोमर, मछली व्यापारी
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- यूपी फिश फार्मर एप बेहतर है। इससे मत्स्य पालकों को राहत मिलेगी, क्योंकि मछली को बीमित किया जाना बड़ी बात है। कई बार मत्स्य पालकों को काफी नुकसान होता था। उसकी भरपाई नहीं हो पाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
पुनीत कश्यप, सचिव, मत्स्य जीवी सहकारी समिति लिमिटेड
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वर्जन-
मत्स्य किसानों के लिए यूपी फिश फार्मर एप के माध्यम से पहले अपना पंजीकरण करना होगा। वहां पर जो रजिस्ट्रेशन आईडी नंबर मिलेगा। उसके माध्यम से कितना बड़ा तालाब है। उसमें कौन सी प्रजाति की मछली पाली जानी है। उसके हिसाब से बीमा किया जाएगा। - अमित कुमार शुक्ला, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य पालक विकास अभिकरण
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बाढ़, बारिश, पानी की बीमारी या किसी तकनीकी चूक से तालाबों की मछलियां मर जाती हैं। इससे मत्स्य पालकों को भारी नुकसान होता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए अब बीमा कराया जा रहा है। मछली पालन करने वाले इसका फायदा उठा सकते हैं। इस योजना के तहत मत्स्य पालक अब अपनी मछलियों का बीमा करवा सकेंगे। प्राकृतिक आपदा या किसी अन्य कारण से मछलियों को नुकसान होने पर उन्हें मुआवजा मिलेगा। न्यू इंडिया कंपनी में इसका बीमा होगा। अब हर मत्स्य पालक अपनी इकाई को बीमा कवरेज में ला सकता है।
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जिले में 1500 टन मछली का होता है उत्पादन
-जिले में मछलियों का पालन धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। अभी जिले में सरकारी और प्राइवेट लगभग 1000 हेक्टेयर तालाब बने हुए है। जिनमें मछली का पालन किया जा रहा है। एक हेक्टेयर में 10 से 12 हजार मछलियों का रखा जाता है। एक साल में लगभग 1500 टन मछली का उत्पादन किया जा रहा है।
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बोले मत्स्य पालक
-प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तालाब बनाया और मछली का कारोबार शुरू किया। मन में हमेशा डर बना रहा है। क्योंकि यह कच्चा कारोबार है। कभी भी नुकसान हो सकता है। लेकिन अब इस योजना का फायदा मिलेगा, यह अच्छा है। -सुमित तोमर, मछली व्यापारी
- यूपी फिश फार्मर एप बेहतर है। इससे मत्स्य पालकों को राहत मिलेगी, क्योंकि मछली को बीमित किया जाना बड़ी बात है। कई बार मत्स्य पालकों को काफी नुकसान होता था। उसकी भरपाई नहीं हो पाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
पुनीत कश्यप, सचिव, मत्स्य जीवी सहकारी समिति लिमिटेड
वर्जन-
मत्स्य किसानों के लिए यूपी फिश फार्मर एप के माध्यम से पहले अपना पंजीकरण करना होगा। वहां पर जो रजिस्ट्रेशन आईडी नंबर मिलेगा। उसके माध्यम से कितना बड़ा तालाब है। उसमें कौन सी प्रजाति की मछली पाली जानी है। उसके हिसाब से बीमा किया जाएगा। - अमित कुमार शुक्ला, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य पालक विकास अभिकरण