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बदायूं में मिला जापानी इन्सेफेलाइटिस का पहला रोगी
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भवानीपुर खल्ली में मच्छर नाशक दवा का छिड़काव करता मलेरिया विभाग का कर्मी। संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। आमतौर पर पूर्वांचल के जिलों में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की जान लेने वाला जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) का वायरस बदायूं भी पहुंच गया है। दहगवां ब्लॉक के गांव भवानीपुर खल्ली के छह माह के बच्चे को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है। इसके बाद जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) को लेकर जिले में अलर्ट कर दिया गया है।
दहगवां ब्लॉक के गांव भवानीपुर खल्ली निवासी एक व्यक्ति के छह माह के बेटे को कई दिन से बुखार आ रहा था। पहले उन्होंने गांव में ही इलाज कराया। फायदा न होने पर सहसवान और फिर बदायूं में भी डॉक्टर को दिखाया, लेकिन बच्चे की तबीयत में सुधार नहीं हुआ। इस पर बच्चे को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। यहां जांचों के दौरान बच्चे को जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई। इस संबंध में सूचना जब बदायूं पहुंची तो स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया। गांव पहुंचकर डॉक्टरों की टीम ने जायजा लिया। यहां स्वास्थ्य कैंप लगाकर लोगों की जांच की गई, लेकिन अन्य कोई रोगी नहीं मिला। एहतियात के तौर पर गांव में लगातार हेल्थ कैंप के साथ मच्छर और लार्वा नाशक दवाओं का छिड़काव भी कराया जा रहा है।
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संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है ये रोग
जापानी इंसेफेलाइटिस संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है, लेकिन यह आमतौर पर ऐसे इलाकों में ज्यादा होता है जहां सुअरों का पालन होता हो। सुअर को काटने के बाद अगर मच्छर इंसान को काटता है तो इंसान में संक्रमण फैल जाता है। गौर करने की बात यह है कि इस गांव में सुअर नहीं हैं और जिस बच्चे में संक्रमण की पुष्टि हुई है उसकी किसी तरह की ट्रैवल हिस्ट्री भी नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग गंभीर है।
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दहगवां ब्लॉक के गांव भवानीपुर खल्ली के करीब छह माह के एक बच्चे को जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है। बच्चे को बुखार आ रहा था। परिवार वालों ने इलाज को उसे अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। यहां जांच में बच्चे को जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है। गांव में अलर्ट कर अभियान चलाया जा रहा है।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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कोरोना, मंकीपॉक्स, स्वाइन फीवर के बाद अब जेई की दस्तक
बदायूं। कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही। इस बीच जिले में मंकीपॉक्स और स्वाइन फीवर को लेकर भी अलर्ट घोषित किया जा चुका है। फ्लेविवायरस से संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलने वाले जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) का बदायूं में ज्यादा खतरा नहीं था, लेकिन अब जेई ने भी दस्तक दे दी है।
बारिश के दिनों में जलजनित और मच्छरजनित बीमारियां तेजी से फैलती हैं। बदायूं 2019 से ही मच्छरजनित बीमारियों को लेकर हाईरिस्क श्रेणी में है। यहां मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के रोगी मिलते थे, लेकिन अब जेई ने भी दस्तक दे दी है। डॉक्टरों के अनुसार जापानी इंसेफेलाइटिस या दिमागी बुखार फ्लेविवायरस से संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है।
संक्रामक रोग नियंत्रण सेल प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता का कहना है कि मच्छरों में फ्लेविवायरस आमतौर पर सुअर या अन्य जानवरों के काटने से फैलता है। बाद में यह मच्छर इंसान को काटते हैं तो इसका असर दिमागी बुखार के रूप में सामने आता है। इसमें अपंगता से लेकर मौत तक का खतरा होता है। आमतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में जेई का प्रकोप नहीं होता है। कभी कभार एक-दो रोगी ही मिलते हैं।
भवानीपुर खल्ली से ही हुई ही जिले में कोरोना संक्रमण की शुरुआत
अप्रैल 2020 में इसी गांव में मिले से तब्लीगी जमात से जुड़े संक्रमित
बदायूं। दहगवां ब्लॉक के गांव भवानीपुर खल्ली से ही अप्रैल 2020 में जिले में कोरोना संक्रमण की शुरुआत हुई थी। अप्रैल के पहले सप्ताह भवानीपुर खल्ली में तब्लीगी जमात से जुड़े जमाती मिले थे। यह जमाती महाराष्ट्र समेत देश के अन्य हिस्सों से यहां आए थे। मस्जिद में शरण लिए इन लोगों की जांच कराई गई तो पांच संक्रमित मिले थे।
अप्रैल 2020 से लेकर अब तक जिले में कुल 18191 कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। दूसरी लहर के दौरान जिले में 101 लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत भी हो चुकी है। इन दिनों भी कोरोना संक्रमण का दायरा बढ़ता जा रहा है। इस बीच भवानीपुर खल्ली गांव में जापानी इंसेफेलाइटिस का रोगी मिलने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई हैं। भवानीपुर खल्ली समेत आसपास के गांवों में अलर्ट कर दिया गया है। मंगलवार को भी डॉ. कौशल गुप्ता, डॉ. तहसीन टीम के साथ भवानीपुर खल्ली पहुंचे। आसपास के गांवों में भी लोगों की जांच कराई जा रही है। गांव में मच्छर और लार्वा नाशक दवाओं का छिड़काव शुरू करा दिया गया है।
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भवानीपुर खल्ली में 68 घरों से पकड़े गए मच्छर, वायरस की जांच होगी
बदायूं। दहगवां ब्लॉक के गांव भवानीपुर खल्ली में मंगलवार को मलेरिया विभाग की टीमों ने अभियान चलाकर यहां 68 घरों से मच्छर पकड़े हैं। इन मच्छरों को जांच के लिए भेजा गया है ताकि स्पष्ट हो सके कि गांव में मच्छर फ्लेविवायरस संक्रमण से ग्रस्त नहीं हैं। जापानी इंसेफेलाइटिस फ्लेविवायरस संक्रमण से ग्रस्त मच्छरों के काटने से फैलता है। गौर करने की बात यह भी है कि फ्लेविवायरस संक्रमण से ग्रस्त मच्छर ऐसे इलाकों में पाए जाते हैं जहां सुअर पालन होता हो, लेकिन भवानीपुर खल्ली में एक भी सुअर नहीं है। दूसरी ओर जिस छह माह के बच्चे को जापानी इंसेफेलाइटिस की अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में पुष्टि हुई है उसकी किसी तरह की कोई ट्रैवल हिस्ट्री भी नहीं है। ऐसे में वायरस के यहां तक पहुंचने को लेकर स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की चिताएं बढ़ गई हैं।
मंगलवार को भवानीपुर खल्ली समेत आसपास के गांवों में मलेरिया विभाग की टीमों ने पायराथ्रेम, टेमीफॉस और डीडीटी की छिड़काव भी कराया। मच्छर जनित बीमारियों के लिहाज से जिले के अन्य हाईरिस्क इलाकों में भी मलेरिया विभाग की टीमें मच्छरों को पकड़ने के साथ दवाओं के छिड़काव में जुट गई हैं। जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत ने बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस का वायरस यहां तक कैसे पहुंचा यह जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।
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दहगवां ब्लॉक के गांव भवानीपुर खल्ली निवासी एक व्यक्ति के छह माह के बेटे को कई दिन से बुखार आ रहा था। पहले उन्होंने गांव में ही इलाज कराया। फायदा न होने पर सहसवान और फिर बदायूं में भी डॉक्टर को दिखाया, लेकिन बच्चे की तबीयत में सुधार नहीं हुआ। इस पर बच्चे को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। यहां जांचों के दौरान बच्चे को जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई। इस संबंध में सूचना जब बदायूं पहुंची तो स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया। गांव पहुंचकर डॉक्टरों की टीम ने जायजा लिया। यहां स्वास्थ्य कैंप लगाकर लोगों की जांच की गई, लेकिन अन्य कोई रोगी नहीं मिला। एहतियात के तौर पर गांव में लगातार हेल्थ कैंप के साथ मच्छर और लार्वा नाशक दवाओं का छिड़काव भी कराया जा रहा है।
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संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है ये रोग
जापानी इंसेफेलाइटिस संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है, लेकिन यह आमतौर पर ऐसे इलाकों में ज्यादा होता है जहां सुअरों का पालन होता हो। सुअर को काटने के बाद अगर मच्छर इंसान को काटता है तो इंसान में संक्रमण फैल जाता है। गौर करने की बात यह है कि इस गांव में सुअर नहीं हैं और जिस बच्चे में संक्रमण की पुष्टि हुई है उसकी किसी तरह की ट्रैवल हिस्ट्री भी नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग गंभीर है।
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दहगवां ब्लॉक के गांव भवानीपुर खल्ली के करीब छह माह के एक बच्चे को जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है। बच्चे को बुखार आ रहा था। परिवार वालों ने इलाज को उसे अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। यहां जांच में बच्चे को जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है। गांव में अलर्ट कर अभियान चलाया जा रहा है।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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कोरोना, मंकीपॉक्स, स्वाइन फीवर के बाद अब जेई की दस्तक
बदायूं। कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही। इस बीच जिले में मंकीपॉक्स और स्वाइन फीवर को लेकर भी अलर्ट घोषित किया जा चुका है। फ्लेविवायरस से संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलने वाले जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) का बदायूं में ज्यादा खतरा नहीं था, लेकिन अब जेई ने भी दस्तक दे दी है।
बारिश के दिनों में जलजनित और मच्छरजनित बीमारियां तेजी से फैलती हैं। बदायूं 2019 से ही मच्छरजनित बीमारियों को लेकर हाईरिस्क श्रेणी में है। यहां मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के रोगी मिलते थे, लेकिन अब जेई ने भी दस्तक दे दी है। डॉक्टरों के अनुसार जापानी इंसेफेलाइटिस या दिमागी बुखार फ्लेविवायरस से संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है।
संक्रामक रोग नियंत्रण सेल प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता का कहना है कि मच्छरों में फ्लेविवायरस आमतौर पर सुअर या अन्य जानवरों के काटने से फैलता है। बाद में यह मच्छर इंसान को काटते हैं तो इसका असर दिमागी बुखार के रूप में सामने आता है। इसमें अपंगता से लेकर मौत तक का खतरा होता है। आमतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में जेई का प्रकोप नहीं होता है। कभी कभार एक-दो रोगी ही मिलते हैं।
भवानीपुर खल्ली से ही हुई ही जिले में कोरोना संक्रमण की शुरुआत
अप्रैल 2020 में इसी गांव में मिले से तब्लीगी जमात से जुड़े संक्रमित
बदायूं। दहगवां ब्लॉक के गांव भवानीपुर खल्ली से ही अप्रैल 2020 में जिले में कोरोना संक्रमण की शुरुआत हुई थी। अप्रैल के पहले सप्ताह भवानीपुर खल्ली में तब्लीगी जमात से जुड़े जमाती मिले थे। यह जमाती महाराष्ट्र समेत देश के अन्य हिस्सों से यहां आए थे। मस्जिद में शरण लिए इन लोगों की जांच कराई गई तो पांच संक्रमित मिले थे।
अप्रैल 2020 से लेकर अब तक जिले में कुल 18191 कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। दूसरी लहर के दौरान जिले में 101 लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत भी हो चुकी है। इन दिनों भी कोरोना संक्रमण का दायरा बढ़ता जा रहा है। इस बीच भवानीपुर खल्ली गांव में जापानी इंसेफेलाइटिस का रोगी मिलने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई हैं। भवानीपुर खल्ली समेत आसपास के गांवों में अलर्ट कर दिया गया है। मंगलवार को भी डॉ. कौशल गुप्ता, डॉ. तहसीन टीम के साथ भवानीपुर खल्ली पहुंचे। आसपास के गांवों में भी लोगों की जांच कराई जा रही है। गांव में मच्छर और लार्वा नाशक दवाओं का छिड़काव शुरू करा दिया गया है।
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भवानीपुर खल्ली में 68 घरों से पकड़े गए मच्छर, वायरस की जांच होगी
बदायूं। दहगवां ब्लॉक के गांव भवानीपुर खल्ली में मंगलवार को मलेरिया विभाग की टीमों ने अभियान चलाकर यहां 68 घरों से मच्छर पकड़े हैं। इन मच्छरों को जांच के लिए भेजा गया है ताकि स्पष्ट हो सके कि गांव में मच्छर फ्लेविवायरस संक्रमण से ग्रस्त नहीं हैं। जापानी इंसेफेलाइटिस फ्लेविवायरस संक्रमण से ग्रस्त मच्छरों के काटने से फैलता है। गौर करने की बात यह भी है कि फ्लेविवायरस संक्रमण से ग्रस्त मच्छर ऐसे इलाकों में पाए जाते हैं जहां सुअर पालन होता हो, लेकिन भवानीपुर खल्ली में एक भी सुअर नहीं है। दूसरी ओर जिस छह माह के बच्चे को जापानी इंसेफेलाइटिस की अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में पुष्टि हुई है उसकी किसी तरह की कोई ट्रैवल हिस्ट्री भी नहीं है। ऐसे में वायरस के यहां तक पहुंचने को लेकर स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की चिताएं बढ़ गई हैं।
मंगलवार को भवानीपुर खल्ली समेत आसपास के गांवों में मलेरिया विभाग की टीमों ने पायराथ्रेम, टेमीफॉस और डीडीटी की छिड़काव भी कराया। मच्छर जनित बीमारियों के लिहाज से जिले के अन्य हाईरिस्क इलाकों में भी मलेरिया विभाग की टीमें मच्छरों को पकड़ने के साथ दवाओं के छिड़काव में जुट गई हैं। जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत ने बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस का वायरस यहां तक कैसे पहुंचा यह जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।