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नाबालिग के नाम किया फर्जी लोन, काट दी आरसी
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Mon, 26 Sep 2016 11:48 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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शिकायतकर्ता को लौटाया बैरंग, जमानतदारों की जानकारी भी नहीं
अनुसूचित जाति की योजना में पिछड़ा वर्ग के लाभार्थी को कैसे मिला लोन
समाज कल्याण विभाग के वित्त विकास निगम में फर्जी रूप से एक किशोर के नाम लोन कर दिया। आरसी कटने पर किशोर को लोन की जानकारी हुई, उसने पिता के साथ पहुंचकर मामले की शिकायत वित्त विकास विभाग में पहुंचकर अधिकारियों से की। मामला फंसता देखकर विभागीय अधिकारी पल्ला झाड़ने में लगे हैं। खुद को बचाने के चक्कर में अधिकारी इस मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि लोन की सूचना उनके बहीखाते में दर्ज है।
वित्त वर्ष 2012-13 में वित्त विकास निगम की ओर से लांड्री योजना के तहत 12 लाभार्थियों को दो लाख छह हजार रुपये का लोन दिया गया, जबकि 10 हजार रुपये खुद को लगाने थे। इसमें दातागंज, उझानी और म्याऊं नगर निकायों के लाभार्थी शामिल किए गए थे। इसमें से म्याऊं के राजेश पुत्र मानसिंह कश्यप के नाम पर भी दो लाख छह हजार रुपये का लोन किया था। किस्तें जमा न करने पर सभी के खिलाफ आरसी काट दी गई थी, जब आरसी राजेश के पिता मानसिंह के पास पहुंची तो उसके होश उड़ गए।
मानसिंह के मुताबिक उसका बेटा तो नाबालिग है और उसने कोई भी लोन नहीं लिया। यह जानकारी देने के साथ ही आरसी को वापस कराने की गुहार लगाने के लिए मानसिंह विकास भवन स्थित कार्यालय में पहुंचा तो वहां पर कर्मचारियों ने उसे बैरंग कर दिया। यहां एक बात और निकलकर आई है कि वित्त विकास निगम की ओर से अनुसूचित जाति के लोगों के लिए ही लोन दिया जाना था, जबकि जिसके नाम आरसी काटी गई वह अन्य पिछड़ा वर्ग से आता है। फिलहाल विभाग की ओर से मामले की अंदरखाने से जांच शुरू कर दी गई, लेकिन अभी तक स्पष्ट कहने से अधिकारी बच रहे हैं।
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लांड्री योजना के तहत लोन लेकर धनराशि जमा न करने वाले 12 लाभार्थियों के खिलाफ आरसी जारी की गई है। अन्य पिछड़ा वर्ग के नाबालिग किशोर के यहां आरसी के कागज कैसे पहुंचे? इसकी जांच कराई जाएगी। यदि दोषी मिलता है तो कार्रवाई की जाएगी।
-एनके पाठक, जिला समाज कल्याण अधिकारी
अनुसूचित जाति की योजना में पिछड़ा वर्ग के लाभार्थी को कैसे मिला लोन
समाज कल्याण विभाग के वित्त विकास निगम में फर्जी रूप से एक किशोर के नाम लोन कर दिया। आरसी कटने पर किशोर को लोन की जानकारी हुई, उसने पिता के साथ पहुंचकर मामले की शिकायत वित्त विकास विभाग में पहुंचकर अधिकारियों से की। मामला फंसता देखकर विभागीय अधिकारी पल्ला झाड़ने में लगे हैं। खुद को बचाने के चक्कर में अधिकारी इस मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि लोन की सूचना उनके बहीखाते में दर्ज है।
वित्त वर्ष 2012-13 में वित्त विकास निगम की ओर से लांड्री योजना के तहत 12 लाभार्थियों को दो लाख छह हजार रुपये का लोन दिया गया, जबकि 10 हजार रुपये खुद को लगाने थे। इसमें दातागंज, उझानी और म्याऊं नगर निकायों के लाभार्थी शामिल किए गए थे। इसमें से म्याऊं के राजेश पुत्र मानसिंह कश्यप के नाम पर भी दो लाख छह हजार रुपये का लोन किया था। किस्तें जमा न करने पर सभी के खिलाफ आरसी काट दी गई थी, जब आरसी राजेश के पिता मानसिंह के पास पहुंची तो उसके होश उड़ गए।
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मानसिंह के मुताबिक उसका बेटा तो नाबालिग है और उसने कोई भी लोन नहीं लिया। यह जानकारी देने के साथ ही आरसी को वापस कराने की गुहार लगाने के लिए मानसिंह विकास भवन स्थित कार्यालय में पहुंचा तो वहां पर कर्मचारियों ने उसे बैरंग कर दिया। यहां एक बात और निकलकर आई है कि वित्त विकास निगम की ओर से अनुसूचित जाति के लोगों के लिए ही लोन दिया जाना था, जबकि जिसके नाम आरसी काटी गई वह अन्य पिछड़ा वर्ग से आता है। फिलहाल विभाग की ओर से मामले की अंदरखाने से जांच शुरू कर दी गई, लेकिन अभी तक स्पष्ट कहने से अधिकारी बच रहे हैं।
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लांड्री योजना के तहत लोन लेकर धनराशि जमा न करने वाले 12 लाभार्थियों के खिलाफ आरसी जारी की गई है। अन्य पिछड़ा वर्ग के नाबालिग किशोर के यहां आरसी के कागज कैसे पहुंचे? इसकी जांच कराई जाएगी। यदि दोषी मिलता है तो कार्रवाई की जाएगी।
-एनके पाठक, जिला समाज कल्याण अधिकारी