Budaun News: कमरे में जिंदा जल गए पिता और दो मासूम बेटे... दरवाजे में न फंसता सिलिंडर तो बच सकती थी जान
बदायूं के उझानी में बृहस्पतिवार रात दर्दनाक घटना घटित हुई थी। यहां सिलिंडर में आग लगने से पिता व दो मासूम बच्चों की जलकर मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जलता सिलिंडर के दरवाजे में फंस जाने से पिता-पुत्रों को निकलने का मौका नहीं मिल सका था।
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बदायूं के उझानी कस्बे के मोहल्ला गद्दी टोला में बृहस्पतिवार रात घर की दूसरी मंजिल पर गैस सिलिंडर में आग लगने से सुखपाल मौर्य (35) और उनके बेटे गोपाल (8) और यश (5) की जलकर मौत हो गई। उनकी पत्नी और वृद्ध मां झुलस गईं। कमरे में रखा सारा सामान भी जल गया। परिवार वालों ने जैसे-तैसे आग बुझाई। इस घटना से मोहल्ल के लोग स्तब्ध हैं।
घर में खाना बनने के दौरान आग लगने पर सुखपाल ने जलता गैस सिलिंडर बाहर निकालने की कोशिश की थी, लेकिन सिलिंडर दरवाजे में फंस गया। इससे किवाड़ भी आधी बंद हो गईं। हालांकि इससे पहले सुखपाल की पत्नी त्रिवेणी ढाई महीने के मासूम बेटे को लेकर कमरे से निकल गईं थी। सिलिंडर के दरवाजे में फंस जाने से सुखपाल और उनके दोनों बेटों को कमरे से निकलने का मौका ही नहीं मिला।
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खेतीबाड़ी करने वाले किसान सुखपाल के घर में बृहस्पतिवार रात करीब पौने आठ बजे खाने बनने के दौरान गैस सिलिंडर में आग लग गई थी। उस वक्त सुखपाल अपने तीन बेटों और पत्नी के साथ कमरे में मौजूद थे। उनकी बेटी नीचे गई थी। आग लगने पर सुखपाल की पत्नी अपने ढाई माह के दुधमुंहे बेटे को लेकर परिजनों को मदद के लिए बुलाने के मकसद से दौड़कर नीचे चली गईं।
इधर, सुखपाल ने दोनों बेटों गोपाल और यश को लेकर कमरे से भागने के बजाय जलते सिलिंडर को निकालने की कोशिश की। घरवालों के मुताबिक, वह जलते सिलिंडर को बाहर निकालकर आग को कमरे में फैलने से रोकना चाहते थे, ताकि ज्यादा नुकसान न हो। इसी मंशा से उन्होंने सिलिंडर को खींचकर बाहर की ओर धक्का दे दिया, लेकिन वह दरवाजे में इस तरह फंस गया कि किवाड़ भी आधे बंद हो गए।
चूंकि सिलिंडर से गैस के प्रेशर के साथ आग की बहुत ऊंची लपटें निकल रही थीं, लिहाजा वह चाहकर भी बेटों के साथ बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। घरवाले जब तक ऊपर पहुंचे, तब तक आग पूरे कमरे में फैल चुकी थी। उन्होंने बमुश्किल आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक सुखपाल और उनके दोनों बेटों की मौत हो चुकी थी। हालांकि मोहल्ले में यह भी चर्चा है कि सुखपाल और उनकी पत्नी के बीच मनमुटाव चल रहा था।
लोग इस हादसे पर संदेह जता रहे हैं। उनका सवाल है कि जब त्रिवेणी ढाई माह के बच्चे को लेकर कमरे से निकल गईं तो फिर सुखपाल दोनों बेटों को लेकर कमरे से क्यों नहीं निकल पाए। कमरे में बर्तन तो इधर-उधर फैले मिले लेकिन खाना बनाया जा रहा था, इसकी अब तक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि आग लगने के कारणों की बारीकी से छानबीन की जा रही है।