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फातिमा रजा को मिली फतह
badaun
Updated Thu, 09 Apr 2015 07:56 PM IST
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नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद के लिए हुए उपचुनाव में सदर विधायक आबिद रजा की पत्नी सपा प्रत्याशी फातिमा रजा ने रिकार्ड जीत दर्ज की है। उन्होंने अपनी प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी दीपमाला गोयल को 26,825 मतों से शिकस्त दी है। उपचुनाव में इन प्रत्याशियों को छोड़ सभी की जमानत जब्त हो गई। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी महेश चंद्र सक्सेना चौथे नंबर पर पहुंच गए। मंडी समिति में मतगणना के बाद फातिमा रजा को जिलाधिकारी ने प्रमाणपत्र दिया।
गुरुवार सुबह नौ बजे के बाद से मतगणना के परिणाम आने शुरू हुए तो सपा प्रत्याशी का दबदबा बढ़ता ही गया। भाजपा प्रत्याशी दीपमाला गोयल को पहले चक्र में 4,871 वोट मिले तो सपा की फातिमा रजा को 9,423 मत मिले। दूसरे चक्र में भाजपा प्रत्याशी को 3,582 तो सपा प्रत्याशी को 9,498 मत मिले। इस प्रकार हर चक्र पर जीत बढ़ती रही। तीसरे चक्र में भाजपा प्रत्याशी को 3,388 तो सपा प्रत्याशी को 10,828 मत मिले। चौथे राउंड में भाजपा प्रत्याशी को 4,794 तो सपा प्रत्याशी को 9,626 मत मिले। पांचवें चक्र में भाजपा प्रत्याशी को 3,863 तो सपा प्रत्याशी को 7,537, छठे राउंड में भाजपा को 2,407 तो सपा प्रत्याशी को 2,634 और सातवां राउंड में भाजपा प्रत्याशी को 1,058 तो भाजपा प्रत्याशी को 1,242 मत मिले। सातवें चक्र तक सपा प्रत्याशी लगातार विजय की ओर बढ़ती रहीं। भाजपा प्रत्याशी दीपमाला गोयल को अंतिम चक्र में कुल 23,963 मतों पर ही संतोष करना पड़ा तो 26,825 की बढ़त लेकर सपा प्रत्याशी फातिमा रजा ने 50,788 मत हासिल किए।
परिणाम ने चौंकाया, महेश से मुस्तरी रहीं आगे
मतगणना के परिणाम चौंकाने वाले रहे। 10 प्रत्याशियों में से प्रथम तीन स्थानों को महिला प्रत्याशियों ने ही हासिल किया तीसरे स्थान पर रहीं मुस्तरी बेगम को हालांकि 1043 मतों पर ही संतोष करना पड़ा। सबसे कम मत पाने वाली प्रत्याशी भी महिला ही रही। सरजू देवी को सबसे कम 27 मत ही मिले। चौथे स्थान पर रहे कांग्रेस समर्थित महेश चंद्र सक्सेना को 661 तो पांचवें स्थान पर निर्दलीय मुजफ्फर को 653 मत ही मिले। छठे स्थान पर रहे निर्दल नन्हेलाल कश्यप को 216, सातवें स्थान पर रहे निर्दल प्रदीप को 192 मतों पर संतोष करना पड़ा। आठवें, नवें और दसवें स्थान पर रहे निर्दल डालचंद को 53, निर्दल वेदप्रकाश को 40 और निर्दल सरजू देवी को 27 मत मिले। जबकि ये तीनों प्रत्याशी मतदान से पूर्व फातिमा रजा के समर्थन में चले गए थे।
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सबसे ऊपर के तीन दर्जे महिलाओं के नाम
चुनाव परिणामों में यह खास रहा कि जैसे पहली चेयरमैन फातिमा रजा बनने जा रही हैं, वहीं इस चुनाव में महिला के लिए सीट आरक्षित न होते हुए भी महिलाओं का दबदबा रहा। पहले नंबर में सपा की फातिमा रहीं और जीत दर्ज कर चेयरमैन की दावेदार बन गईं। दूसरे नंबर पर भाजपा की दीपमाला महिला प्रत्याशी थीं, लेकिन जो तीसरे नंबर पर रहीं वह भी निर्दलीय महिला उम्मीदवार मुस्तरी बेगम हैं। इस चुनाव में 10 प्रत्याशियों में शामिल चार महिलाएं, पहले तीन स्थानों पर रहीं। चौथी महिला सरजू आखिरी प्रत्याशी रहीं।
सूबे में सबसे बड़ी जीत: आबिद
सदर विधायक आबिद रजा ने कहा है कि उनकी पत्नी फातिमा रजा की जीत सबसे बड़ी जीत है। सूबे में अब तक नगर पालिका के अध्यक्ष पद के लिए रामपुर में सबसे बड़ी जीत करीब 17000 हजार वोटों से रिकार्ड बनी हुई थी, लेकिन उनकी पत्नी ने 26,825 से विजय हासिल कर सूबे में नया इतिहास रचा है। इस जीत का आधार धर्म निरपेक्षता रही है। हर जाति-वर्ग ने उनको वोट दिया है। नगर में चहुंमुखी विकास के लिए उनका पूरा सहयोग रहेगा।
बहिष्कार में हार-जीत नहीं: दीपमाला
बदायूं में लोकतंत्र की हत्या हुई है। उन्होंने और उनकी पार्टी ने मतदान के दिन ही बहिष्कार कर दिया था। जीत-हार क्या? अगर, वह चुनाव मैदान में होतीं, तो उनकी जीत पक्की थी। जिस तरह मतदान के दिन बूथों पर कब्जे कर वोट डाले गए, उसी प्रकार यह पहली बार हुआ कि मतगणना में गुंडे पहुंचे। गुंडे वहां असलहे, मोबाइल फोन भी लेकर पहुंचे। प्रशासन लोकतंत्र की हत्या करवाने में सहयोगी रहा।
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गुरुवार सुबह नौ बजे के बाद से मतगणना के परिणाम आने शुरू हुए तो सपा प्रत्याशी का दबदबा बढ़ता ही गया। भाजपा प्रत्याशी दीपमाला गोयल को पहले चक्र में 4,871 वोट मिले तो सपा की फातिमा रजा को 9,423 मत मिले। दूसरे चक्र में भाजपा प्रत्याशी को 3,582 तो सपा प्रत्याशी को 9,498 मत मिले। इस प्रकार हर चक्र पर जीत बढ़ती रही। तीसरे चक्र में भाजपा प्रत्याशी को 3,388 तो सपा प्रत्याशी को 10,828 मत मिले। चौथे राउंड में भाजपा प्रत्याशी को 4,794 तो सपा प्रत्याशी को 9,626 मत मिले। पांचवें चक्र में भाजपा प्रत्याशी को 3,863 तो सपा प्रत्याशी को 7,537, छठे राउंड में भाजपा को 2,407 तो सपा प्रत्याशी को 2,634 और सातवां राउंड में भाजपा प्रत्याशी को 1,058 तो भाजपा प्रत्याशी को 1,242 मत मिले। सातवें चक्र तक सपा प्रत्याशी लगातार विजय की ओर बढ़ती रहीं। भाजपा प्रत्याशी दीपमाला गोयल को अंतिम चक्र में कुल 23,963 मतों पर ही संतोष करना पड़ा तो 26,825 की बढ़त लेकर सपा प्रत्याशी फातिमा रजा ने 50,788 मत हासिल किए।
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परिणाम ने चौंकाया, महेश से मुस्तरी रहीं आगे
मतगणना के परिणाम चौंकाने वाले रहे। 10 प्रत्याशियों में से प्रथम तीन स्थानों को महिला प्रत्याशियों ने ही हासिल किया तीसरे स्थान पर रहीं मुस्तरी बेगम को हालांकि 1043 मतों पर ही संतोष करना पड़ा। सबसे कम मत पाने वाली प्रत्याशी भी महिला ही रही। सरजू देवी को सबसे कम 27 मत ही मिले। चौथे स्थान पर रहे कांग्रेस समर्थित महेश चंद्र सक्सेना को 661 तो पांचवें स्थान पर निर्दलीय मुजफ्फर को 653 मत ही मिले। छठे स्थान पर रहे निर्दल नन्हेलाल कश्यप को 216, सातवें स्थान पर रहे निर्दल प्रदीप को 192 मतों पर संतोष करना पड़ा। आठवें, नवें और दसवें स्थान पर रहे निर्दल डालचंद को 53, निर्दल वेदप्रकाश को 40 और निर्दल सरजू देवी को 27 मत मिले। जबकि ये तीनों प्रत्याशी मतदान से पूर्व फातिमा रजा के समर्थन में चले गए थे।
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सबसे ऊपर के तीन दर्जे महिलाओं के नाम
चुनाव परिणामों में यह खास रहा कि जैसे पहली चेयरमैन फातिमा रजा बनने जा रही हैं, वहीं इस चुनाव में महिला के लिए सीट आरक्षित न होते हुए भी महिलाओं का दबदबा रहा। पहले नंबर में सपा की फातिमा रहीं और जीत दर्ज कर चेयरमैन की दावेदार बन गईं। दूसरे नंबर पर भाजपा की दीपमाला महिला प्रत्याशी थीं, लेकिन जो तीसरे नंबर पर रहीं वह भी निर्दलीय महिला उम्मीदवार मुस्तरी बेगम हैं। इस चुनाव में 10 प्रत्याशियों में शामिल चार महिलाएं, पहले तीन स्थानों पर रहीं। चौथी महिला सरजू आखिरी प्रत्याशी रहीं।
सूबे में सबसे बड़ी जीत: आबिद
सदर विधायक आबिद रजा ने कहा है कि उनकी पत्नी फातिमा रजा की जीत सबसे बड़ी जीत है। सूबे में अब तक नगर पालिका के अध्यक्ष पद के लिए रामपुर में सबसे बड़ी जीत करीब 17000 हजार वोटों से रिकार्ड बनी हुई थी, लेकिन उनकी पत्नी ने 26,825 से विजय हासिल कर सूबे में नया इतिहास रचा है। इस जीत का आधार धर्म निरपेक्षता रही है। हर जाति-वर्ग ने उनको वोट दिया है। नगर में चहुंमुखी विकास के लिए उनका पूरा सहयोग रहेगा।
बहिष्कार में हार-जीत नहीं: दीपमाला
बदायूं में लोकतंत्र की हत्या हुई है। उन्होंने और उनकी पार्टी ने मतदान के दिन ही बहिष्कार कर दिया था। जीत-हार क्या? अगर, वह चुनाव मैदान में होतीं, तो उनकी जीत पक्की थी। जिस तरह मतदान के दिन बूथों पर कब्जे कर वोट डाले गए, उसी प्रकार यह पहली बार हुआ कि मतगणना में गुंडे पहुंचे। गुंडे वहां असलहे, मोबाइल फोन भी लेकर पहुंचे। प्रशासन लोकतंत्र की हत्या करवाने में सहयोगी रहा।