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Budaun News: पंजीकरण न ही भुगतान का झंझट खुले बाजार में गेहूं बेच रहे किसान
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उझानी में आरएफसी के गेहूं क्रय केंद्र पर बैठे कर्मचारी। संवाद
बदायूं/उझानी। सरकारी खरीद का लक्ष्य पूरा करने के लिए अधिकारी किसान के घर जाने को तैयार हैं, बावजूद इसके किसान पंजीकरण और भुगतान मिलने के झंझटों से बचने के लिए आढ़तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कारण, आढ़ती उन्हें सरकारी क्रय केंद्र के बराबर या उससे अधिक नकद भुगतान दे रहे हैं।
यहां बता दें कि सरकारी क्रय केंद्र से 72 घंटे बाद भुगतान मिल पाता है। इससे पूर्व क्रय केंद्र पर जाकर पंजीकरण कराना होता है। इस स्थिति के चलते 16 लाख 600 मीट्रिक टन खरीद लक्ष्य के सापेक्ष अब तक मात्र 13 फीसदी खरीद ही हो सकी है। खुले बाजार में गेहूं का भाव 2300 से 2320 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। आमतौर पर किसानों को बिना किसी झंझट के 2300 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। इसलिए किसान 2295 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचना नहीं चाहते। सूने पड़े इलाके के क्रय केंद्रों पर प्रभारियों समेत कर्मचारियों के अलावा कोई और नजर नहीं आता।
ऐसा ही शुक्रवार को उझानी मंडी परिसर स्थित आरएफसी और पीसीएफ के केंद्रों पर देखने को मिला। शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे आरएफसी के दोनों क्रय केंद्रों पर प्रभारी सुभाष चंद्र और दो कर्मचारी मिले। उनके अधिकार क्षेत्र के दोनों केंद्र पर करीब 15 क्विंटल गेहूं पड़ा जरूर दिखा, लेकिन पास में सरसों का ढेर भी लगा था। प्रभारी बोले- किसान का रुख क्रय केंद्रों की ओर अब कम है। इसके पीछे की वजह उन्होंने सरकारी और बाजार भाव में कोई खास अंतर न होना बताया।
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आढ़त पर गेहूं बेचकर लौट रहे किसानों में बुटला के हरीओम ने बताया कि बाजार में 2280 रुपये प्रति क्विंटल का भाव है तो क्रय केंद्र के झंझट में क्यों पड़ा जाए। सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने पर भुगतान में चार-छह दिन लग जाते हैं। इसी तरह पीसीएफ के दोनों क्रय केंद्रों पर संस्था का बैनर भी नजर नहीं आया।
इंचार्ज सोमेंद्र सिंह ने बताया कि क्या करें। इलाके में जाकर किसानों से संपर्क करना पड़ रहा है। अब तक उनके दोनों क्रय केंद्रों पर बमुश्किल 750 क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है। आरएफसी ने करीब आठ हजार क्विंटल की खरीद करके बाजी जरूर मार ली है। इसके विपरीत मंडी में दो संस्थाओं के क्रय केंद्र अस्तित्व में नहीं दिखे। पीसीएफ क्रय केंद्र के इंचार्ज सोमेंद्र सिंह और आरएफसी के सुभाष चंद्र ने कृषि उत्पादन मंडी सचिव अरविंद चौहान के साथ बैठक की। क्रय केंद्र प्रभारियों ने सचिव से भी सहयोग मांगा।
किसानों से फोन पर संपर्क किया जा रहा है ताकि लक्ष्य पूरा किया जा सके। अगर बाजार कम होता है तो मुश्किल नहीं होती। - अतुल कुमार वशिष्ठ, डिप्टी आरएमओ
आढ़तियों पर सरकारी रेट से कम पर खरीद करने का दबाव
कृषि उत्पादन मंडी समिति में आढ़तों पर शुक्रवार को गेहूं का रेट 2275 रुपये प्रति क्विंटल ही बताया गया। आढ़ती सर्वेश गुप्ता कहते हैं कि व्यापारी भी चाहते हैं कि सरकारी खरीद का लक्ष्य पूरा हो। फिर भी आढ़तों पर गेहूं लेकर किसान क्यों पहुंचते हैं, यह अफसर भी जानते हैं। इसके विपरीत मंडी में सरकारी दर से कम दाम पर गेहूं खरीदने का दबाव आढ़तियों पर है। ताकि किसान क्रय केंद्र पर ही आने के लिए मजबूर हो जाएं।
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यहां बता दें कि सरकारी क्रय केंद्र से 72 घंटे बाद भुगतान मिल पाता है। इससे पूर्व क्रय केंद्र पर जाकर पंजीकरण कराना होता है। इस स्थिति के चलते 16 लाख 600 मीट्रिक टन खरीद लक्ष्य के सापेक्ष अब तक मात्र 13 फीसदी खरीद ही हो सकी है। खुले बाजार में गेहूं का भाव 2300 से 2320 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। आमतौर पर किसानों को बिना किसी झंझट के 2300 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। इसलिए किसान 2295 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचना नहीं चाहते। सूने पड़े इलाके के क्रय केंद्रों पर प्रभारियों समेत कर्मचारियों के अलावा कोई और नजर नहीं आता।
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ऐसा ही शुक्रवार को उझानी मंडी परिसर स्थित आरएफसी और पीसीएफ के केंद्रों पर देखने को मिला। शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे आरएफसी के दोनों क्रय केंद्रों पर प्रभारी सुभाष चंद्र और दो कर्मचारी मिले। उनके अधिकार क्षेत्र के दोनों केंद्र पर करीब 15 क्विंटल गेहूं पड़ा जरूर दिखा, लेकिन पास में सरसों का ढेर भी लगा था। प्रभारी बोले- किसान का रुख क्रय केंद्रों की ओर अब कम है। इसके पीछे की वजह उन्होंने सरकारी और बाजार भाव में कोई खास अंतर न होना बताया।
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आढ़त पर गेहूं बेचकर लौट रहे किसानों में बुटला के हरीओम ने बताया कि बाजार में 2280 रुपये प्रति क्विंटल का भाव है तो क्रय केंद्र के झंझट में क्यों पड़ा जाए। सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने पर भुगतान में चार-छह दिन लग जाते हैं। इसी तरह पीसीएफ के दोनों क्रय केंद्रों पर संस्था का बैनर भी नजर नहीं आया।
इंचार्ज सोमेंद्र सिंह ने बताया कि क्या करें। इलाके में जाकर किसानों से संपर्क करना पड़ रहा है। अब तक उनके दोनों क्रय केंद्रों पर बमुश्किल 750 क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है। आरएफसी ने करीब आठ हजार क्विंटल की खरीद करके बाजी जरूर मार ली है। इसके विपरीत मंडी में दो संस्थाओं के क्रय केंद्र अस्तित्व में नहीं दिखे। पीसीएफ क्रय केंद्र के इंचार्ज सोमेंद्र सिंह और आरएफसी के सुभाष चंद्र ने कृषि उत्पादन मंडी सचिव अरविंद चौहान के साथ बैठक की। क्रय केंद्र प्रभारियों ने सचिव से भी सहयोग मांगा।
किसानों से फोन पर संपर्क किया जा रहा है ताकि लक्ष्य पूरा किया जा सके। अगर बाजार कम होता है तो मुश्किल नहीं होती। - अतुल कुमार वशिष्ठ, डिप्टी आरएमओ
आढ़तियों पर सरकारी रेट से कम पर खरीद करने का दबाव
कृषि उत्पादन मंडी समिति में आढ़तों पर शुक्रवार को गेहूं का रेट 2275 रुपये प्रति क्विंटल ही बताया गया। आढ़ती सर्वेश गुप्ता कहते हैं कि व्यापारी भी चाहते हैं कि सरकारी खरीद का लक्ष्य पूरा हो। फिर भी आढ़तों पर गेहूं लेकर किसान क्यों पहुंचते हैं, यह अफसर भी जानते हैं। इसके विपरीत मंडी में सरकारी दर से कम दाम पर गेहूं खरीदने का दबाव आढ़तियों पर है। ताकि किसान क्रय केंद्र पर ही आने के लिए मजबूर हो जाएं।

उझानी में आरएफसी के गेहूं क्रय केंद्र पर बैठे कर्मचारी। संवाद