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कर्ज में डूब रहे किसान... चीनी मिलें दबाए बैठी हैं गन्ना भुगतान
सार
चीनी मिलों द्वारा समय से गन्ना भुगतान नहीं करने पर जिले के किसान गन्ने की खेती करके पछता रहे हैं।उनका चीनी मिलों पर लगभग 59 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है।
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विस्तार
बदायूं। चीनी मिलों द्वारा समय से गन्ना भुगतान नहीं करने पर जिले के किसान गन्ने की खेती करके पछता रहे हैं। किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उनका चीनी मिलों पर लगभग 59 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। कहीं, बीमारी तो कहीं किसी दूसरी वजह से किसानों को कर्ज लेना पड़ रहा है, पर चीनी मिलें किसानों के बकाये का भुगतान नहीं कर रही हैं।
शासन के निर्देश थे कि गन्ना मूल्य का भुगतान शुगर मिलों के नए पेराई सत्र से पहले करा दिया जाएगा। हालांकि गन्ना खरीद अधिनियम के अनुसार मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिनों के अंदर किसान के खाते में गन्ना मूल्य भेजा जाना चाहिए। इसके बाद भुगतान करने पर 15 प्रतिशत की दर से बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज देने का प्रावधान है। इन नियमों के बावजूद किसानों को समय से गन्ना मूल्य का भुगतान चीनी मिलें नहीं पा रही हैं। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति बदहाल हो रही है।
जिले में इस साल सात चीनी मिलों ने 80 क्रय केंद्र खोले गए थे। इन केंद्रों के माध्यम से जिलेभर के किसानों का 68.47 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा गया था। इसमें से तीन चीनी मिलों पर जिले के गन्ना किसानों का 58 करोड़, 95 लाख, 41 हजार रुपये बकाया आ रहा है। चीनी मिलों से समय से धनराशि नहीं मिलने के कारण किसान तंगी से जूझ रहे हैं। हालात ये है कि किसानों केे कर्ज लेकर अपने काम चलाने पड़ रहे हैं।
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ये चीनी मिलें दबाए बैठी हैं पैसा
चीनी मिल बकाया (लगभग)
यदु शुगर मिल 40 करोड़, 91 लाख
न्यौली शुगर मिल 11 करोड़, 65 लाख
करीमगंज छह करोड़, 39 लाख
कोई बीमारी तो किसी ने बीमारी में तोड़ दिया दम
गुलड़िया निवासी हरप्रसाद सिंह (55) हृदय रोगी हैं। उनका इलाज दिल्ली और बरेली में चल रहा था। चार अक्तूबर को उनका निधन हो गया। यदु शुगर मिल पर उनका 90 हजार रुपये बकाया चल रहा है। बेला गांव के उमेश सिंह की पत्नी ममता कटियार (42) काफी समय से बीमार चल रही थीं। उनकी भी 30 जुलाई को मौत हो गई। उमेश के अनुसार, उनका भी चीनी मिल पर 50 हजार रुपये बकाया आ रहा है। यदि समय से पैैसा मिल जाता तो उनकी मदद हो जाती। लखनपुर के सूरजपाल सिंह (58) भी हार्ट के मरीज हैं। इनका यदु शुगर मिल पर 80 हजार रुपये बकाया आ रहा है।
चीनी मिलों पर काफी बकाया किसानों का चल रहा है। सभी मिलों को निर्देशित किया गया है कि वे गन्ना किसानों का अवशेष भुगतान जल्द से जल्द करें, जिससे किसानों की किसी भी प्रकार की दिक्कत न आए। -राम किशन, जिला गन्ना अधिकारी।
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शासन के निर्देश थे कि गन्ना मूल्य का भुगतान शुगर मिलों के नए पेराई सत्र से पहले करा दिया जाएगा। हालांकि गन्ना खरीद अधिनियम के अनुसार मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिनों के अंदर किसान के खाते में गन्ना मूल्य भेजा जाना चाहिए। इसके बाद भुगतान करने पर 15 प्रतिशत की दर से बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज देने का प्रावधान है। इन नियमों के बावजूद किसानों को समय से गन्ना मूल्य का भुगतान चीनी मिलें नहीं पा रही हैं। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति बदहाल हो रही है।
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जिले में इस साल सात चीनी मिलों ने 80 क्रय केंद्र खोले गए थे। इन केंद्रों के माध्यम से जिलेभर के किसानों का 68.47 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा गया था। इसमें से तीन चीनी मिलों पर जिले के गन्ना किसानों का 58 करोड़, 95 लाख, 41 हजार रुपये बकाया आ रहा है। चीनी मिलों से समय से धनराशि नहीं मिलने के कारण किसान तंगी से जूझ रहे हैं। हालात ये है कि किसानों केे कर्ज लेकर अपने काम चलाने पड़ रहे हैं।
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ये चीनी मिलें दबाए बैठी हैं पैसा
चीनी मिल बकाया (लगभग)
यदु शुगर मिल 40 करोड़, 91 लाख
न्यौली शुगर मिल 11 करोड़, 65 लाख
करीमगंज छह करोड़, 39 लाख
कोई बीमारी तो किसी ने बीमारी में तोड़ दिया दम
गुलड़िया निवासी हरप्रसाद सिंह (55) हृदय रोगी हैं। उनका इलाज दिल्ली और बरेली में चल रहा था। चार अक्तूबर को उनका निधन हो गया। यदु शुगर मिल पर उनका 90 हजार रुपये बकाया चल रहा है। बेला गांव के उमेश सिंह की पत्नी ममता कटियार (42) काफी समय से बीमार चल रही थीं। उनकी भी 30 जुलाई को मौत हो गई। उमेश के अनुसार, उनका भी चीनी मिल पर 50 हजार रुपये बकाया आ रहा है। यदि समय से पैैसा मिल जाता तो उनकी मदद हो जाती। लखनपुर के सूरजपाल सिंह (58) भी हार्ट के मरीज हैं। इनका यदु शुगर मिल पर 80 हजार रुपये बकाया आ रहा है।
चीनी मिलों पर काफी बकाया किसानों का चल रहा है। सभी मिलों को निर्देशित किया गया है कि वे गन्ना किसानों का अवशेष भुगतान जल्द से जल्द करें, जिससे किसानों की किसी भी प्रकार की दिक्कत न आए। -राम किशन, जिला गन्ना अधिकारी।