{"_id":"57140ffdcd6822ecf1abab68c413fc4d","slug":"farmer-harvesting-wheat-and-being-deceived-in-evacuation-helicopter-to-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":" गेहूं की कटाई और निकासी में ठगे जा रहे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गेहूं की कटाई और निकासी में ठगे जा रहे किसान
दातागंज।
Updated Wed, 15 Apr 2015 11:34 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्राकृतिक आपदा के शिकार किसानों को अपनो का भी उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है। गेहूं की कटाई और निकासी में उसका जमकर शोषण किया जा रहा है। अन्य वर्षों के मुकाबले इस बार डेढ़ गुना मजदूरी देनी पड़ रही है। जबकि उपज का रेशियो आधे से कम है।
प्राकृतिक आपदा की वजह से ज्यादातर गेहूं की फसल जमीन में बिछ गई और जो नहीं बिछी उसके पौधे की जड़ कमजोर हो गई। इसके चलते खड़ी फसल में भी दाना हल्का और पतला हो गया। सामान्यत: चार क्विंटल प्रति बीघा के उपज वाले खेतों में डेढ़ और दो क्विंटल बीघा निकल रहा है। कहीं-कहीं तो 50 से 80 किलोग्राम ही गेहूं निकल रहा है। पिछले सालों में सौ पूले काटने पर काटने वाले को दस-बारह पूले मिलते थे। ज्यादा जरूरतमंद किसान से 25-30 किलोग्राम प्रति बीघा गेहूं काटने वाले ले लेते थे। उसी तरह थ्रेसर पर गहाई कराने मतें बीस पीपा गेहूं निकालने के बाद एक पीपा गेहूं थ्रेसर वाला ले लेता था। मतलब तीन क्विंटल गेहूं पर मात्र 15 किलो की मजूदरी थ्रेसर वाले को मिलती थी। लेकिन इस बार कटाई का न्यूनतम रेट पचास किलोग्राम प्रति बीघा चल रहा है। यही हाल थ्रेसिंग का चल रहा है। मजदूरी और गहाई में 40-50 किलोग्राम प्रति बीघा का गेहूं चला जाता है। जिन खेतों में उपज एक क्विंटल अथवा और कम की है। उन किसानों से थ्रेसर वाले एक हजार रुपये प्रति घंटा
भूसा भी काला और मटैला निकल रहा है
बदायूं। गेहूं के पौधे की जड़ कमजोर होने की वजह से काटते समय पौधा जड़ समेत उखड़ आता है। थ्रेसिंग में जड़ और उसपर मिट्टी लगी होने से भूसे का रंग काला और मैटेला हो रहा रहा है। इस भूसे को जानवर मजबूरी में ही खाएंगे। सरकारी खरीद में भी मानक पूरा नहीं होगा। सरकारी गेहूं खरीद में 12 प्रतिशत तक नमी स्वीकार होती है। 13 पर एक और 14 प्रतिशत पर दो किलो प्रति क्विंटल की कटौती की जाती है। इससे ज्यादा नमी वाला गेहूं खरीदा ही नहीं जाता है। इस बार नमी 15 प्रतिशत से अधिक आ रही है और दाना भी काफी पतला है। सरकार ने मानक में कुछ छूट देने की घोषणा कर रखी है लेकिन छूट के बाद भी गेहूं का मानक पूरा होना मुश्किल है। क्षेत्र में अभी तक एक भी केंद्र सुचारू नहीं हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्राकृतिक आपदा की वजह से ज्यादातर गेहूं की फसल जमीन में बिछ गई और जो नहीं बिछी उसके पौधे की जड़ कमजोर हो गई। इसके चलते खड़ी फसल में भी दाना हल्का और पतला हो गया। सामान्यत: चार क्विंटल प्रति बीघा के उपज वाले खेतों में डेढ़ और दो क्विंटल बीघा निकल रहा है। कहीं-कहीं तो 50 से 80 किलोग्राम ही गेहूं निकल रहा है। पिछले सालों में सौ पूले काटने पर काटने वाले को दस-बारह पूले मिलते थे। ज्यादा जरूरतमंद किसान से 25-30 किलोग्राम प्रति बीघा गेहूं काटने वाले ले लेते थे। उसी तरह थ्रेसर पर गहाई कराने मतें बीस पीपा गेहूं निकालने के बाद एक पीपा गेहूं थ्रेसर वाला ले लेता था। मतलब तीन क्विंटल गेहूं पर मात्र 15 किलो की मजूदरी थ्रेसर वाले को मिलती थी। लेकिन इस बार कटाई का न्यूनतम रेट पचास किलोग्राम प्रति बीघा चल रहा है। यही हाल थ्रेसिंग का चल रहा है। मजदूरी और गहाई में 40-50 किलोग्राम प्रति बीघा का गेहूं चला जाता है। जिन खेतों में उपज एक क्विंटल अथवा और कम की है। उन किसानों से थ्रेसर वाले एक हजार रुपये प्रति घंटा
विज्ञापन
भूसा भी काला और मटैला निकल रहा है
बदायूं। गेहूं के पौधे की जड़ कमजोर होने की वजह से काटते समय पौधा जड़ समेत उखड़ आता है। थ्रेसिंग में जड़ और उसपर मिट्टी लगी होने से भूसे का रंग काला और मैटेला हो रहा रहा है। इस भूसे को जानवर मजबूरी में ही खाएंगे। सरकारी खरीद में भी मानक पूरा नहीं होगा। सरकारी गेहूं खरीद में 12 प्रतिशत तक नमी स्वीकार होती है। 13 पर एक और 14 प्रतिशत पर दो किलो प्रति क्विंटल की कटौती की जाती है। इससे ज्यादा नमी वाला गेहूं खरीदा ही नहीं जाता है। इस बार नमी 15 प्रतिशत से अधिक आ रही है और दाना भी काफी पतला है। सरकार ने मानक में कुछ छूट देने की घोषणा कर रखी है लेकिन छूट के बाद भी गेहूं का मानक पूरा होना मुश्किल है। क्षेत्र में अभी तक एक भी केंद्र सुचारू नहीं हुआ है।
विज्ञापन