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सिंचाई व्यवस्था लड़खड़ाई, किसान परेशान
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sun, 24 Apr 2016 11:29 PM IST
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जिले में सिंचाई की व्यवस्था लड़खड़ा गई है। जिले का किसान मजबूर है। अधिकतर किसान बिजली चालित नलूकपों से सिंचाई पर निर्भर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सप्लाई की हालत बद से बदतर है। यहां डेढ़ घंटे से छह घंटे तक बिजली मिलने के कारण खेत सूखे पड़े हैं। फसलें नष्ट हो रही हैं।
जिले में नहरें नहीं हैं लेकिन सिंचाई का सबसे बड़ा साधन बिजली चालित नलकूप हैं। इन नलकूपों को बिजली नहीं मिलने से पूरे जिले के किसान परेशान हाल हैं। मौसम की मार से पीड़ित किसानों को सबसे अधिक पीड़ा नलकूपों को बिजली न मिलने से भी है। जिले में वैसे तो 15 घंटे ग्रामीण क्षेत्र को बिजली का शेड्यूल है। फिलहाल पांच-छह घंटे से अधिक बिजली नहीं मिल पा रही है। आगे बिजली को लेकर और समस्या हो सकती है।
जिले में 10,700 से भी अधिक नलकूप हैं। इनमें 1201 नलकूप सरकारी हैं। बिजली चालित नलकूपों की स्थिति बिजली न हो सकने की स्थिति में पूरे जिले की सिंचाई व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। जर्जर लाइनें बिजली व्यवस्था को सबसे अधिक ध्वस्त किए हुए हैं। आगामी मई-जून सिंचाई का समय होगा। इन दिनों में बिजली जो मिल रही है, उससे भी कम मिल सकती है। इसलिए आगे किसानों को और समस्याओं से जूझना पड़ेगा।
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सिंचाई बंधु की बैठक केवल खानापूरी
सिंचाई बंधु की मासिक बैठक में अधिकारी पहुंचते नहीं। इससे नलकूपों को बिजली न मिलने की समस्या जहां की तहां रह जाती है। किसानों की प्रमुख समस्या की उपेक्षा यहां के आर्थिक विकास को भी कलंक साबित हो रही है।
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ग्रामीण क्षेत्र में पुरानी लाइनें भी बदली जानी हैं, ऐसे हालातों में कुछ समस्या हो सकती है। समस्याएं दूर की जाएंगी। पूरे जिले में ऐसी समस्या नहीं है।
- अनूृप चंद्रा, एसई, बिजली विभाग
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जिले में नहरें नहीं हैं लेकिन सिंचाई का सबसे बड़ा साधन बिजली चालित नलकूप हैं। इन नलकूपों को बिजली नहीं मिलने से पूरे जिले के किसान परेशान हाल हैं। मौसम की मार से पीड़ित किसानों को सबसे अधिक पीड़ा नलकूपों को बिजली न मिलने से भी है। जिले में वैसे तो 15 घंटे ग्रामीण क्षेत्र को बिजली का शेड्यूल है। फिलहाल पांच-छह घंटे से अधिक बिजली नहीं मिल पा रही है। आगे बिजली को लेकर और समस्या हो सकती है।
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जिले में 10,700 से भी अधिक नलकूप हैं। इनमें 1201 नलकूप सरकारी हैं। बिजली चालित नलकूपों की स्थिति बिजली न हो सकने की स्थिति में पूरे जिले की सिंचाई व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। जर्जर लाइनें बिजली व्यवस्था को सबसे अधिक ध्वस्त किए हुए हैं। आगामी मई-जून सिंचाई का समय होगा। इन दिनों में बिजली जो मिल रही है, उससे भी कम मिल सकती है। इसलिए आगे किसानों को और समस्याओं से जूझना पड़ेगा।
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सिंचाई बंधु की बैठक केवल खानापूरी
सिंचाई बंधु की मासिक बैठक में अधिकारी पहुंचते नहीं। इससे नलकूपों को बिजली न मिलने की समस्या जहां की तहां रह जाती है। किसानों की प्रमुख समस्या की उपेक्षा यहां के आर्थिक विकास को भी कलंक साबित हो रही है।
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ग्रामीण क्षेत्र में पुरानी लाइनें भी बदली जानी हैं, ऐसे हालातों में कुछ समस्या हो सकती है। समस्याएं दूर की जाएंगी। पूरे जिले में ऐसी समस्या नहीं है।
- अनूृप चंद्रा, एसई, बिजली विभाग