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आज भी जब सोते हैं तो जन्भूमि याद आती है, मां याद आती है: संतोष आनंद
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बदायूं। बॉलीवुड की मशहूर फिल्म ‘क्रांति’, ‘प्रेमरोग’ और ‘शोर’ जैसी फिल्मों में गीत लिखने वाले गीतकार संतोष आनंद संघर्ष और स्वाभिमान की जीती जागती मिसाल हैं। उम्र के इस पड़ाव पर आकर वह शारीरिक रूप से कुछ लाचार जरूर हैं, लेकिन उनके अंदर का युवा और फक्कड़ मिजाजी आज भी जिंदा है। वह कहते हैं कि जब भी बुलंदशहर की तरफ जाना होता है तो सिकंदराबाद जरूर जाते हैं, क्योंकि वह जन्मभूमि है, मां है। आज भी जब सोते हैं तो जन्मभूमि याद आती है, मां याद आती है।
शोर फिल्म के लिए ‘एक प्यार का नगमा है’, क्रांति के लिए ‘जिंदगी की न टूटे लड़ी’ जैसे गीत लिखने वाले गीतकार संतोष आनंद रविवार को बदायूं में थे। आचमन परिवार की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए संतोष आनंद को कुछ हादसों और उम्र ने शारीरिक रूप से कुछ कमजोर तो कर दिया है, लेकिन कांपते शरीर में भी जोश और ऊर्जा भरपूर है। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि वैसे तो अब वह कवि सम्मेलनों में नहीं जाते, लेकिन यहां स्व. उर्मिलेश का प्यार खींच लाया। उनकी बेटी सोनरूपा ने उनसे यहां आने का अनुरोध किया तो वह खुद को रोक नहीं पाए। नोएडा से आए गीतकार संतोष आनंद सड़कों की दुर्दशा से भी व्यथित दिखाई दिए। बोले- आज आदमी दिल्ली से अमेरिका जाने में इतना नहीं थकेगा, जितना दिल्ली से बदायूं आने में थक जाएगा। सड़कों के गड्ढे आदमी की चूलें हिला देते हैं।
विकास की बात पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि लोग विकास-विकास चिल्ला रहे हैं, लेकिन यह कहीं दिख नहीं रहा। आज के कवियों के बारे में उन्होेंने कहा कि कुछ कवि हैं जो अच्छा लिख रहे हैं, अच्छा कर रहे हैं। तकनीक की बात आई तो बोले- तकनीक के पीछे मत भागो, बल्कि तकनीक को अपने पीछे रखो। मजाक में वह यह भी कहना नहीं भूूले कि आज के नेता खुद को बहुत कुछ समझते हैं, लेकिन मैं नेताओं को कुछ नहीं समझता।
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शोर फिल्म के लिए ‘एक प्यार का नगमा है’, क्रांति के लिए ‘जिंदगी की न टूटे लड़ी’ जैसे गीत लिखने वाले गीतकार संतोष आनंद रविवार को बदायूं में थे। आचमन परिवार की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए संतोष आनंद को कुछ हादसों और उम्र ने शारीरिक रूप से कुछ कमजोर तो कर दिया है, लेकिन कांपते शरीर में भी जोश और ऊर्जा भरपूर है। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि वैसे तो अब वह कवि सम्मेलनों में नहीं जाते, लेकिन यहां स्व. उर्मिलेश का प्यार खींच लाया। उनकी बेटी सोनरूपा ने उनसे यहां आने का अनुरोध किया तो वह खुद को रोक नहीं पाए। नोएडा से आए गीतकार संतोष आनंद सड़कों की दुर्दशा से भी व्यथित दिखाई दिए। बोले- आज आदमी दिल्ली से अमेरिका जाने में इतना नहीं थकेगा, जितना दिल्ली से बदायूं आने में थक जाएगा। सड़कों के गड्ढे आदमी की चूलें हिला देते हैं।
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विकास की बात पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि लोग विकास-विकास चिल्ला रहे हैं, लेकिन यह कहीं दिख नहीं रहा। आज के कवियों के बारे में उन्होेंने कहा कि कुछ कवि हैं जो अच्छा लिख रहे हैं, अच्छा कर रहे हैं। तकनीक की बात आई तो बोले- तकनीक के पीछे मत भागो, बल्कि तकनीक को अपने पीछे रखो। मजाक में वह यह भी कहना नहीं भूूले कि आज के नेता खुद को बहुत कुछ समझते हैं, लेकिन मैं नेताओं को कुछ नहीं समझता।
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