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जिला अस्पताल की बिजली गुल, हाईवे पर लगा दिया जाम
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Wed, 05 Jul 2017 11:39 PM IST
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चक्का जाम
- फोटो : अमर उजाला
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डॉक्टर, तीमारदार और कर्मचारी दो दिन से झेल रहे थे किल्लत
सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ उझानी, कोतवाली पुलिस ने एक घंटे बाद हालात किए काबू
दो दिन से जिला अस्पताल में बिजली गुल होने और पानी की सप्लाई न आने से नाराज तीमारदारों, डॉक्टरों और कर्मचारियों ने बुधवार शाम को अस्पताल के सामने हाइवे पर चक्का जाम कर दिया। रोड के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारे लग गई। करीब आधे घंटे चले हंगामे की सूचना पर कोतवाल भरत कुमार गौतम मौके पर पहुंचे लेकिन नाराज लोगों के गुस्से को काबू नहीं कर सके। जानकारी पर पहुंचे एडीएम, सीओ उझानी ने विद्युत विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर दो घंटे में समस्या का निस्तारण कराने की बात कही, इसके बाद जाम खुलवाया जा सका।
मंगलवार सुबह से ट्रांसफार्मर में तकनीकी खराबी के कारण जिला अस्पताल में बिजली और पानी की व्यवस्था चरमरा गई थी। अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ उनके तीमारदार, डॉक्टर, और कर्मचारी भी इससे परेशान थे। जनरेटर के भरोसे दिन में चंद घटे ही बिजली सप्लाई मिल रही थी। दो दिन से लगातार अस्पताल में पानी और बिजली की किल्लत झेल रहे तीमारदारों, अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों का गुस्सा बुधवार शाम 6 बजे फूट पड़ा। उन्होंने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अस्पताल के सामने ही हाईवे पर चक्का जाम कर दिया। इससे दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई। आधे घंटे बाद मौके पर पहुंचे कोतवाली प्रभारी निरीक्षक भरत कुमार गौतम को देख लोगों का गुस्सा और भड़क गया। सूचना पर सिटी मजिस्ट्रेट राजुकमार द्विवेदी, सीओ उझानी कमलेश पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और नाराज लोगों की मांग पर विद्युत विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर समस्या का निस्तारण तुरंत कराने के निर्देश देते हुए जाम खुलवा दिया।
पुलिस बनी तमाशबीन, रोड पर पड़ा रहा तीमारदार
नाराज लोगों के बीच एक तीमारदार बीच रोड पर लेटा था। उसके परिवार का सदस्य भी जिला अस्पताल में भर्ती बताया गया है। मौके पर खड़े पुलिस कर्मी भी तमाशबीन बने हुए थे। किसी ने रोड पर लेटे तीमारदार को हटाने की जरूरत नहीं समझी। इस बीच बारिश शुरू हुई तो लोगों ने उसे उठाकर जिला अस्पताल में बैठवा दिया।
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एक्सरे और अल्ट्रासाउंड वार्ड में परेशान रहे लोग
बदायूं। जिला अस्पताल की बदइंतजामी की तस्वीरें तो अधिकतर अस्पताल में देखने को मिलती है। ऐसा ही एक नजारा बुधवार सुबह अस्पताल के एक्सरे और अल्ट्रासांउड विभाग में देखने को मिला। सुबह लगभग 11 बजे बत्ती गुल हो जाने से करीब तीन घंटे तक मरीज इधर उधर भटकते रहे। इस दौरान कई मरीज तो लौट गए। एक्सरे वार्ड में तैनात कर्मचारी ने जनरेटर चलाने के लिए तीन बार बोला फिर भी जनरेटर नहीं चल सका। बुधवार सुबह करीब 11 बजे जिला अस्पताल के एक्सरे और अल्ट्रासाउंड विभाग की बिजली गुल हो गई। करीब तीन घंटे तक बिजली ठीक नहीं होने से मरीज इधर उधर भटकते रहे। एक्सरे-वार्ड में तैनात कर्मचारी ने मरीजों की लंबी लाइन देख जनरेटर चलाने को कहा लेकिन किसी ने जरनरेटर नहीं चलाया। लाइन में खड़े मरीजों की स्थिति जहां बेहाल थी वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के डाक्टर भी नदारद दिखे। सारा काम वार्ड ब्वाय कर रहे थे। जिला अस्पताल में खड़ा जनरेटर शोपीस बना खड़ा रहा गया। रविवार दोपहर सड़क हादसे में घायल हुए उमाशंकर ने बताया कि उन्हें हाथ का एक्सरे कराना था। करीब दो घंटे तक बिजली नहीं आई तो वह निजी अस्पताल में एक्सरे कराने चले गए। इस्लामनगर निवासी रामवीर का कहना था कि पांव का एक्सरे कराने के लिए वह दो घंटे से लाइन में लगे थे। पता चला जनरेटर नहीं चलेगा और बिजली कब आए कुछ पता नहीं है। मजबूरन उन्हें भी किसी और अस्पताल में जाना पड़ा।
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सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ उझानी, कोतवाली पुलिस ने एक घंटे बाद हालात किए काबू
दो दिन से जिला अस्पताल में बिजली गुल होने और पानी की सप्लाई न आने से नाराज तीमारदारों, डॉक्टरों और कर्मचारियों ने बुधवार शाम को अस्पताल के सामने हाइवे पर चक्का जाम कर दिया। रोड के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारे लग गई। करीब आधे घंटे चले हंगामे की सूचना पर कोतवाल भरत कुमार गौतम मौके पर पहुंचे लेकिन नाराज लोगों के गुस्से को काबू नहीं कर सके। जानकारी पर पहुंचे एडीएम, सीओ उझानी ने विद्युत विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर दो घंटे में समस्या का निस्तारण कराने की बात कही, इसके बाद जाम खुलवाया जा सका।
मंगलवार सुबह से ट्रांसफार्मर में तकनीकी खराबी के कारण जिला अस्पताल में बिजली और पानी की व्यवस्था चरमरा गई थी। अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ उनके तीमारदार, डॉक्टर, और कर्मचारी भी इससे परेशान थे। जनरेटर के भरोसे दिन में चंद घटे ही बिजली सप्लाई मिल रही थी। दो दिन से लगातार अस्पताल में पानी और बिजली की किल्लत झेल रहे तीमारदारों, अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों का गुस्सा बुधवार शाम 6 बजे फूट पड़ा। उन्होंने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अस्पताल के सामने ही हाईवे पर चक्का जाम कर दिया। इससे दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई। आधे घंटे बाद मौके पर पहुंचे कोतवाली प्रभारी निरीक्षक भरत कुमार गौतम को देख लोगों का गुस्सा और भड़क गया। सूचना पर सिटी मजिस्ट्रेट राजुकमार द्विवेदी, सीओ उझानी कमलेश पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और नाराज लोगों की मांग पर विद्युत विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर समस्या का निस्तारण तुरंत कराने के निर्देश देते हुए जाम खुलवा दिया।
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पुलिस बनी तमाशबीन, रोड पर पड़ा रहा तीमारदार
नाराज लोगों के बीच एक तीमारदार बीच रोड पर लेटा था। उसके परिवार का सदस्य भी जिला अस्पताल में भर्ती बताया गया है। मौके पर खड़े पुलिस कर्मी भी तमाशबीन बने हुए थे। किसी ने रोड पर लेटे तीमारदार को हटाने की जरूरत नहीं समझी। इस बीच बारिश शुरू हुई तो लोगों ने उसे उठाकर जिला अस्पताल में बैठवा दिया।
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एक्सरे और अल्ट्रासाउंड वार्ड में परेशान रहे लोग
बदायूं। जिला अस्पताल की बदइंतजामी की तस्वीरें तो अधिकतर अस्पताल में देखने को मिलती है। ऐसा ही एक नजारा बुधवार सुबह अस्पताल के एक्सरे और अल्ट्रासांउड विभाग में देखने को मिला। सुबह लगभग 11 बजे बत्ती गुल हो जाने से करीब तीन घंटे तक मरीज इधर उधर भटकते रहे। इस दौरान कई मरीज तो लौट गए। एक्सरे वार्ड में तैनात कर्मचारी ने जनरेटर चलाने के लिए तीन बार बोला फिर भी जनरेटर नहीं चल सका। बुधवार सुबह करीब 11 बजे जिला अस्पताल के एक्सरे और अल्ट्रासाउंड विभाग की बिजली गुल हो गई। करीब तीन घंटे तक बिजली ठीक नहीं होने से मरीज इधर उधर भटकते रहे। एक्सरे-वार्ड में तैनात कर्मचारी ने मरीजों की लंबी लाइन देख जनरेटर चलाने को कहा लेकिन किसी ने जरनरेटर नहीं चलाया। लाइन में खड़े मरीजों की स्थिति जहां बेहाल थी वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के डाक्टर भी नदारद दिखे। सारा काम वार्ड ब्वाय कर रहे थे। जिला अस्पताल में खड़ा जनरेटर शोपीस बना खड़ा रहा गया। रविवार दोपहर सड़क हादसे में घायल हुए उमाशंकर ने बताया कि उन्हें हाथ का एक्सरे कराना था। करीब दो घंटे तक बिजली नहीं आई तो वह निजी अस्पताल में एक्सरे कराने चले गए। इस्लामनगर निवासी रामवीर का कहना था कि पांव का एक्सरे कराने के लिए वह दो घंटे से लाइन में लगे थे। पता चला जनरेटर नहीं चलेगा और बिजली कब आए कुछ पता नहीं है। मजबूरन उन्हें भी किसी और अस्पताल में जाना पड़ा।