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अभिभावक असमंजस में, छोटे बच्चों को स्कूल भेजें या न भेजें

Wed, 01 Sep 2021 02:20 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 01 Sep 2021 02:20 AM IST
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प्राथमिक विद्यालय, पुलिस लाइन नगर क्षेत्र में होती सफाई। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। शासन ने एक सितंबर से कक्षा एक से पांच तक के सभी स्कूलों को खोलने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत शिक्षकों की ओर से अभिभावक से बात की जा रही है ताकि वे छात्र-छात्राओं को स्कूल भेज दें। इसके विपरीत अभिभावक चिंता में हैं कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण में कहीं उनके बच्चे किसी खतरे के शिकार न पड़ जाएं। ऐसे में वह अभी इसी असमंजस में हैं कि अपने बच्चे को स्कूल भेजें या न भेजें।
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कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रदेश सरकार के निर्देश पर सभी स्कूल, कॉलेजों को बंद कर दिया गया था, लेकिन जब संक्रमण कम होने लगा तो बंद स्कूल, कॉलेजों को खोलने के निर्देश दिए थे। शासन के निर्देश पर कक्षा छह से 12 तक के स्कूल संचालित हो रहे हैं पर कक्षा एक से पांच तक के स्कूल बंद थे। इनको भी शासन के निर्देश पर एक सितंबर से खोला जा रहा है। ऐसे में स्कूलों में मंगलवार को सफाई अभियान चलाया गया। ताकि जब छोटे बच्चे स्कूल आएं तो उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत न हो। अधिकतर जगह शिक्षकों ने अभिभावकों से मुलाकात भी की उनसे अनुमति पत्र लिए लेकिन यह संख्या काफी कम रही। अभिभावकों में कोरोना वायरस से संक्रमण का डर बरकरार है।
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अगर बच्चा संक्रमित हुआ तो किसकी जिम्मेदारी
अभिभावकों का कहना है कि देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे समझा जा सकता है कि संकट अभी टला नहीं है। ऐसे में अगर उनका बच्चा संक्रमित होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। अभिभावकों मनोज कुमार, श्याम सुंदर, जितेंद्र मिश्रा, सोमेश सिंह का कहना है कि स्कूल वाले यह लिखवा रहे हैं कि अभिभावक अपनी सहमति से स्कूल भेज रहे हैं। इसका मतलब वे नहीं चाहते हैं कि बच्चों को स्कूल भेजें, क्योंकि अगर बच्चे को कुछ भी हुआ, तो स्कूल वालों की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
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बच्चों में 60 प्रतिशत के करीब ही मिली है एंटीबॉडी
पिछले दिनों शासन के निर्देश पर जिले में सीरो सर्वे हुआ था। इसमें सभी उम्र के लोगों और बच्चों के सैंपल लिए गए थे, उनके अंदर रोग-प्रतिरोधक क्षमता कितनी है, इसका पता लगाया गया। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सर्वे में जिले के युवाओं के अंदर 70 प्रतिशत के आसपास एंटीबॉडी मिले। वहीं छोटे बच्चों में यह प्रतिशत लगभग 60 के करीब है।
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काफी समय के बाद में स्कूल खुले रहे हैं, यह अच्छी बात हैं। स्कूल में बच्चों को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। जो ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से संभव नहीं है, अगर सरकार ने स्कूल खोले हैं तो उन्हें बच्चों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।
-दिनेश कुमार, सिविल लाइन
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शासन ने एक आदेश जारी कर दिया है कि अब छोटे बच्चों के स्कूल खुलेंगे। मानकों का स्कूलों में ध्यान रखा जाएगा। तो यह जिम्मेदारी क्यों नहीं ली जा रही कि अगर बच्चों को कुछ होता है तो स्कूल संचालक जिम्मेदार होंगे। सरकार अपने दायित्वों से मुंह मोड़ रही है, यह सही नहीं है। ऐसे में समझ नहीं आ रहा है कि बच्चों को स्कूल भेजें या नहीं।

-ओमदत्त, इस्लामनगर
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शिक्षकों ने कहा
आज से छोटे बच्चों के स्कूलों को शासन के निर्देश के अनुसार खोला जा रहा है। छात्र-छात्राओं को स्कूल मेें बेहतर तरीके से पढ़ाया जा सकेगा।
-कृष्णा शर्मा, अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रानेट, इस्लामनगर
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विद्यालय में बच्चों को कोविड गाइड लाइन के हिसाब से बैठाने की व्यवस्था की गई है। साथ ही सैनिटाइजेशन कराया गया है वहीं अभिभावकों से सहमति पत्र लिए जा रहे हैं।
- प्रिया बंसल, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय पुलिस लाइन
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