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विद्यार्थियों ने तालाब का अध्ययन कर जाना जल संकट
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बदायूं। वाटर सस्टेनेबिलिटी प्रोजेक्ट के तहत पूर्व माध्यमिक विद्यालय गंगपुर पुख्ता के छात्रों ने सिमटते तालाबों का अध्ययन कर जानकारी जुटाई। शिक्षक प्रवीण कुमार के नेतृत्व में बाल विज्ञानियों के समूह ने तालाब का अध्ययन किया।
शिक्षक प्रवीण कुमार ने बताया कि लगभग हर जगह यही हालात है। मनुष्य स्वार्थवश तालाबों का अस्तित्व समाप्त करता जा रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी हल्की वर्षा में बाढ़ जैसे हालात नजर आने लगे हैं। सबसे बड़ा प्रभाव निरंतर गिरता हुआ भूजल स्तर है। प्राचीन काल में प्रत्येक गांव में एक तालाब की उपस्थिति अनिवार्य होती थी, जिस कारण घरों से निकला गंदा पानी उसमें जमा होता रहता था, जो कि रिस रिस कर भूजल में मिलता रहता था। इस कारण भूजल स्तर भी नियंत्रित रहता था। अब पानी के अंधाधुंध दोहन के कारण जल स्तर दिनों दिन नीचे गिरता जा रहा है, जबकि पुनर्भरण की प्रक्रिया लगभग समाप्त होती जा रही है। यदि यही हालत बने रहे तो एक दिन भूगर्भ में उपस्थित जल समाप्त हो जाएगा और लोग जल संकट से घिर जाएंगे। इस दौरान छात्रों के समूह ने परिस्थतिकी तंत्र का भी अध्ययन किया। इस अवसर पर गुड्डू यादव, सतेंद्र, खुशबू, योगेश मनोज आदि उपस्थित रहे।
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शिक्षक प्रवीण कुमार ने बताया कि लगभग हर जगह यही हालात है। मनुष्य स्वार्थवश तालाबों का अस्तित्व समाप्त करता जा रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी हल्की वर्षा में बाढ़ जैसे हालात नजर आने लगे हैं। सबसे बड़ा प्रभाव निरंतर गिरता हुआ भूजल स्तर है। प्राचीन काल में प्रत्येक गांव में एक तालाब की उपस्थिति अनिवार्य होती थी, जिस कारण घरों से निकला गंदा पानी उसमें जमा होता रहता था, जो कि रिस रिस कर भूजल में मिलता रहता था। इस कारण भूजल स्तर भी नियंत्रित रहता था। अब पानी के अंधाधुंध दोहन के कारण जल स्तर दिनों दिन नीचे गिरता जा रहा है, जबकि पुनर्भरण की प्रक्रिया लगभग समाप्त होती जा रही है। यदि यही हालत बने रहे तो एक दिन भूगर्भ में उपस्थित जल समाप्त हो जाएगा और लोग जल संकट से घिर जाएंगे। इस दौरान छात्रों के समूह ने परिस्थतिकी तंत्र का भी अध्ययन किया। इस अवसर पर गुड्डू यादव, सतेंद्र, खुशबू, योगेश मनोज आदि उपस्थित रहे।
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