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नेत्रहीन विभूति डॉ. मुनीशानंद नहीं रहे, शोक की लहर

Tue, 12 May 2015 07:33 PM IST
badaun
badaun Updated Tue, 12 May 2015 07:33 PM IST
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Dr Vibhuti visually . Munishanand Are not , the wave of mourning

नेत्रहीन होने के बाद ब्रैललिपि सीखकर पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त गीता जैसे क्लिष्ट विषय पर पीएचडी का नया इतिहास लिखने वाले डॉ. मुनीशानंद प्रज्ञाचक्षु का उनके गांव संतनगर ऐभिया-मुहम्मदनगर सुलरा में निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे। उन्होंने उपनिषद साहित्य और महाभारत में दिव्य दृष्टि विषय पर डीलिट की उपाधि प्राप्त की। जिले में वही अकेले ऐसे व्यक्ति थे जो नेत्रहीन होने के बाद भी डॉक्टरेट उपाधि धारी थे।

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उन्होंने ऐभिया में भव्य आश्रम और आश्रम परिसर में बटुकेश्वर महादेवश्री विष्णु लक्ष्मीश्री राम दरबारश्री राधाकृष्ण, मां दुर्गा, हनुमान आदि के भव्य मंदिर बनवाए जहां ज्येष्ठ मास के गंगा दशहरा रक्षाबंधन आदि पर्वों पर भव्य मेला लगता है। उन्होंने अपने जन्मस्थान ऐभिया में डॉ. मुनीशानंद प्रज्ञाचक्षु इंटर कॉलेज की स्थापना भी की है। उनका अंतिम संस्कार उनके आश्रम में किया गया। मुखाग्नि उनके भतीजे महेंद्र शर्मा ने दी। महेंद्र शर्मा ने बताया कि साधु पद्धति से षोडस संस्कार 26 मई को ऐभिया में व अरिस्टी 20 मई को होगा। उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा है। भारतीय शौर्य संस्थान के संस्थापक डॉ. विष्णु प्रकाश मिश्र ने भी ऐभिया जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

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