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Budaun News: खुद कर रहे नौकरी, अप्रशिक्षित चला रहे अल्ट्रासाउंड सेंटर

Thu, 27 Feb 2025 12:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 27 Feb 2025 12:17 AM IST
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Doing the job themselves, running ultrasound center without training
सीएमओ कार्यालय। संवाद
बदायूं। जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 65 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं। इनमें पांच पर ही रेडियोलॉजिस्ट मौजूद हैं। खास यह है कि सेंटर मालिक खुद नौकरी कर रहे हैं, जबकि अप्रशिक्षित से अल्ट्रासाउंड सेंटर चलवा रहे हैं। अप्रशिक्षित कर्मचारी अल्ट्रासाउंड कर लोगों को गलत रिपोर्ट देने का काम कर रहे हैं। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को भी है, लेकिन सांठगांठ के चलते कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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जनपद में जांचों के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। बिना रेडियोलॉजिस्ट के ही 60 अल्ट्रासाउंड सेंटर चल रहे हैं। डीएम ने बैठक में कई बार अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन नोडल अधिकारी इनसे मोटी रकम लेकर इनको संचालित कराने का काम करते आ रहे हैं। महज पांच अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर ही रेडियोलॉजिस्ट काम कर रहे हैं।
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यहां किया जा रहा मरीजों की जान से खिलबाड़

अलापुर में संचालित अमल अल्ट्रासाउंड सेंटर के संचालक डॉ. अब्दुल अमन आजाद खुद राजकीय मेडिकल कॉलेज में तैनात हैं। सेंटर पर अप्रशिक्षित लोगों से अल्ट्रासाउंड करके मरीजों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
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ऐसे ही दातागंज के दिल्ली अल्ट्रासाउंड सेंटर के संचालक आरपी मिश्रा बरेली में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सेंटर का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद से ही अप्रशिक्षित लोगों से अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है। ऐसे ही सेंटरों पर गर्भ की जांच कर गर्भपात जैसे अवैध काम भी किए जा रहे हैं।



लाइसेंस के समय डिग्री दी, फिर हो गए लापता
सीएमओ कार्यालय में नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड सेंटर का लाइसेंस देने वाले पटल से ही मानकों की अनदेखी का खेल शुरू हो जाता है। विभाग के ही कर्मचारी बिचौलिये की भूमिका निभा रहे हैं। वे लाइसेंस बनवाने का ठेका लेकर एमबीबीएस डॉक्टर व रेडियोलॉजिस्ट के कागजात भी उपलब्ध करा देते हैं। कागजी खानापूर्ति पूरी कर अल्ट्रासाउंड का लाइसेंस दे दिया जाता है, जबकि अप्रशिक्षित लोग अल्ट्रासाउंड कर गलत रिपोर्ट देने का काम कर रहे हैं।



जिले में 65 अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं। सभी का पंजीकरण है। अगर रेडियोलॉजिस्ट सेंटरों पर नहीं बैठ रहे हैं तो यह अपराध है। जांच कराने के बाद विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पंजीकरण भी निरस्त किया जा सकता है। - डाॅ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ
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