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‘जल की बर्बादी नहीं रोकी तो पड़ेगा पछताना’
बदायूं, ब्यूरो
Updated Thu, 05 May 2016 11:35 PM IST
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पानी
- फोटो : अमर उजाला
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गायत्री परिवार की गोष्ठी में जल संरक्षण पर हुई चर्चा
अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में ‘जल अमृत और जीवन’ विषय पर गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र पर गोष्ठी हुई। जल की बर्बादी रोकने और संरक्षित करने के लिए परंपरागत कारगर तरीकों पर विचार विमर्श किया गया।
मुख्य प्रबंध ट्रस्टी बी ज्ञानेंद्र ने कहा कि मनुष्य ने पीने योग्य जल को अधिकतम बर्बाद कर दिया, जिसका खामियाजा पशु-पक्षियों और जीव-जंतु भी भुगत रहे हैं। तपती धूप में प्यास बुझाने को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। धरती चटक रही है, पेड़-पौधे सूख रहे हैं और बेजुवान जानवर तड़प कर मर रहे हैं। प्रकृति कराह रही है, लेकिन चलोगों को अपनी गलतियों का अहसास तक नहीं हो रहा।
सह प्रबंध ट्रस्टी अनिल कुमार राठौर ने कहा कि विकास और प्रकृति बीच सामंजस्य नही बनाया, तो असंतुलन के कारण सूखे का संकट हमेशा मंडराता रहेगा। भौतिक समृद्धि पाने की दौड़ में प्रकृति का दोहन न करें। जल के मूल्य को समझे और उसकी एक-एक अमृत तुल्य बूंद को बचाएं। निर्मल गंगा जन अभियान के जिला संयोजक सुखपाल शर्मा ने कहा कि सूखे की मार से फसलों पर भारी संकट आ रहा है। प्राकृतिक आपदाओं का आना, अच्छे संकेत नही हैं। शक्तिपीठ के संरक्षक सुरेंद्र नाथ शर्मा नढे कहा कि आपदा कभी कह कर नहीं आती। इसके लिए स्वयं को तैयार रखना पड़ता है। बीपी सिंह स्मारक स्कूल उझानी के निदेशक शैलेंद्र यादव ने कहा कि जल का उचित प्रबंधन ही सूखे का निवारण है। गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि जल को बर्बाद होने से रोके, जितना जरूरी है उतना ही खर्च करें। तपती धूप में परिंदों की प्यास बुझाने के लिए अपनी छतों पर किसी बर्तन दाना पानी जरूर रखें। इस मौके पर पंकज कुमार, भवेश शर्मा, मृत्युंजय शर्मा, सौम्या शर्मा, दीप्ति, हेमंत, खुशबू आदि परिजन मौजूद रहे।
अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में ‘जल अमृत और जीवन’ विषय पर गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र पर गोष्ठी हुई। जल की बर्बादी रोकने और संरक्षित करने के लिए परंपरागत कारगर तरीकों पर विचार विमर्श किया गया।
मुख्य प्रबंध ट्रस्टी बी ज्ञानेंद्र ने कहा कि मनुष्य ने पीने योग्य जल को अधिकतम बर्बाद कर दिया, जिसका खामियाजा पशु-पक्षियों और जीव-जंतु भी भुगत रहे हैं। तपती धूप में प्यास बुझाने को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। धरती चटक रही है, पेड़-पौधे सूख रहे हैं और बेजुवान जानवर तड़प कर मर रहे हैं। प्रकृति कराह रही है, लेकिन चलोगों को अपनी गलतियों का अहसास तक नहीं हो रहा।
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सह प्रबंध ट्रस्टी अनिल कुमार राठौर ने कहा कि विकास और प्रकृति बीच सामंजस्य नही बनाया, तो असंतुलन के कारण सूखे का संकट हमेशा मंडराता रहेगा। भौतिक समृद्धि पाने की दौड़ में प्रकृति का दोहन न करें। जल के मूल्य को समझे और उसकी एक-एक अमृत तुल्य बूंद को बचाएं। निर्मल गंगा जन अभियान के जिला संयोजक सुखपाल शर्मा ने कहा कि सूखे की मार से फसलों पर भारी संकट आ रहा है। प्राकृतिक आपदाओं का आना, अच्छे संकेत नही हैं। शक्तिपीठ के संरक्षक सुरेंद्र नाथ शर्मा नढे कहा कि आपदा कभी कह कर नहीं आती। इसके लिए स्वयं को तैयार रखना पड़ता है। बीपी सिंह स्मारक स्कूल उझानी के निदेशक शैलेंद्र यादव ने कहा कि जल का उचित प्रबंधन ही सूखे का निवारण है। गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि जल को बर्बाद होने से रोके, जितना जरूरी है उतना ही खर्च करें। तपती धूप में परिंदों की प्यास बुझाने के लिए अपनी छतों पर किसी बर्तन दाना पानी जरूर रखें। इस मौके पर पंकज कुमार, भवेश शर्मा, मृत्युंजय शर्मा, सौम्या शर्मा, दीप्ति, हेमंत, खुशबू आदि परिजन मौजूद रहे।
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