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Budaun News: आर्थिक रफ्तार में पिछड़ा जिला, प्रति व्यक्ति आय में 2,638 की बढ़ोतरी
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बदायूं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था लगातार रफ्तार पकड़ रही है, लेकिन जिले की आर्थिक प्रगति अब भी अपेक्षाकृत धीमी है। आंकड़ों के अनुसार, जिले की प्रति व्यक्ति आय में पिछले वर्ष की तुलना में केवल 2,638 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बाद जिले की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय बढ़कर 65,818 रुपये पहुंच गई है।
आंकड़े बताते हैं कि बरेली मंडल के अन्य जिलों की तुलना में जिले की आर्थिक प्रगति सबसे कम रही है। खासतौर पर बरेली जिले की स्थिति बदायूं से काफी बेहतर है। जहां प्रति व्यक्ति आय एक लाख रुपये के पार पहुंच चुकी है। ऐसे में जिला आर्थिक विकास की दौड़ में पीछे नजर आ रहा है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 32,789 करोड़ रुपये तक पहुंची है। प्रदेश की कुल अर्थव्यवस्था में जिले का योगदान मात्र 1.08 प्रतिशत है। वहीं, जिले की वार्षिक आर्थिक विकास दर 5.7 प्रतिशत दर्ज की गई है। जो अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है।
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बड़े उद्योगों की कमी बन रही परेशानी
जिले में बड़े उद्योगों की कमी, सीमित निवेश, रोजगार के अवसरों का अभाव और कृषि पर अत्यधिक निर्भरता आर्थिक विकास की धीमी गति के प्रमुख कारण हैं। क्योंकि बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जिले में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं का असर आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।
जिले में प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 65,818 रुपये हो गई है। गत वर्ष के अपेक्षा 2638 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। -सुरेश चंद्र, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी
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आंकड़े बताते हैं कि बरेली मंडल के अन्य जिलों की तुलना में जिले की आर्थिक प्रगति सबसे कम रही है। खासतौर पर बरेली जिले की स्थिति बदायूं से काफी बेहतर है। जहां प्रति व्यक्ति आय एक लाख रुपये के पार पहुंच चुकी है। ऐसे में जिला आर्थिक विकास की दौड़ में पीछे नजर आ रहा है।
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विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 32,789 करोड़ रुपये तक पहुंची है। प्रदेश की कुल अर्थव्यवस्था में जिले का योगदान मात्र 1.08 प्रतिशत है। वहीं, जिले की वार्षिक आर्थिक विकास दर 5.7 प्रतिशत दर्ज की गई है। जो अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है।
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बड़े उद्योगों की कमी बन रही परेशानी
जिले में बड़े उद्योगों की कमी, सीमित निवेश, रोजगार के अवसरों का अभाव और कृषि पर अत्यधिक निर्भरता आर्थिक विकास की धीमी गति के प्रमुख कारण हैं। क्योंकि बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जिले में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं का असर आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।
जिले में प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 65,818 रुपये हो गई है। गत वर्ष के अपेक्षा 2638 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। -सुरेश चंद्र, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी